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क्या स्वामीनारायण साधना की प्रतिमूर्ति रहे, शिक्षापत्री के रूप में जीवन का अनमोल मार्गदर्शन दिया : पीएम मोदी?

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क्या स्वामीनारायण साधना की प्रतिमूर्ति रहे, शिक्षापत्री के रूप में जीवन का अनमोल मार्गदर्शन दिया : पीएम मोदी?

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षापत्री द्विशताब्दी महोत्सव को संबोधित करते हुए भगवान स्वामीनारायण के जीवन और शिक्षाओं का महत्व बताया। उन्होंने समाजसेवा में अनुयायियों की भागीदारी को सराहा और ज्ञान भारतम मिशन के जरिए प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करने का आग्रह किया। यह पर्व हमें भगवान स्वामीनारायण के आदर्शों के प्रति सोचने का मौका देता है।

मुख्य बातें

भगवान स्वामीनारायण की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं।
द्विशताब्दी महोत्सव समाजसेवा की प्रेरणा देता है।
ज्ञान भारतम मिशन प्राचीन ज्ञान के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है।
संतों और अनुयायियों का योगदान सराहनीय है।

नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को शिक्षापत्री द्विशताब्दी महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान स्वामीनारायण की शिक्षापत्री के 200 साल, द्विशताब्दी समारोह का यह अवसर सभी के लिए सौभाग्य की बात है कि हम इस पावन पर्व का हिस्सा बन रहे हैं। इस पुण्य अवसर पर मैं सभी संतों को नमन करता हूं। भगवान स्वामीनारायण के करोड़ों अनुयायियों को मैं द्विशताब्दी महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत, ज्ञानयोग के लिए समर्पित रहा है। हजारों साल पुरानी वेद आज भी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने अपने समय के अनुसार वेदों के प्रकाश में व्यवस्थाओं का विकास किया। वेदों से उपनिषद, उपनिषदों से पुराण एवं अन्य आयामों ने हमारी परंपरा को सामर्थ्यवान बनाया है। समय के अनुसार महात्मा और ऋषियों ने इस परंपरा में नए-नए अध्याय जोड़े हैं। भगवान स्वामीनारायण का जीवन लोकसेवा और लोकशिक्षा से जुड़ा रहा। उन्होंने शिक्षापत्री के रूप में जीवन का अनमोल मार्गदर्शन दिया। आज का यह विशेष अवसर हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम शिक्षापत्री के आदर्शों को अपने जीवन में उतार रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान स्वामीनारायण का जीवन साधना और सेवा का प्रतीक था। आज उनके अनुयायियों द्वारा समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े प्रकल्प, किसान कल्याण के संकल्प, जल संरक्षण के अभियान वास्तव में सराहनीय हैं। संतजनों और हरिभक्तों को समाजसेवा के प्रति अपने दायित्वों को आगे बढ़ाते देखना प्रेरणादायक है। आज देश स्वदेशी और स्वच्छता जैसे जन-आंदोलनों को आगे बढ़ा रहा है। वोकल फॉर लोकल के मंत्रों की गूंज हर घर में पहुंच रही है। इन अभियानों में आपके प्रयास जुड़ने से शिक्षापत्री की द्विशताब्दी का यह समारोह और भी अविस्मरणीय बन जाएगा।

उन्होंने कहा कि देश ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम मिशन की शुरुआत की है। मेरा अनुरोध है कि आप जैसे प्रबुद्ध संगठन इस कार्य में अधिक सहयोग करें। हमें अपने भारत के प्राचीन ज्ञान को संरक्षित करना है और इसमें आपका सहयोग इस मिशन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इस समय देश में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का भव्य सांस्कृतिक उत्सव चल रहा है। सोमनाथ मंदिर के पहले ध्वंस से लेकर अब तक एक हजार वर्षों की यात्रा को देश इस पर्व के रूप में मना रहा है। मेरा आग्रह है कि आप सब इस महोत्सव से जुड़ें और इसके उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करें। मुझे विश्वास है कि आपके माध्यम से भारत की विकास यात्रा को भगवान स्वामी नारायण का आशीर्वाद निरंतर मिलता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भगवान स्वामीनारायण का जीवन और शिक्षाएं आज के समय में भी प्रासंगिक हैं। उनकी शिक्षाएं समाज को जोड़ने और सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य करती हैं। इस महोत्सव का महत्व हम सबके लिए एक प्रेरणा है कि हम भी उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवान स्वामीनारायण का शिक्षापत्री क्या है?
शिक्षापत्री भगवान स्वामीनारायण की शिक्षाओं का संग्रह है, जो जीवन का मार्गदर्शन प्रदान करता है।
द्विशताब्दी महोत्सव में क्या विशेष है?
यह महोत्सव भगवान स्वामीनारायण की शिक्षाओं को मनाने का एक अवसर है, जो 200 वर्षों से अधिक पुरानी हैं।
ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य क्या है?
ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य प्राचीन पांडुलिपियों और ज्ञान को संरक्षित करना है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व क्यों मनाया जा रहा है?
यह पर्व सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करने के लिए मनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने समाजसेवा के लिए क्या कहा?
उन्होंने समाजसेवा में संतों और अनुयायियों के योगदान की सराहना की और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्र प्रेस
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