क्या मुस्तफिजुर विवाद पर प्रियंका चतुर्वेदी ने बीसीसीआई के फैसले पर सवाल उठाया?
सारांश
Key Takeaways
- मुस्तफिजुर रहमान को बीसीसीआई के निर्देशों के अनुसार रिलीज किया गया।
- प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप है कि यह निर्णय दबाव में लिया गया।
- राजनीतिक मुद्दों ने इस खेल के मामले को प्रभावित किया।
- सत्ता के लिए पार्टियों के बीच समझौते की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
- जनता को जागरूक रहना चाहिए और नेताओं की सच्चाई को जानना चाहिए।
मुंबई, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आईपीएल की कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) टीम ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से रिहा कर दिया है। यह निर्णय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के निर्देशों के अनुसार लिया गया। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुस्तफिजुर रहमान को नीलामी में शामिल होने की अनुमति स्वयं बीसीसीआई ने दी थी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में कहा कि यदि बीसीसीआई ने किसी खिलाड़ी को खेलने की अनुमति दी है, तो इसमें फ्रेंचाइजी या टीम मालिक की कोई गलती नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान या उनकी टीम ने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है और केकेआर ने पूरी तरह से मेरिट के आधार पर यह निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि बीसीसीआई का हालिया निर्णय दिखाता है कि ये किस तरह परिस्थितियों और राजनीतिक माहौल के अनुसार बदलते हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि बीसीसीआई का यह निर्णय पूरी तरह से दबाव में लिया गया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता यह भली-भांति जानती है कि मौजूदा सरकार पैसे और सत्ता के लिए कितनी संवेदनशील है और किस तरह बीसीसीआई जैसी संस्थाओं को मनमानी करने की छूट दी गई है।
उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात की थी और पाकिस्तान से किसी भी स्तर पर बातचीत या जुड़ाव से इनकार किया गया था। ऐसे में यह सवाल उठता है कि फिर पाकिस्तान या पड़ोसी देशों से जुड़े खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेलने की इतनी जल्दी क्यों दिखाई गई। उन्होंने कहा कि क्या देश की जनता यह सब भूल सकती है?
वास्तव में, बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की घटनाओं के चलते देश में पहले से ही माहौल संवेदनशील है। इन्हीं घटनाओं का हवाला देकर भाजपा और शिवसेना के कई नेताओं ने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ी को खेलने की अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले लिया।
इस बीच, एनसीपी अध्यक्ष और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार द्वारा पुणे के पिंपरी चिंचवड़ इलाके में भाजपा पर लगाए गए भ्रष्टाचार और हफ्ताखोरी के गंभीर आरोपों पर भी प्रियंका चतुर्वेदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 70,000 करोड़ के घोटाले का जिक्र केवल देवेंद्र फडणवीस तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सार्वजनिक रूप से इस घोटाले का उल्लेख किया था। इसके बावजूद जब सत्ता का अवसर आया, तो ‘भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस’ की विचारधारा को दरकिनार कर सभी ने एक-दूसरे से हाथ मिला लिया और सरकार बना ली।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति में सत्ता के लिए तीनों प्रमुख पार्टियां किसी भी हद तक समझौता करने को तैयार हैं और विचारधारा को पूरी तरह किनारे रख दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे अजीत पवार हों, एकनाथ शिंदे हों या देवेंद्र फडणवीस, जनता के सामने ये नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहेंगे, लेकिन सत्ता में बैठने के लिए अंततः एक साथ नजर आएंगे।
उन्होंने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को पूरी तरह से फिक्स्ड गेम करार देते हुए जनता से अपील की कि वे गुमराह न हों। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि लोगों को उन नेताओं और दलों का साथ देना चाहिए जो वास्तव में जनता की आवाज उठाते हैं और जनसेवा के लिए ईमानदारी से काम करते हैं।
उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने लगातार सत्ता में बैठे लोगों की कथित साठगांठ और गलत नीतियों का पर्दाफाश किया है और आगे भी इसके खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।