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बिहार विधान परिषद चुनाव: प्रशांत किशोर बोले- सरकार को जवाबदेह बनाने का है यह चुनाव

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बिहार विधान परिषद चुनाव: प्रशांत किशोर बोले- सरकार को जवाबदेह बनाने का है यह चुनाव

सारांश

प्रशांत किशोर ने तिरहुत में जन सुराज उम्मीदवारों का नामांकन कराते हुए साफ कहा — यह चुनाव सत्ता बदलने का नहीं, सत्ता को जवाबदेह बनाने का है। शिक्षकों को सातवें वेतनमान और 10,000 युवाओं को रोजगार का वादा करते हुए उन्होंने बिहार की पढ़ी-लिखी मतदाता आबादी को सीधे संबोधित किया।

मुख्य बातें

प्रशांत किशोर ने 30 सितंबर को तिरहुत निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज उम्मीदवारों का नामांकन कार्यक्रम में भाग लिया।
तिरहुत शिक्षक सीट से श्याम नंदन यादव और स्नातक सीट से डॉ.
मोहन जन सुराज के प्रत्याशी हैं।
किशोर ने शिक्षकों को लोकसभा चुनाव से पहले सातवाँ वेतनमान दिलाने का सशर्त वादा किया।
तिरहुत स्नातक क्षेत्र के 10,000 शिक्षित बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने का वादा।
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना।
जन सुराज ने सभी 8 शिक्षक-स्नातक सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।

जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने 30 सितंबर को मुजफ्फरपुर के तिरहुत निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के शिक्षक और स्नातक उम्मीदवारों के नामांकन कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कहा कि बिहार विधान परिषद के आगामी चुनाव सरकार बनाने या गिराने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता को जवाबदेह ठहराने के लिए हैं। बिहार की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है और राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान में पूरी ताकत झोंक दी है।

उम्मीदवारों का परिचय और जन सुराज की रणनीति

किशोर ने बताया कि तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से श्याम नंदन यादव और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. वी. मोहन जन सुराज के प्रत्याशी हैं। उन्होंने बताया कि श्याम नंदन यादव शिक्षण संस्थाओं से जुड़े रहे हैं और कारगिल में शहीद हुए प्रमोद यादव के भाई हैं, जबकि डॉ. वी. मोहन क्षेत्र में एक जाने-माने चिकित्सक हैं।

जन सुराज ने बिहार विधान परिषद की आठों शिक्षक और स्नातक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जो दर्शाता है कि पार्टी इन चुनावों को अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने के अवसर के रूप में देख रही है।

प्रशांत किशोर का मुख्य संदेश

किशोर ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया, 'यह चुनाव सरकार बनाने का चुनाव नहीं है और न ही किसी को सरकार से हटाने का। अगले चार साल जो सरकार में हैं, उस सरकार को जवाबदेह बनाने और उसके गलत कार्यक्रमों पर अंकुश लगाने का यह चुनाव है।'

उन्होंने नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव पर आरोप लगाया कि मतदाताओं को ₹10,000 देकर उनकी आशाओं और अपेक्षाओं को खरीदने की कोशिश की गई। किशोर ने पढ़े-लिखे मतदाताओं से जाति और धर्म से ऊपर उठकर अपने और अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करने की अपील की।

शिक्षकों के लिए बड़े वादे

किशोर ने शिक्षकों के लिए एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि जन सुराज का उम्मीदवार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीतता है, तो लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों के लिए सम्मान, सुरक्षा और सातवाँ वेतनमान दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल वित्त रहित, वित्त पोषित, नियोजित, विद्यालयी और विशिष्ट शिक्षकों समेत सभी श्रेणियों के शिक्षकों के लिए होगी।

किशोर ने दावा किया कि यदि लोकसभा चुनाव से पहले सातवाँ वेतनमान नहीं दिला पाए, तो वे आगे वोट माँगने नहीं आएँगे — एक सशर्त वादा जो उनकी राजनीतिक साख को दाँव पर लगाता है।

स्नातक मतदाताओं और बाढ़ पर सरकार को घेरा

स्नातक मतदाताओं से संवाद करते हुए किशोर ने तिरहुत स्नातक क्षेत्र के 10,000 शिक्षित बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने की व्यवस्था करने का वादा किया। उन्होंने कहा कि यदि डॉ. वी. मोहन जीतते हैं, तो बांकीपुर में लागू की गई व्यवस्था की तर्ज पर तिरहुत क्षेत्र के युवाओं को भी इसका लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

बिहार में बाढ़ की स्थिति का जिक्र करते हुए किशोर ने सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, लेकिन केंद्र की ओर से बिहार के बाढ़ पीड़ितों के लिए अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।

चुनाव कार्यक्रम और आगे की राह

बिहार विधान परिषद की आठ शिक्षक और स्नातक सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित है। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब बिहार में नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद की राजनीतिक जमीन अभी भी व्यवस्थित हो रही है, और जन सुराज जैसे नए राजनीतिक विकल्प अपनी पहचान बनाने की कोशिश में हैं। इन नतीजों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विधान परिषद के एक सदस्य की संस्थागत शक्ति सीमित होती है — सातवाँ वेतनमान लागू करना राज्य कैबिनेट का निर्णय है, न कि किसी एक निर्वाचित सदस्य का। यह ऐसे समय में आया है जब जन सुराज 2025 के विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई और अब शिक्षित मतदाता वर्ग में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। शिक्षकों और स्नातकों को लक्षित करना रणनीतिक है, क्योंकि यह वर्ग पारंपरिक जाति-आधारित राजनीति से ऊब चुका है — लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या किशोर की जवाबदेही की राजनीति मतपेटी में परिणाम दे पाती है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार विधान परिषद शिक्षक-स्नातक चुनाव कब होंगे?
बिहार विधान परिषद की आठ शिक्षक और स्नातक सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित है। नामांकन प्रक्रिया 30 सितंबर से शुरू हो चुकी है।
जन सुराज ने तिरहुत से किन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है?
जन सुराज ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से श्याम नंदन यादव और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. वी. मोहन को प्रत्याशी बनाया है। श्याम नंदन यादव कारगिल शहीद प्रमोद यादव के भाई हैं, जबकि डॉ. वी. मोहन क्षेत्र के जाने-माने चिकित्सक हैं।
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों के लिए क्या वादा किया है?
प्रशांत किशोर ने वादा किया कि यदि जन सुराज का उम्मीदवार शिक्षक सीट से जीतता है, तो लोकसभा चुनाव से पहले सभी श्रेणियों के शिक्षकों को सातवाँ वेतनमान दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह वादा पूरा नहीं हुआ तो वे वोट माँगने नहीं आएँगे।
प्रशांत किशोर ने इस चुनाव को किस रूप में परिभाषित किया?
किशोर ने स्पष्ट कहा कि यह चुनाव सरकार बनाने या गिराने का नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार को जवाबदेह बनाने और उसके गलत कार्यक्रमों पर अंकुश लगाने का लोकतांत्रिक माध्यम है। उन्होंने पढ़े-लिखे मतदाताओं से जाति-धर्म से ऊपर उठकर मतदान करने की अपील की।
जन सुराज ने कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं?
जन सुराज ने बिहार विधान परिषद की सभी आठ शिक्षक और स्नातक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। यह पार्टी की इन चुनावों में पूर्ण भागीदारी की रणनीति को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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