क्या परिहार विधानसभा में चौथी बार कमल खिलेगा या लालटेन से भाजपा का विजयी रथ रोका जाएगा?

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क्या परिहार विधानसभा में चौथी बार कमल खिलेगा या लालटेन से भाजपा का विजयी रथ रोका जाएगा?

सारांश

बिहार के परिहार विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियाँ जोर पकड़ रही हैं। भाजपा और राजद दोनों ही इस सीट पर चुनावी तैयारी में लगे हैं। क्या भाजपा चौथी बार जीत पाएगी या राजद की लालटेन रोशनी देगी?

Key Takeaways

  • परिहार विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का दबदबा
  • राजद का बढ़ता समर्थन
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व
  • शिक्षा और जागरूकता का बढ़ता स्तर
  • स्थानीय व्यापार में वृद्धि

नई दिल्ली, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में इस वर्ष के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सीतामढ़ी जिले की परिहार विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इस सीट पर जीत की हैट्रिक बना चुकी भाजपा और पिछले चुनाव में उसे कड़ी टक्कर देने वाली राजद, दोनों ही पार्टियाँ चुनावी तैयारियों में जुटी हैं।

परिहार विधानसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इसके बाद से इस सीट पर तीन विधानसभा चुनाव (2010, 2015 और 2020) हो चुके हैं। इन तीनों चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का दबदबा रहा है। हालाँकि, 2020 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी गायत्री देवी और राजद उम्मीदवार ऋतु जायसवाल के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। हार-जीत का अंतर एक प्रतिशत से भी कम था।

बिहार के सीतामढ़ी जिले में नेपाल की सीमा के निकट बसा परिहार विधानसभा क्षेत्र अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवनशैली के लिए जाना जाता है। यह बाढ़-प्रवण क्षेत्र न केवल मिथिला की ऐतिहासिक और पौराणिक परंपराओं से जुड़ा है, बल्कि यहाँ के लोगों का मेहनती और साधारण जीवन इसे एक अनूठी पहचान देता है।

यह क्षेत्र जनकपुर जैसे नेपाली शहरों से व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र है। यहाँ के लोग नेपाल के मेलों और धार्मिक उत्सवों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं और सीमा पार का व्यापार स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा है।

परिहार पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है। यहाँ के लोग सादगी भरा जीवन जीते हैं। हाल के वर्षों में गाँवों में बिजली और सड़क संपर्क में सुधार हुआ है, लेकिन बुनियादी सुविधाएँ अब भी सीमित हैं।

यहाँ पर शिक्षा का स्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन कई परिवार अब भी आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं भेज पाते। हालाँकि, युवाओं में राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता बढ़ रही है, जो चुनावों में उनके सक्रिय भागीदारी से झलकती है।

परिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। धान, गेहूँ, मक्का, दालें और सब्जियाँ यहाँ की प्रमुख फसलें हैं। बाढ़ के कारण फसल चक्र में व्यवधान आता है, लेकिन किसान नई तकनीकों और बीजों का उपयोग कर रहे हैं। गाय और भैंस पालन यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूध और दुग्ध उत्पाद स्थानीय बाजारों में बिक्री के लिए जाते हैं।

परिहार में कोई बड़ा उद्योग नहीं है, लेकिन छोटे पैमाने पर हस्तशिल्प और मधुबनी पेंटिंग से कुछ परिवार आय अर्जित करते हैं। सड़क संपर्क में सुधार के बाद स्थानीय व्यापार में वृद्धि हुई है।

परिहार विधानसभा में कुल जनसंख्या 567339 है। इनमें 295277 पुरुष और महिलाएं 272062 हैं। चुनाव आयोग के डेटा के अनुसार, एक जनवरी 2024 तक इस सीट पर कुल मतदाता 331669 हैं। इनमें से 174718 पुरुष मतदाता, 156927 महिला मतदाता और थर्ड जेंडर के 24 वोटर हैं।

इस सीट पर 2010 के चुनाव में राम नरेश प्रसाद यादव ने भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। 2015 और 2020 में गायत्री देवी ने भाजपा की जीत को बरकरार रखा। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा चौथी बार जीत दर्ज कर पाएगी या पिछले चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देने वाली राजद की लालटेन चमक उठेगी।

Point of View

NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

परिहार विधानसभा सीट का इतिहास क्या है?
परिहार विधानसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और तब से भाजपा का दबदबा रहा है।
यहाँ के लोग किस प्रकार की आजीविका अपनाते हैं?
परिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, जिसमें धान, गेहूँ और सब्जियाँ शामिल हैं।
क्या यहाँ शिक्षा का स्तर अच्छा है?
शिक्षा का स्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा नहीं ले पाते।
इस सीट पर कौन सी पार्टी का दबदबा है?
भाजपा ने इस सीट पर तीन बार जीत हासिल की है, लेकिन राजद ने पिछले चुनाव में कड़ी टक्कर दी।
परिहार विधानसभा क्षेत्र की जनसंख्या कितनी है?
परिहार विधानसभा की कुल जनसंख्या 567339 है, जिसमें 331669 मतदाता हैं।