क्या एक साम्राज्य समुद्र पार चला गया और पुर्तगाल की राजधानी ब्राजील बनी?
सारांश
Key Takeaways
- पुर्तगाल का शाही परिवार 1807 में लिस्बन छोड़कर ब्राजील पहुंचा।
- रियो डी जेनेरियो साम्राज्य की कार्यकारी राजधानी बना।
- ब्राजील की आधुनिक पहचान की नींव रखी गई।
- यह घटना साम्राज्य और उपनिवेश के बीच के संबंधों को बदलने वाली थी।
- ब्राजील ने 1822 में स्वतंत्रता की घोषणा की।
नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। 1807शाही परिवार अपनी संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था के साथ लिस्बन को छोड़कर हजारों किलोमीटर दूर ब्राजील पहुंच गया।
यह घटना न केवल नेपोलियन युद्धों का एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, बल्कि उपनिवेशों और साम्राज्यों के बीच के पारंपरिक संबंधों को भी बदलने वाली थी। यह पहली बार था जब किसी यूरोपीय साम्राज्य की वास्तविक राजधानी एक उपनिवेश में स्थापित हो गई।
उस समय, नेपोलियन तेजी से पूरे यूरोप पर नियंत्रण स्थापित कर रहा था। उसने 'कॉन्टिनेंटल सिस्टम' लागू किया था, जिसके तहत ब्रिटेन के साथ व्यापार करने वाले देशों पर दबाव डाला जा रहा था। पुर्तगाल, जो ऐतिहासिक रूप से ब्रिटेन का मित्र था, फ्रांस का अगला लक्ष्य बन गया। जब नेपोलियन की सेना लिस्बन की ओर बढ़ी, तब ब्रिगेंजाप्रिंस रीजेंट जाओ ने ब्रिटिश नौसेना के संरक्षण में शाही दरबार, अधिकारियों, सैनिकों और परिवारों को लेकर अटलांटिक पार करने का निर्णय लिया।
ब्राजील पहुंचने के बाद, रियो डी जेनेरियो एक साधारण उपनिवेशी बंदरगाह से अचानक यूरोपीय साम्राज्य की कार्यकारी राजधानी बन गया। व्यापार, प्रशासन, शिक्षा और कूटनीति की नई संरचनाएं स्थापित की गईं। शाही आदेशों के तहत शहर में नई संस्थाएं जैसे राष्ट्रीय पुस्तकालय, बैंक ऑफ ब्राजील और उच्च शिक्षण संस्थान खोले गए, जिन्होंने बाद में ब्राजील की आधुनिक पहचान को आकार दिया।
इस कदम का प्रभाव इतना गहरा था कि पुर्तगाली साम्राज्य का केंद्र दक्षिण अमेरिका में स्थानांतरित हो गया। यूरोप छोड़ने का यह निर्णय अस्थायी था, लेकिन इसके परिणाम स्थायी रहे। शाही दरबार की उपस्थिति ने ब्राजील में राजनीतिक चेतना को मजबूत किया और अंततः 1822 में ब्राजील ने स्वतंत्र साम्राज्य की घोषणा की, जो आगे चलकर एक शक्तिशाली राष्ट्र-राज्य बना।
29 नवंबर 1807 की यह घटना केवल एक युद्धकालीन रणनीति नहीं थी; यह वह क्षण था जिसने उपनिवेश और साम्राज्य के बीच की दूरी, प्रभाव और संबंधों को नए सिरे से परिभाषित किया।