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क्या प्रयागराज में शंकराचार्य विवाद का समाधान विनम्रता से संभव है?

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क्या प्रयागराज में शंकराचार्य विवाद का समाधान विनम्रता से संभव है?

सारांश

प्रयागराज में शंकराचार्य विवाद को लेकर संत महंत रामस्नेही दास और महंत बैजनाथ ने शांति और संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों का समाधान टकराव नहीं, बल्कि सम्मानजनक बातचीत और आपसी समझ से होना चाहिए। क्या यह विवाद विनम्रता से सुलझ सकता है?

मुख्य बातें

शांति और संयम बरतने की आवश्यकता है।
सम्मानजनक बातचीत से विवाद का समाधान संभव है।
आध्यात्मिक परंपराओं को बनाए रखना सभी का दायित्व है।
संतों का आचरण और शब्द महत्वपूर्ण होते हैं।
सभी को विनम्रता से कार्य करना चाहिए।

नासिक, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रयागराज में शंकराचार्य पद को लेकर चल रहे विवाद और संगम घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य की अधिकारियों के साथ हुई बहस पर संत समाज ने शांति और संयम बरतने की अपील की है। नासिक में संत महंत रामस्नेही दास और महंत बैजनाथ ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों का समाधान टकराव के बजाय सम्मानजनक बातचीत और आपसी समझ से होना चाहिए।

गुरु नित्यानंद गोपाल दास के शिष्य महंत बैजनाथ ने कहा, "शंकराचार्य मठ के अत्यंत सम्मानित आध्यात्मिक नेता हैं। लेकिन उनके नाम से जुड़ा यह विवाद उचित नहीं है। लोगों की अपेक्षा होती है कि एक आध्यात्मिक गुरु चर्चा और चिंतन के माध्यम से मार्गदर्शन करे।"

उन्होंने यह भी कहा कि ब्राह्मणों के बच्चों के साथ जो हुआ, वह गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए था। महंत बैजनाथ ने आगे कहा कि शंकराचार्य एक वरिष्ठ और अनुभवी व्यक्तित्व हैं और उन्हें अपनी बुद्धिमत्ता से लोगों को सही दिशा दिखानी चाहिए।

वहीं, महंत रामस्नेही दास ने भी विवाद को बढ़ाने के बजाय शांति बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा, "माघ मेला केवल रोज स्नान करने तक सीमित नहीं है। इस दौरान हम संतों से मिलते हैं और मंदिरों में सेवा कार्य भी करते हैं। माघ मेले में संत और आयोजक श्रद्धालुओं का चयन करते हैं, जिन्हें गंगा में पवित्र स्नान कराया जाता है।"

महंत रामस्नेही दास ने कहा कि संतों को हमेशा विनम्र रहना चाहिए और हर मामले में व्यक्तिगत हितों को आगे नहीं रखना चाहिए। उन्होंने अपील की कि महाराज जी को चाहिए कि किसी भी तरह के विवाद को बढ़ने न दें और शांति का मार्ग अपनाएं।

दोनों संतों ने यह भी कहा कि आध्यात्मिक परंपराओं की गरिमा बनाए रखना सभी का दायित्व है। समाज संतों से मार्गदर्शन की उम्मीद करता है, इसलिए उनके आचरण और शब्दों का प्रभाव दूर तक जाता है। ऐसे में हर कदम सोच-समझकर और संयम के साथ उठाया जाना चाहिए।

प्रयागराज में संगम घाट पर हुई घटना के बाद देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। संतों की यह अपील ऐसे समय में आई है जब श्रद्धालु और समाज दोनों शांति और स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रयागराज में शंकराचार्य विवाद क्या है?
प्रयागराज में शंकराचार्य पद को लेकर विवाद हुआ है, जिसके संबंध में संतों ने शांति की अपील की है।
संतों ने इस विवाद पर क्या कहा?
संतों ने कहा कि समाधान टकराव से नहीं, बल्कि सम्मानजनक बातचीत से होना चाहिए।
महंत बैजनाथ का क्या कहना है?
महंत बैजनाथ ने कहा कि शंकराचार्य मठ के नेता हैं और उन्हें लोगों को सही दिशा दिखानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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