क्या पूर्व डीजीपी रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट पर सेवानिवृत्त एडीजीपी पीके जैन का यह बयान गंभीर है?
सारांश
Key Takeaways
- रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट में गंभीर आरोप शामिल हैं।
- पीके जैन ने कार्रवाई की संभावना जताई है।
- यूएलसी स्कैम में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के शामिल होने का आरोप है।
- गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
- नए कानून के अनुसार झूठे आरोप लगाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के पूर्व एडीजीपी पीके जैन ने राज्य की पूर्व डीजीपी रश्मि शुक्ला की उस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यूएलसी स्कैम में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को फंसाने के लिए साजिश की गई थी।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए पीके जैन ने कहा कि यदि रश्मि शुक्ला द्वारा कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की गई होगी, तो उसमें कई साक्ष्य और तथ्य अवश्य होंगे। आपको याद होगा कि पहले भी एक मामला सामने आया था, जिसमें एक सरकारी वकील ने पूर्व मंत्री गिरीश महाजन को फंसाने की साजिश की थी, लेकिन किसी ने गुप्त कैमरे में इसे रिकॉर्ड कर लिया। यही कारण है कि यह साजिश उजागर हो गई। इस मामले की जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। ऐसे मामले पूर्व की सरकार में भी हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इस बार फिर से एक नया मामला सामने आया है, जब रश्मि शुक्ला ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। निस्संदेह, अगले दिनों में इस पूरे मामले की जांच की जाएगी, जिसमें कई लोगों की गिरफ्तारी की संभावना है। गौर करने वाली बात है कि जब गिरीश महाजन का मामला सामने आया था, तब दावा किया गया था कि देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को किसी अन्य मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में बीएनएस में एक नई धारा जोड़ी गई है, जिसके अनुसार यदि कोई झूठे आरोप या साक्ष्यों का सहारा लेकर किसी को झूठे मामले में फंसाने का प्रयास करेगा, तो उसे निश्चित तौर पर कड़ी कार्रवाई का सामना करना होगा। यदि कोई वरिष्ठ अधिकारी इस तरह के आरोप लगाते हैं, तो आने वाले दिनों में कई लोगों को कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
पूर्व एडीजीपी पीके जैन ने कहा कि इससे पहले भी एक बड़े पुलिस अधिकारी ने मंत्री पर ऐसे ही आरोप लगाए थे। वह मंत्री कई महीनों तक जेल में भी रहे थे। ऐसी स्थिति में यदि पूर्व पुलिस अधिकारी ने ऐसे गंभीर आरोप लगाए हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि ये संबंधित मंत्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।