प्रशांत किशोर का वादा: शिक्षकों को सातवां वेतनमान, तिरहुत के 10 हज़ार युवाओं को रोज़गार देगी जन सुराज
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 11 अक्टूबर 2026 को हाजीपुर में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम में ऐलान किया कि उनकी पार्टी बिहार के शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने और तिरहुत क्षेत्र के 10 हज़ार पढ़े-लिखे बेरोज़गार युवाओं को निजी क्षेत्र में उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस बार बिहार में मतदाता अपने बच्चों के भविष्य, रोज़गार और शिक्षकों की समस्याओं को केंद्र में रखकर वोट देंगे।
शिक्षक संवाद में उठे मुख्य मुद्दे
वैशाली जिले के शिक्षकों के साथ हुई इस बैठक में सातवें वेतनमान को सुनिश्चित कराने की रणनीति पर चर्चा हुई। प्रशांत किशोर ने कहा कि दशकों से चली आ रही वित्त रहित शिक्षकों की समस्या का ठोस समाधान निकालना जन सुराज की प्राथमिकता है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने अधिकारों और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करें।
रोज़गार का संकल्प और इंजीनियर मोहन का उदाहरण
जन सुराज के स्नातक उम्मीदवार इंजीनियर मोहन की जीत का उल्लेख करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि उनके प्रत्याशी चुनाव जीतकर आते हैं, तो तिरहुत क्षेत्र के कम से कम 10 हज़ार योग्य बेरोज़गार युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की जिम्मेदारी प्रशांत किशोर और जन सुराज की होगी। उन्होंने कहा कि बांकीपुर में जो सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, वैसी ही सुविधाएँ तिरहुत के स्नातकों को भी मिलनी चाहिए।
सरकार पर जवाबदेही का दबाव
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि इस बार का वोट किसी सरकार को बनाने या हटाने के लिए नहीं, बल्कि बनी हुई सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए होगा। उन्होंने कहा, 'इस बार का वोट इस बात के लिए है कि यहाँ के शिक्षकों को सातवां वेतनमान मिले, दशकों से चली आ रही वित्त रहित शिक्षकों की समस्या का समाधान हो और पढ़े-लिखे बेरोज़गार युवाओं को रोज़गार मिले।'
मांझी पर निशाना और आंदोलनों पर टिप्पणी
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर 'तिलचट्टा' कहे जाने को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर निशाना साधते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि लोग उनके शब्दों के चयन और वक्तव्यों को गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कहा कि शिक्षा, पेपर लीक, बेरोज़गारी और चुनाव प्रक्रिया को लेकर समाज में जो असंतोष है, वही सड़कों पर दिखाई दे रहा है।
आंदोलन और सुरक्षा बलों की तैनाती
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि सरकार कुछ दिनों के लिए सेना, अर्धसैनिक बल और पुलिस की तैनाती कर लोगों को घर से निकलने से रोक सकती है, लेकिन इससे आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती स्वयं आंदोलन की ताकत और सरकार की चिंता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा, बेरोज़गारी और चुनाव सुधार जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार ठोस व विश्वसनीय कदम नहीं उठाती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेंगे।