13 जुलाई 2026
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सबरीमाला एसआईटी जांच ठप: देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने न्यायिक निगरानी पर उठाए सवाल

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सबरीमाला एसआईटी जांच ठप: देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने न्यायिक निगरानी पर उठाए सवाल

सारांश

सबरीमाला वित्तीय अनियमितता मामले में एसआईटी ने एक दर्जन से अधिक गिरफ्तारियाँ कीं, लेकिन चार्जशीट न होने से सभी आरोपी जमानत पर हैं। देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने चेतावनी दी — न्यायिक निगरानी की धीमी रफ्तार जांच को पटरी से उतार सकती है।

मुख्य बातें

मुरलीधरन ने 13 जुलाई को कहा कि सबरीमाला एसआईटी जांच न्यायिक निगरानी के कारण व्यावहारिक रूप से ठप हो गई है।
एसआईटी ने दो एफआईआर दर्ज कर त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अधिकारियों सहित एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन चार्जशीट न होने से सभी जमानत पर हैं।
मंत्री ने चेतावनी दी कि चार्जशीट में देरी से महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं और आरोपी सजा से बच सकते हैं।
मुरलीधरन ने थाझामोन तांत्री विवाद में बोर्ड के रवैये को अनुचित बताया और नियुक्तियों में सरकार के लिए अधिक स्वायत्तता माँगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का न्यायपालिका से टकराव का इरादा नहीं — न्यायिक निगरानी सुधारात्मक तंत्र बने, विकल्प नहीं।

केरल के देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने सोमवार, 13 जुलाई को चेतावनी दी कि सबरीमाला में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की कार्यवाही व्यावहारिक रूप से ठहर गई है, क्योंकि लंबी न्यायिक निगरानी प्रक्रिया ने जांच की गति को बाधित कर दिया है। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से कहा कि जांच को तार्किक परिणाम तक पहुँचाने के लिए केरल सरकार को अधिक प्रशासनिक स्वायत्तता मिलनी चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

एसआईटी ने अब तक इस मामले में दो एफआईआर दर्ज की हैं और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों सहित एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, आरोप पत्र दाखिल न होने के कारण गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट में लगातार हो रही देरी से अभियोजन पक्ष का मामला कमज़ोर पड़ सकता है और महत्वपूर्ण साक्ष्यों के नष्ट होने का खतरा बढ़ जाता है।

मंत्री का तर्क: कार्यपालिका बनाम न्यायपालिका

मुरलीधरन ने स्पष्ट किया कि सरकार का न्यायपालिका से टकराव का कोई इरादा नहीं है। उनके शब्दों में, 'सरकार को कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। अगर हमारी ओर से कोई गलती हुई है, तो अदालतें उसे सुधार सकती हैं।' उन्होंने तर्क दिया कि न्यायिक निगरानी को कार्यकारी निर्णय लेने का विकल्प नहीं, बल्कि एक सुधारात्मक तंत्र के रूप में काम करना चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब सबरीमाला मंदिर प्रशासन से जुड़े विवाद पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं। गौरतलब है कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के प्रशासनिक फैसलों पर न्यायिक हस्तक्षेप का यह पहला मौका नहीं है।

तांत्री विवाद और बोर्ड की आलोचना

मंत्री ने थाझामोन तांत्री से जुड़े विवाद में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के रवैये की भी आलोचना की। रिपोर्टों के अनुसार, तांत्री ने पद छोड़ने की इच्छा जताई थी और अपने पुत्र को उनकी जगह नियुक्त करने का अनुरोध किया था। बोर्ड ने इस पर कोई स्वतंत्र निर्णय लेने के बजाय मामले को न्यायालय के पास भेज दिया, जिसे मंत्री ने अनुचित और जिम्मेदारी से पलायन बताया। उन्होंने बोर्ड में नियुक्तियों से संबंधित मामलों में सरकार के लिए अधिक स्वायत्तता की माँग दोहराई।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

हिंदू ऐक्य वेदी नेताओं और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान के बीच हाल ही में हुई मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर मुरलीधरन ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने का अधिकार सभी को है और इसमें कोई असामान्य बात नहीं है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब सबरीमाला प्रशासन से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में केंद्र बिंदु बने हुए हैं।

आगे क्या होगा

मंत्री की चेतावनी के बाद अब यह देखना होगा कि एसआईटी कब तक आरोप पत्र दाखिल करती है और क्या अदालत कार्यवाही में तेजी लाने पर जोर देती है। मुरलीधरन के अनुसार, जब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती, आरोपियों के बच निकलने की संभावना बनी रहेगी। सबरीमाला वित्तीय अनियमितता मामले में जांच की दिशा और गति अब केरल सरकार और न्यायपालिका के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक विरोधाभास भी है — जो सरकार एसआईटी की जांच की धीमी गति पर सवाल उठा रही है, वही सरकार उस बोर्ड की देखरेख करती है जिसके अधिकारी आरोपी हैं। कार्यपालिका की 'अधिक स्वायत्तता' की माँग तब और पेचीदा हो जाती है जब जांच उसी कार्यपालिका के अधीन संस्था के खिलाफ हो। न्यायिक निगरानी को 'बाधा' बताना एक ऐसी व्याख्या है जिस पर स्वतंत्र विशेषज्ञों की राय बँटी हुई है। असली प्रश्न यह है कि चार्जशीट दाखिल करने में देरी एसआईटी की सीमाओं की वजह से है या किसी और कारण से — और इसका जवाब अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबरीमाला एसआईटी जांच किस मामले में हो रही है?
यह जांच सबरीमाला मंदिर प्रशासन में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी है। एसआईटी ने दो एफआईआर दर्ज की हैं और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों सहित एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।
एसआईटी जांच क्यों रुकी हुई है?
देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन के अनुसार, लंबी न्यायिक निगरानी प्रक्रिया ने जांच की गति को बाधित किया है। चार्जशीट दाखिल न होने के कारण सभी गिरफ्तार आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
चार्जशीट में देरी से क्या खतरा है?
मंत्री मुरलीधरन ने चेतावनी दी है कि देरी से महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं और आरोपियों के सजा से बचने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने अदालत से कार्यवाही में तेजी लाने पर जोर देने की अपील की है।
थाझामोन तांत्री विवाद क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, थाझामोन तांत्री ने पद छोड़ने की इच्छा जताई और अपने पुत्र को उनकी जगह नियुक्त करने का अनुरोध किया। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने इस पर स्वयं निर्णय लेने के बजाय मामला न्यायालय को सौंप दिया, जिसे मंत्री ने अनुचित बताया।
क्या केरल सरकार न्यायपालिका से टकराव चाहती है?
नहीं। मंत्री मुरलीधरन ने स्पष्ट किया कि सरकार का न्यायपालिका से टकराव का कोई इरादा नहीं है। उनका तर्क है कि न्यायिक निगरानी सुधारात्मक तंत्र के रूप में काम करे, न कि कार्यकारी निर्णय लेने के विकल्प के रूप में।
राष्ट्र प्रेस
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