प्रशांत किशोर का वादा: बिहार शिक्षकों को दिलाएंगे सातवां वेतनमान, लोकसभा चुनाव में NDA को चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज के संस्थापक और विधायक प्रशांत किशोर ने 6 अक्टूबर 2026 को पटना में बिहार के शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं से सीधी अपील करते हुए कहा कि वे लोकसभा चुनाव से पहले सातवां वेतनमान दिलाने की ज़िम्मेदारी उठाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांकीपुर से शुरू हुई बदलाव की लहर अब रुकने वाली नहीं है और शिक्षित मतदाता जन सुराज के पक्ष में खड़ा होगा।
मुख्य घोषणाएँ और शिक्षकों से आह्वान
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के शिक्षक — चाहे वे विशिष्ट शिक्षक हों, विद्यालय शिक्षक, नियोजित शिक्षक, वित्त रहित शिक्षक या प्रधानाचार्य — सभी की मांगों के लिए जन सुराज आवाज़ उठाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने साथियों और आने वाली पीढ़ी के लिए भी बेहतर व्यवस्था चाहते हैं।
किशोर ने कहा कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो वे धरना, आमरण अनशन और मुख्यमंत्री का घेराव तक करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने शिक्षकों से एकजुट होने की अपील की और कहा कि सातवें वेतनमान के साथ-साथ बिहार के स्नातक बेरोज़गारों के लिए रोज़गार के अवसर तैयार करना भी जन सुराज की प्राथमिकता है।
BJP और NDA पर सीधा निशाना
किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की बैठकों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि जनता के समर्थन से नेता का कद तय होता है। उन्होंने तर्क दिया कि जब लोगों ने नितिन नवीन को वोट नहीं दिया, तो शिक्षक उन्हें क्यों तवज्जो देंगे।
उन्होंने आगाह किया कि BJP, NDA और सत्तारूढ़ व्यवस्था को यह संदेश जाना चाहिए कि बिहार के शिक्षक एक नया विकल्प तलाश रहे हैं। उनके अनुसार, यदि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने शिक्षकों की बात नहीं मानी तो आगामी लोकसभा चुनाव में इसका सीधा राजनीतिक असर पड़ सकता है।
बांकीपुर जीत को बताया बदलाव की शुरुआत
किशोर ने कहा कि बांकीपुर से शुरू हुई जन सुराज की राजनीतिक यात्रा बिहार में परिवर्तन की एक बड़ी इबारत लिख रही है। उन्होंने कहा कि जन सुराज के दोनों उम्मीदवारों की जीत महज़ दो व्यक्तियों की जीत नहीं होगी — यह सत्ताधारी व्यवस्था के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश होगी।
उन्होंने शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं से आग्रह किया कि वे खुद को राज्य के सबसे प्रबुद्ध मतदाताओं में मानते हुए सभी पहलुओं का आकलन करें और जन सुराज के पक्ष में मतदान करें। उनके अनुसार, उम्मीदवारों ने अपना संकल्प-पत्र और कार्यक्रम सार्वजनिक किया है और जीत के बाद वे उसी के आधार पर काम करेंगे।
आम जनता और शिक्षकों पर असर
बिहार में शिक्षकों का सातवें वेतनमान का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और लाखों शिक्षकों की आजीविका सीधे इससे जुड़ी है। वित्त रहित शिक्षकों की समस्या विशेष रूप से गंभीर मानी जाती है, क्योंकि उनके पास न तो नियमित वेतन है और न ही सरकारी संरक्षण।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में चुनावी माहौल गर्म है और शिक्षक वर्ग परंपरागत रूप से राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मतदाता-समूह माना जाता है। किशोर की यह रणनीति स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और शिक्षक मतदाताओं को एकत्रित करने पर केंद्रित दिखती है।
क्या होगा आगे
किशोर के अनुसार, यदि सरकार शिक्षकों की मांगों को लेकर सकारात्मक कदम नहीं उठाती तो जन सुराज आंदोलनात्मक रास्ता अपनाएगा। लोकसभा चुनाव को देखते हुए यह राजनीतिक दबाव की एक सुनियोजित रणनीति भी मानी जा रही है। गौरतलब है कि जन सुराज एक अपेक्षाकृत नई राजनीतिक शक्ति है जो बिहार की स्थापित राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देने का दावा करती है।