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पीएमएवाई-अर्बन: अहमदाबाद में 1.94 लाख पक्के घर तैयार, 50 हजार और बनाने का लक्ष्य

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पीएमएवाई-अर्बन: अहमदाबाद में 1.94 लाख पक्के घर तैयार, 50 हजार और बनाने का लक्ष्य

सारांश

अहमदाबाद में 12 वर्षों की मेहनत का नतीजा — 1.94 लाख से अधिक पक्के घर झुग्गियों की जगह ले चुके हैं। पीएमएवाई-2.0 के तहत 50 हजार और घरों का लक्ष्य तय है। लिफ्ट, अस्पताल, पीएनजी गैस और 24 घंटे पानी — यह सिर्फ छत नहीं, एक नई ज़िंदगी की शुरुआत है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद नगर निगम ने पिछले 12 वर्षों में पीएमएवाई-अर्बन के तहत 2 लाख 7 हजार से अधिक मकानों के निर्माण को मंजूरी दी।
इनमें से 1 लाख 94 हजार से अधिक पक्के घर बनकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं।
पीएमएवाई-1.0 के तहत 21 हजार से अधिक ईडब्ल्यूएस मकान पूर्ण; 10 हजार से अधिक निर्माणाधीन।
पीएमएवाई-2.0 के तहत 50 हजार नए घरों का लक्ष्य निर्धारित।
रामापीर की टेकरी में 9 हजार से अधिक , ओढव में 2,500 से अधिक और घाटलोडिया में 1,500 से अधिक मकान बनाए गए।
परिसरों में लिफ्ट, आंगनबाड़ी, अस्पताल, पीएनजी गैस कनेक्शन और 24 घंटे पेयजल सुविधा उपलब्ध।

अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-अर्बन) के तहत पिछले 12 वर्षों में 2 लाख 7 हजार से अधिक मकानों के निर्माण को मंजूरी दी है, जिनमें से 1 लाख 94 हजार से अधिक पक्के घर बनकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के हजारों परिवार अब आधुनिक सुविधाओं से युक्त इन आवासीय परिसरों में सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, पीएमएवाई-1.0 के तहत 21 हजार से अधिक ईडब्ल्यूएस मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है और इन्हें लाभार्थियों को सौंपा जा चुका है। इसके अतिरिक्त 10 हजार से अधिक मकानों का निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है। पीएमएवाई-2.0 के तहत एएमसी ने 50 हजार नए घरों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है।

अहमदाबाद के विभिन्न क्षेत्रों — रामापीर की टेकरी, ओढव, घाटलोडिया, जंकल, अमियापुर, कोर्टेश्वर और बोपल — में आवासीय परिसर विकसित किए गए हैं। रामापीर की टेकरी क्षेत्र में झुग्गी पुनर्वास अभियान के तहत 9 हजार से अधिक मकान विस्थापित परिवारों को दिए गए हैं, जबकि ओढव में 2,500 से अधिक और घाटलोडिया में 1,500 से अधिक मकान बनाए गए हैं।

आधुनिक सुविधाओं से लैस परिसर

एएमसी द्वारा विकसित इन आवासीय परिसरों में लिफ्ट, आंगनबाड़ी केंद्र, अस्पताल, गार्डन, पार्किंग, 24 घंटे पेयजल आपूर्ति, फायर फाइटिंग सिस्टम और पीएनजी गैस कनेक्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। नर्मदा आवास और जानकी आवास जैसी एलआईजी श्रेणी की आवासीय परियोजनाएं भी इस अभियान का हिस्सा हैं।

लाभार्थियों की आवाज़

योजना की लाभार्थी शोभाबेन ने बताया कि पहले वह झोपड़पट्टी में रहती थीं, जहाँ गंदगी और मच्छरों जैसी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा, 'नया घर मिलने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है और अब परिवार को बेहतर माहौल मिल रहा है।'

एक अन्य लाभार्थी हरीश रावत ने कहा कि नए आवास परिसर में शहरी केंद्र, गार्डन, आंगनबाड़ी, बिजली, पानी और गैस पाइपलाइन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। दीपकभाई प्रजापति ने बताया कि बच्चों के खेलने के लिए पार्क, आंगनबाड़ी और पास में ही स्वास्थ्य सुविधाएं होने से परिवारों को काफी राहत मिली है।

मेयर की प्रतिक्रिया

अहमदाबाद के मेयर हितेश कांतीलाल बरोट ने बताया कि शहर में कई स्थानों पर बड़ी संख्या में आवास तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्लम पुनर्वास योजना के तहत भी हजारों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनका जीवनस्तर बेहतर हुआ है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पीएमएवाई-2.0 के विस्तार पर जोर दे रही है और शहरी गरीबी उन्मूलन को नीतिगत प्राथमिकता बनाया जा रहा है। अहमदाबाद का यह मॉडल — जिसमें झुग्गी पुनर्वास, ईडब्ल्यूएस आवास और एलआईजी श्रेणी तीनों को एकीकृत किया गया है — अन्य महानगरों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। जंकल, अमियापुर, कोर्टेश्वर और बोपल में जारी परियोजनाएं यह संकेत देती हैं कि यह अभियान अभी पूरी गति से आगे बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन घरों में रह रहे परिवारों की आजीविका और सामाजिक गतिशीलता पर क्या असर पड़ा है — क्योंकि छत मिलना और जीवनस्तर सुधरना दो अलग बातें हैं। गौरतलब है कि स्लम पुनर्वास परियोजनाओं में अक्सर लाभार्थी कुछ वर्षों बाद मकान बेचकर या किराए पर देकर वापस अनौपचारिक बस्तियों में लौट जाते हैं — एएमसी के पास इस पर दीर्घकालिक डेटा होना चाहिए। पीएमएवाई-2.0 के 50 हजार घरों के लक्ष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आवंटन प्रक्रिया पारदर्शी हो और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुँच सुनिश्चित हो।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद में पीएमएवाई-अर्बन के तहत अब तक कितने घर बने हैं?
आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में अहमदाबाद नगर निगम द्वारा 2 लाख 7 हजार से अधिक मकानों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 1 लाख 94 हजार से अधिक पक्के घर बनकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं।
पीएमएवाई-2.0 के तहत अहमदाबाद में कितने नए घर बनाए जाएंगे?
पीएमएवाई-2.0 के तहत अहमदाबाद नगर निगम ने लगभग 50 हजार नए घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य पहले चरण की सफलता के आधार पर तय किया गया है।
इन आवासीय परिसरों में कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
एएमसी द्वारा विकसित परिसरों में लिफ्ट, आंगनबाड़ी केंद्र, अस्पताल, गार्डन, पार्किंग, 24 घंटे पेयजल आपूर्ति, फायर फाइटिंग सिस्टम और पीएनजी गैस कनेक्शन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
अहमदाबाद में स्लम पुनर्वास के तहत किन क्षेत्रों में घर बनाए गए हैं?
रामापीर की टेकरी क्षेत्र में 9 हजार से अधिक, ओढव में 2,500 से अधिक और घाटलोडिया में 1,500 से अधिक मकान बनाए गए हैं। इसके अलावा जंकल, अमियापुर, कोर्टेश्वर और बोपल में भी आवास परियोजनाएं जारी हैं।
पीएमएवाई-अर्बन का लाभ किन्हें मिलता है?
पीएमएवाई-अर्बन का लाभ मुख्यतः आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के परिवारों को मिलता है। अहमदाबाद में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले विस्थापित परिवारों को भी स्लम पुनर्वास योजना के तहत पक्के घर दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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