क्या पश्चिम बंगाल में एसएससी के सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी ने 57.78 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की?

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क्या पश्चिम बंगाल में एसएससी के सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी ने 57.78 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की?

सारांश

पश्चिम बंगाल में एसएससी के सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने 57.78 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की हैं। जांच से पता चला है कि ये संपत्तियां अवैध नियुक्तियों से प्राप्त धन से खरीदी गई थीं। पढ़ें इस घोटाले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • ईडी ने 57.78 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की हैं।
  • भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी।
  • जिबन कृष्ण साहा और प्रसन्न कुमार रॉय मुख्य आरोपी हैं।
  • अवैध नियुक्तियों से मिली धनराशि से संपत्तियां खरीदी गईं।

कोलकाता, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय ने खुलासा किया है कि कोलकाता जोनल ऑफिस ने पश्चिम बंगाल केंद्रीय स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले (कक्षा 9 से 12) से संबंधित मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) 2002 के तहत लगभग 57.78 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं।

जानकारी के अनुसार, ये संपत्तियां जिबन कृष्ण साहा (विधायक), प्रसन्न कुमार रॉय और अन्य के नाम पर हैं। इसमें राजारहाट, न्यू टाउन, पाथरघाटा, गरागरी और उत्तर 24 परगना जिले के आसपास के इलाकों के साथ ही मुर्शिदाबाद और पूर्व बर्धमान जिलों में स्थित कई फ्लैट, विला और जमीन के टुकड़े शामिल हैं। ये संपत्तियां कोलकाता में भी स्थित हैं।

जांच में यह पता चला कि ये संपत्तियां अवैध तरीके से की गई सहायक शिक्षक नियुक्तियों से प्राप्त पैसों (अपराध की आय) से खरीदी गई थीं।

ईडी ने यह जांच सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जो कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थीं। जांच में सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी, जैसे ओएमआर शीट और इंटरव्यू के अंकों में छेड़छाड़ और समय सीमा खत्म होने के बाद भी अपात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति की गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि प्रसन्न कुमार रॉय इस घोटाले का मुख्य बिचौलिया था। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अपात्र उम्मीदवारों से अवैध नियुक्ति के बदले भारी रकम वसूली। यह पैसा कई कंपनियों, एलएलपी और बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और अंत में संपत्तियां खरीदने में लगाया गया।

ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि जिबन कृष्ण साहा इस घोटाले में प्रमुख आरोपी है, उसने ग्रुप सी, डी और सहायक शिक्षक पदों की अवैध नियुक्तियों के बदले मिले पैसों की वसूली और उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसे 25 अगस्त 2025 को ईडी ने गिरफ्तार किया था, जब वह मुर्शिदाबाद स्थित अपने घर पर छापे के दौरान भागने की कोशिश कर रहा था।

जांच में यह साबित हुआ कि यह पैसा उसके और परिवार के नाम पर संपत्तियां खरीदने में लगाया गया था, जिनकी कीमत करीब 3.01 करोड़ रुपए है।

जांच में यह भी सामने आया कि कई संपत्तियां नीलिमा मंगल, जो प्रसन्न कुमार रॉय की करीबी सहयोगी/पूर्व पत्नी हैं, उनके नाम पर खरीदी गई थीं। इन संपत्तियों के लिए इस्तेमाल किया गया पैसा भी अवैध भर्ती घोटालों से आया था। ईडी ने पहले ही इस मामले में प्रसन्न कुमार रॉय को गिरफ्तार कर लिया था और विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है।

इससे पहले ईडी ने पश्चिम बंगाल के एसएससी ग्रुप सी और D भर्ती घोटाले में 247.2 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की थीं। कक्षा 9 से 12 के सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले में पहले ही 238.78 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। वहीं, प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में भी करीब 154 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त/कुर्क की गई हैं। इस तरह अब तक भर्ती घोटालों में ईडी कोलकाता द्वारा कुल 698 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।

Point of View

बल्कि यह हमें यह सोचने पर भी मजबूर करता है कि क्या हमारी नीतियां और प्रक्रियाएं पारदर्शी और निष्पक्ष हैं। इसमें शामिल सभी व्यक्तियों को कड़ा दंड मिलना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो सके।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने कितनी संपत्तियां कुर्क की हैं?
ईडी ने लगभग 57.78 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की हैं।
यह घोटाला किससे संबंधित है?
यह घोटाला पश्चिम बंगाल के एसएससी के सहायक शिक्षक भर्ती से संबंधित है।
जांच का आधार क्या था?
जांच का आधार सीबीआई की एफआईआर थी, जो कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थी।
प्रसन्न कुमार रॉय की भूमिका क्या थी?
प्रसन्न कुमार रॉय इस घोटाले का मुख्य बिचौलिया था, जिसने अपात्र उम्मीदवारों से अवैध नियुक्तियों के बदले भारी रकम वसूली।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की गई है?
ईडी ने पहले ही प्रसन्न कुमार रॉय को गिरफ्तार कर लिया है और विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है।
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