पीएम सूर्य घर योजना: मंगलुरु लाभार्थी का बिजली बिल शून्य, ₹3,000 मासिक की बचत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना उन परिवारों के लिए ठोस आर्थिक राहत बनकर उभरी है जो पहले भारी-भरकम बिजली बिलों से जूझ रहे थे। कर्नाटक के मंगलुरु निवासी अरुण जी शेट ने बताया कि रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने के बाद उनका मासिक बिजली बिल — जो पहले ₹3,000 से अधिक था — अब पूरी तरह शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, अतिरिक्त बिजली को पावर ग्रिड को भेजने पर उन्हें अलग से भुगतान भी मिल रहा है।
लाभार्थी का अनुभव
शेट ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा: 'रूफटॉप सोलर पैनल ने मेरे घर के बिजली खर्च को पूरी तरह बदल दिया है। पहले, मैं हर महीने बिजली बिल के रूप में ₹3,000 से अधिक का भुगतान करता था, लेकिन सोलर पैनल लगवाने के बाद मेरा बिजली बिल शून्य हो गया है। जो अतिरिक्त बिजली बनती है, वह पावर ग्रिड को भेज दी जाती है, जिसके लिए मुझे भुगतान भी मिलता है।'
शेट का अनुमान है कि वे ढाई वर्षों के भीतर अपने कुल निवेश का 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा वापस पा लेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि ये सोलर पैनल अगले 20 से 25 वर्षों तक बिना किसी बड़े अतिरिक्त खर्च के बिजली उत्पादन करते रहेंगे।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
शेट के अनुसार इस पहल से घरेलू खर्चों में कमी के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिक परिवारों को इस योजना की ओर आकर्षित करने के लिए सरकार को सब्सिडी बढ़ानी चाहिए और शून्य ब्याज पर ऋण की सुविधा देनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ में भी मिली राहत
यह ऐसे समय में आया है जब देश के अन्य राज्यों से भी इस योजना की सफलता के समान उदाहरण सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के लाभार्थी महेंद्र प्रताप सिन्हा, जिन्हें पहले हर महीने ₹1,000 से ₹6,000 तक का बिजली बिल भरना पड़ता था, ने 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल सिस्टम लगवाया। इससे उनके मासिक बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है। सिन्हा ने भी इस योजना को अत्यंत लाभकारी बताया।
योजना का व्यापक प्रभाव
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य लाखों भारतीय परिवारों को मुफ्त सौर बिजली उपलब्ध कराना है। दोनों लाभार्थियों के अनुभव यह दर्शाते हैं कि रूफटॉप सोलर न केवल घरेलू बजट पर बोझ कम करता है, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और हरित भविष्य की दिशा में भी एक सार्थक कदम है। आने वाले समय में यदि सरकार सब्सिडी और ब्याजमुक्त ऋण के प्रावधानों को और सुलभ बनाती है, तो इस योजना की पहुँच और व्यापक होने की संभावना है।