जनगणना 2027 सिर्फ सरकारी काम नहीं, पीएम मोदी ने 'मन की बात' में देशवासियों से की बड़ी अपील

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जनगणना 2027 सिर्फ सरकारी काम नहीं, पीएम मोदी ने 'मन की बात' में देशवासियों से की बड़ी अपील

सारांश

पीएम मोदी ने 'मन की बात' में जनगणना 2027 को राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया। डिजिटल स्वरूप में हो रही इस जनगणना में नागरिक खुद जानकारी दर्ज कर सकते हैं। अब तक 1.2 करोड़ परिवारों का सूचीकरण पूरा। यह जनगणना नीति निर्माण और परिसीमन दोनों को प्रभावित करेगी।

Key Takeaways

  • पीएम नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल को 'मन की बात' में जनगणना 2027 को राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया।
  • जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल है — गणना कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप होगा।
  • नागरिक कर्मचारी के आने से 15 दिन पहले स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
  • अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण पूरा हो चुका है।
  • जनगणना डेटा गोपनीय और डिजिटल सुरक्षा से संरक्षित रहेगा।
  • यह जनगणना 2011 के बाद पहली होगी और परिसीमनओबीसी जनगणना जैसे मुद्दों पर सीधा असर डालेगी।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देशवासियों से जनगणना 2027 को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है और यह केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

डिजिटल जनगणना — एक ऐतिहासिक बदलाव

जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल रूप दिया गया है, जो भारत की जनगणना के इतिहास में पहली बार हो रहा है। पीएम मोदी ने बताया कि इस बार घर-घर जाने वाले गणना कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप होगा, जिसमें वे नागरिकों से बातचीत कर सीधे जानकारी दर्ज करेंगे। पहले कागजी फॉर्म पर निर्भर रहने वाली यह प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम में स्थानांतरित हो चुकी है।

गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के बाद से यह प्रक्रिया 14 वर्षों से अधिक समय से लंबित थी। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में निर्धारित जनगणना को स्थगित करना पड़ा था। अब 2027 में इसे नए डिजिटल स्वरूप के साथ पूरा किया जाएगा।

स्व-गणना की सुविधा — नागरिक खुद भर सकते हैं जानकारी

पीएम मोदी ने बताया कि इस बार नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा दी गई है। गणना कर्मचारी के घर आने से 15 दिन पहले नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। जानकारी भरने के बाद नागरिक को एक विशेष आईडी उनके मोबाइल या ईमेल पर प्राप्त होगी।

जब कर्मचारी घर पर आएगा, तो नागरिक यही आईडी दिखाकर जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं — इससे दोबारा जानकारी देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह व्यवस्था समय और संसाधन दोनों की बचत करती है।

अब तक 1.2 करोड़ परिवारों का सूचीकरण पूरा

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि जिन राज्यों में स्व-गणना का कार्य पूरा हो चुका है, वहां गणना कर्मचारियों द्वारा घरों के सूचीकरण का कार्य भी आरंभ कर दिया गया है। अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण पूरा किया जा चुका है। यह आंकड़ा इस अभियान की गति और व्यापकता को दर्शाता है।

डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का आश्वासन

पीएम मोदी ने नागरिकों की गोपनीयता को लेकर भी स्पष्टता दी। उन्होंने कहा कि जनगणना में दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाती है। इसे डिजिटल सुरक्षा प्रणाली के जरिए संरक्षित किया जाता है।

यह आश्वासन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल डेटा की सुरक्षा को लेकर आम नागरिकों में संदेह बना रहता है। भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 के तहत इस डेटा को कानूनी सुरक्षा भी प्राप्त है।

जनगणना का महत्व — नीति निर्माण की नींव

जनगणना के आंकड़े भारत सरकार की कल्याणकारी योजनाओं — जैसे राशन वितरण, आवास योजना, शिक्षा नीति और स्वास्थ्य बजट — के लिए आधार का काम करते हैं। 2011 की पुरानी जनगणना के आधार पर चल रही योजनाएं वास्तविक जनसंख्या से मेल नहीं खातीं, जिससे संसाधनों का असमान वितरण होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना 2027 के आंकड़े परिसीमन प्रक्रिया, ओबीसी जनगणना की मांग और संसद सीटों के पुनर्वितरण जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर भी असर डालेंगे। इस दृष्टि से यह जनगणना केवल सांख्यिकीय अभ्यास नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला दस्तावेज़ है।

आने वाले महीनों में जनगणना 2027 की प्रक्रिया और तेज होगी। नागरिकों से अपेक्षा है कि वे समय पर अपनी जानकारी दर्ज करें ताकि देश का यह सबसे बड़ा डेटा संग्रह अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो सके।

Point of View

लेकिन इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक तस्वीर है। 2011 के पुराने आंकड़ों पर टिकी सरकारी योजनाएं वास्तविकता से कोसों दूर हैं — और यह जनगणना परिसीमन, ओबीसी जनगणना की राजनीति और संसदीय सीटों के पुनर्वितरण को सीधे प्रभावित करेगी। डिजिटल स्वरूप की तारीफ जरूरी है, लेकिन असली सवाल यह है कि ग्रामीण और वंचित वर्गों तक यह डिजिटल सुविधा कितनी पहुंचेगी। जनगणना का डेटा जितना सटीक होगा, उतनी ही न्यायसंगत होगी संसाधनों की बंदरबांट — इसलिए यह अभियान केवल सांख्यिकी नहीं, लोकतंत्र की असली परीक्षा है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

जनगणना 2027 में नागरिक खुद कैसे जानकारी दर्ज कर सकते हैं?
जनगणना 2027 में नागरिक गणना कर्मचारी के आने से 15 दिन पहले ऑनलाइन स्व-गणना कर सकते हैं। जानकारी दर्ज करने के बाद मोबाइल या ईमेल पर एक विशेष आईडी मिलती है जिसे कर्मचारी के सामने दिखाकर पुष्टि की जा सकती है।
जनगणना 2027 को डिजिटल क्यों बनाया गया है?
जनगणना 2027 को डिजिटल बनाने का उद्देश्य डेटा संग्रह को तेज, सटीक और पारदर्शी बनाना है। गणना कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए सीधे जानकारी दर्ज करेंगे, जिससे कागजी प्रक्रिया की त्रुटियां और देरी दोनों कम होंगी।
जनगणना 2027 में अब तक कितने परिवारों का सूचीकरण हुआ?
पीएम मोदी के अनुसार अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण पूरा हो चुका है। जिन राज्यों में स्व-गणना पूरी हो गई है, वहां घरों की सूची बनाने का काम भी शुरू हो गया है।
क्या जनगणना में दी गई जानकारी सुरक्षित रहती है?
हां, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि जनगणना में दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय और डिजिटल सुरक्षा से संरक्षित रहती है। इसे किसी अन्य सरकारी उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाता।
जनगणना 2027 क्यों महत्वपूर्ण है?
जनगणना 2027 के आंकड़े सरकारी योजनाओं, बजट आवंटन, परिसीमन और ओबीसी जनगणना जैसे अहम मुद्दों का आधार बनेंगे। 2011 के बाद यह पहली जनगणना होगी जो 14 वर्षों की देरी के बाद देश की वास्तविक जनसंख्या स्थिति को दर्शाएगी।
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