क्या प्रकाश महाजन ने महेश मांजरेकर और संजय दत्त पर निशाना साधा?
सारांश
Key Takeaways
- प्रकाश महाजन का महेश मांजरेकर और संजय दत्त पर आरोप।
- बीएमसी चुनाव से पहले की राजनीति में गर्माहट।
- मुंबई में अंडरवर्ल्ड का प्रभाव।
- राज और उद्धव ठाकरे का विवाद।
- महाजन की टिप्पणियों से जनता को जागरूक होना चाहिए।
मुंबई, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बीएमसी चुनाव से पहले शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और मनसे के बीच तीखी नोकझोंक जारी है। हाल ही में प्रकाश महाजन ने मनसे छोड़कर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) में कदम रखा है। उन्होंने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे पर प्रहार किया है।
महाजन ने यह भी कहा कि संजय दत्त और अभिनेता महेश मांजरेकर का अंडरवर्ल्ड डॉन से संबंध है और उनका छोटा शकील से फोन पर संपर्क था।
राष्ट्र प्रेस को दिए इंटरव्यू में प्रकाश महाजन ने यह सवाल उठाया कि कैसे संजय राऊत, राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और महेश मांजरेकर एक साथ बैठकर इंटरव्यू दे रहे हैं, जबकि महेश मांजरेकर का कहना है कि उनके बच्चों को मुंबई में रहने से डर लग रहा है।
उन्होंने कहा कि जिनके संबंध अंडरवर्ल्ड डॉन से हों, उन्हें डर क्यों लगेगा? डर तो हम जैसे लोगों को होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई ब्लास्ट के समय संजय दत्त और महेश मांजरेकर की छोटा शकील से बातचीत होती थी, और यह बात मीडिया में भी आई थी। ऐसे लोगों से हमें डरना चाहिए।
महाजन ने कहा कि राज ठाकरे और उद्धव के बीच 20 साल का विवाद अचानक 10 मिनट में खत्म कैसे हुआ, इसका कारण यह है कि राज ठाकरे मजबूरी में हैं और उद्धव ठाकरे को अपने अस्तित्व को बचाना है। इन दोनों को मुंबई की 'सोने देने वाली मुर्गी' से अंडे लेने की आदत है, इसलिए अब साथ होना पड़ा है। ये दोनों मिलकर पूरे महाराष्ट्र को बेवकूफ बना रहे हैं। मराठी लोग भोले हैं और इनकी बातों में आ जाते हैं।
महाजन ने यह भी कहा कि 30 साल से महानगरपालिका चला रहे हैं और अब उन्हें याद आया कि स्वच्छता महिलाओं के लिए जरूरी है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के नए नेता मराठी में 10 लाइनें नहीं बोल सकते हैं, और ये लोग प्रदेश में मराठी भाषा के लिए आंदोलन कर रहे हैं। बाला साहेब की समाधि को चावड़ी बना दिया गया है, जहां हजारों लोगों की श्रद्धा जुड़ी है। अपने स्वार्थ के लिए आप बाला साहेब की 'समाधि' का सहारा ले रहे हैं, यह अब खोखले हो चुके हैं। दोनों का स्वार्थ एक-दूसरे से जुड़ा है, इसलिए अब सीटों के बंटवारे पर कलह भी होगी। राज ठाकरे कमजोर हैं, इसलिए कम सीटों पर राजी हो गए।