क्या पीएम मोदी ने 'मन की बात' में नेपुरा के हैंडलूम का जिक्र किया? बुनकर नवीन कुमार का आभार
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नई दिल्ली, 27 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में नालंदा के सिलाव प्रखंड के नेपुरा गांव के बुनकर नवीन कुमार के कार्य की प्रशंसा की, जिसके परिणामस्वरूप पूरे गांव और बुनकर समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई है। पीएम मोदी ने नवीन कुमार को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि कैसे उनका परिवार पीढ़ियों से इस कार्य में संलग्न है और अब वे नई तकनीक को अपनाकर इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं।
इस सराहना के उपरांत नवीन कुमार ने पीएम मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा, "आज तक किसी ने हम बुनकरों से इस तरह सीधे बात नहीं की। हमें उम्मीद है कि अब हमारी समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा। हम लोग बचपन से इस पुश्तैनी काम से जुड़े हैं। हम हैंडलूम पर सिल्क की शर्टिंग, कुर्ता, साड़ियां और ड्रेस मटेरियल बनाते हैं। पहले हम 'पिट लूम' पर काम करते थे, लेकिन अब भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के एक प्रोजेक्ट के तहत नया फ्रेम लूम मिला है, जिसे छत पर भी लगा सकते हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि बुनकर कोटे के तहत यहां के बच्चे एनआईएफटी जैसे संस्थानों में पढ़ने जा रहे हैं, जो इस कला के भविष्य के लिए एक अच्छा संकेत है। यहां पर एक बुनकर समिति है। वस्त्र मंत्रालय ने इस समिति को बड़ी जिम्मेदारी दी है। हम इससे जुड़कर बुनकर समाज के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं। हमसे 70-80 लोग जुड़े हैं, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। बिक्री न होने के कारण हमारे बच्चे बुनाई पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हमें खुशी है कि पीएम मोदी ने बुनकरों के मुद्दों पर बात की। हमें उम्मीद है कि जो भी लाभकारी योजना बनेगी, उसका लाभ मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि हमारा कपड़ा बिहार सरकार के उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के माध्यम से दिल्ली और पटना के मॉल में जाता है। लेकिन, वहां की शर्त होती है कि जब कपड़ा बिकेगा, तब पेमेंट मिलेगा। ऐसे में हम बुनकर अगली बार के लिए धागा कैसे खरीदें और अपना परिवार कैसे चलाएं?
बुनकर कालूराम ने कहा कि पीएम मोदी का आभार है कि उन्होंने ग्रामीण बुनकरों पर ध्यान दिया है। बुनकरों को एक स्थायी बाजार उपलब्ध कराने और उनकी मेहनत के अनुसार मजदूरी न मिलने की समस्या पर ध्यान देना चाहिए। बुनकरों के लिए एक पेंशन योजना शुरू की जानी चाहिए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।