निर्यात संकट पर बड़ा कदम: पीयूष गोयल 27 अप्रैल को निर्यातकों संग करेंगे अहम बैठक
सारांश
Key Takeaways
- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 27 अप्रैल 2025 को निर्यात प्रोत्साहन परिषदों और उद्योग संगठनों के साथ उच्चस्तरीय बैठक करेंगे।
- मार्च 2025 में भारत का निर्यात 7.44%25 गिरकर 38.92 अरब डॉलर पर आया — 5 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट।
- पश्चिम एशिया को निर्यात 50%25 से अधिक घटा; मध्य पूर्व को कुल निर्यात 58%25 तक गिरा।
- भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भारत मंडपम में हस्ताक्षर होने की संभावना।
- वित्त वर्ष 2025-26 में माल निर्यात 441.78 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर, लेकिन व्यापार घाटा 333.2 अरब डॉलर तक बढ़ा।
- बैठक में चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, खेल सामग्री और इंजीनियरिंग क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 27 अप्रैल (सोमवार) को निर्यात प्रोत्साहन परिषदों और उद्योग संगठनों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और लगातार घटते निर्यात के बीच यह बैठक भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए निर्णायक मानी जा रही है। केंद्र सरकार इस बैठक में निर्यात पुनरुद्धार की ठोस रणनीति तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
पश्चिम एशिया संकट और भारतीय निर्यात पर असर
ईरान-अमेरिका तनाव के कारण मध्य पूर्व में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। उद्योग सूत्रों के अनुसार, शिपिंग कंपनियां इस क्षेत्र में परिचालन से पीछे हट रही हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को अपना माल भेजने में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। मध्य पूर्व भारत के सबसे प्रमुख निर्यात गंतव्यों में से एक है।
मार्च 2025 में भारत का निर्यात 7.44 प्रतिशत गिरकर 38.92 अरब डॉलर पर आ गया — यह पिछले पांच महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया को निर्यात 50 प्रतिशत से अधिक घट गया, जो किसी भी क्षेत्रीय बाजार के लिए असाधारण रूप से तीव्र गिरावट है।
भारत-न्यूजीलैंड FTA और व्यापारिक अवसर
सोमवार की बैठक से पहले भारत मंडपम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ पहले से भारत में हैं और भारतीय उद्योग जगत के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं।
इससे पहले रविवार को पीयूष गोयल ने आगरा में भारतीय और न्यूजीलैंड के व्यापारिक नेताओं के साथ अनौपचारिक चर्चा की, जो द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को गहरा करने और नए बाजार अवसर तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
बैठक में किन क्षेत्रों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
सोमवार की उच्चस्तरीय बैठक में चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, खेल सामग्री और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। ये सभी क्षेत्र भू-राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक व्यापार व्यवधानों से सीधे प्रभावित हुए हैं।
गौरतलब है कि मध्य पूर्व को भारत का निर्यात लगभग 58 प्रतिशत और खाड़ी देशों से आयात 51 प्रतिशत से अधिक गिर चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि समस्या किसी एक उत्पाद या क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक संरचनात्मक चुनौती बन चुकी है।
व्यापार घाटा और आयात के ताज़ा आंकड़े
मार्च 2025 में कच्चे तेल और सोने की आवक में कमी के कारण आयात भी 6.51 प्रतिशत घटकर 59.59 अरब डॉलर रह गया। इसके परिणामस्वरूप व्यापार घाटा नौ महीनों के निचले स्तर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत के माल निर्यात में 0.93 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज हुई और यह 441.78 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा। हालांकि आयात 7.45 प्रतिशत बढ़कर 775 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे व्यापार घाटा 333.2 अरब डॉलर हो गया — इसका मुख्य कारण सोने और चांदी के आयात में भारी उछाल था।
वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में 4.22 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 2025-26 में 860.09 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
गहरा विश्लेषण: सिर्फ पश्चिम एशिया नहीं, बड़ी तस्वीर क्या है?
यह ध्यान देने योग्य है कि भारत का मध्य पूर्व पर निर्यात निर्भरता दशकों पुरानी है। जब भी इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक संकट आता है — चाहे 2019 का ईरान-अमेरिका तनाव हो, 2020 का यमन संघर्ष हो या 2023-24 का लाल सागर संकट — भारतीय निर्यातक सबसे पहले प्रभावित होते हैं। इस बार भी वही पैटर्न दोहराया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निर्यात बाजारों के विविधीकरण की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, लेकिन ठोस नीतिगत कदम अभी तक अपर्याप्त रहे हैं। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए इसी दिशा में एक प्रयास है, लेकिन न्यूजीलैंड का बाजार मध्य पूर्व की तुलना में बहुत छोटा है।
आगे की राह देखें तो 27 अप्रैल की बैठक में लिए गए फैसले और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए के प्रावधान भारत की निर्यात नीति की दिशा तय करेंगे। उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार वैकल्पिक शिपिंग मार्गों, निर्यात बीमा सुविधाओं और नए बाजारों में प्रवेश के लिए ठोस प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करेगी।