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क्या पाकिस्तानी कोर्ट ने 12 मानवाधिकार नेताओं और कार्यकर्ताओं को बरी किया?

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क्या पाकिस्तानी कोर्ट ने 12 मानवाधिकार नेताओं और कार्यकर्ताओं को बरी किया?

सारांश

पाकिस्तान की अदालत ने मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी के उप आयोजक लाला अब्दुल वहाब बलूच और उनके 11 सहयोगियों को बरी कर दिया है। बीवाईसी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप की मांग की। जानिए इस फैसले का महत्व और इसके पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

मानवाधिकारों का सम्मान आवश्यक है।
राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई पर विचार करना चाहिए।
अदालत के निर्णय का महत्व।
बीवाईसी के नेताओं की गिरफ्तारी का संदर्भ।
समानता और न्याय की दिशा में कदम।

क्वेटा, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की एक अदालत ने मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के उप आयोजक लाला अब्दुल वहाब बलूच और 11 अन्य कार्यकर्ताओं को बरी कर दिया है। बीवाईसी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया था और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप की मांग की थी। इस स्थिति में, बीवाईसी ने अदालत के इस निर्णय को कानूनी राहत के रूप में माना।

बीवाईसी के अनुसार, सोमवार को कराची सिटी कोर्ट के सिविल जज और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नईम अख्तर ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को साबित करने में असफल रहने के बाद आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।

बरी किए गए लोगों में सरफराज बलूच, जैन बलूच, आफताब बलूच, काजी अमानुल्लाह, मुराद बलूच, वहीद बलूच, अहमद निसार, एहसान हमीद, साजिद बलूच, आमिर बलूच और अहसान फराज बलूच शामिल हैं। बीवाईसी ने आरोप लगाया है कि उनके कई अन्य नेता अब भी जेल में बंद हैं।

बीवाईसी ने कहा, "न्यायपालिका अपने अधिकार का इस्तेमाल इस तरह से कर रही है जिससे ये नेता हिरासत में हैं। न्याय, लंबे समय तक जेल में रहने और राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रहा है।"

मानवाधिकार संस्था ने बताया कि 18 जनवरी, 2025 को पाकिस्तान पीनल कोड के तहत रजिस्टर हुआ यह केस लगभग एक साल से अंडर ट्रायल था। अदालत ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अपना फैसला सुनाया।

बीवाईसी ने बताया कि उसके नेताओं और समर्थकों की गिरफ्तारियां पिछले साल बलूच यकजेहती कमेटी की ओर से 25 जनवरी, 2025 को ‘बलूच नरसंहार दिवस’ के तौर पर मनाई गई रैलियों के कारण हुई थीं। इसके तहत बलूचिस्तान और कराची में, ल्यारी और शराफी गोथ, मालिर समेत पूरे बलूचिस्तान में प्रदर्शन हुए थे।

बीवाईसी ने कहा कि उसके नेताओं, महिलाओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसा की गई और उन्हें मनगढ़ंत मामलों में हिरासत में लिया गया। संगठन ने बताया कि बीवाईसी नेताओं को शुरू में तीन महीने के लिए मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (3-एमपीओ) के तहत हिरासत में रखा गया था। यह एक ऐसा कानून है जो सरकार के पब्लिक ऑर्डर के लिए संभावित खतरों के आकलन के आधार पर निवारक निरोध की अनुमति देता है।

हालांकि, बीवाईसी ने इसे राजनीति से प्रेरित मामला बताया और आरोप लगाया कि बार-बार रिमांड पर लेने, जांच रिपोर्ट जमा करने में जानबूझकर देरी करने और सिस्टमैटिक प्रक्रियाओं में रुकावटों के कारण उनकी कैद लंबी हो गई है।

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि पाकिस्तानी अदालत ने स्पष्ट रूप से देखा है कि इन शिकायतों में ठोस आधार नहीं हैं और बीवाईसी नेताओं की गतिविधियां उनके संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत आती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए। इस मामले में अदालत का निर्णय महत्वपूर्ण है और इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। यह सभी नागरिकों के लिए न्याय और समानता की दिशा में एक कदम है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तानी कोर्ट ने किसे बरी किया?
पाकिस्तानी कोर्ट ने मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी के उप आयोजक लाला अब्दुल वहाब बलूच और 11 अन्य कार्यकर्ताओं को बरी किया।
बीवाईसी ने इस निर्णय को किस तरह से देखा?
बीवाईसी ने इस निर्णय को कानूनी राहत के रूप में देखा और इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया।
क्या बीवाईसी के अन्य नेता भी जेल में हैं?
जी हाँ, बीवाईसी ने आरोप लगाया है कि उनके कई अन्य नेता अब भी जेल में बंद हैं।
यह मामला कब से अंडर ट्रायल था?
यह मामला लगभग एक साल से अंडर ट्रायल था।
बीवाईसी के नेताओं पर किस तरह की कार्रवाई हुई?
बीवाईसी के नेताओं पर हिंसा की गई और उन्हें मनगढ़ंत मामलों में हिरासत में लिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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