पंजाब सरकार बनाएगी अग्निवीरों के लिए आरक्षण नीति, भगवंत मान ने दी सैद्धांतिक मंजूरी

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पंजाब सरकार बनाएगी अग्निवीरों के लिए आरक्षण नीति, भगवंत मान ने दी सैद्धांतिक मंजूरी

सारांश

पंजाब सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत सेवा पूरी कर चुके अग्निवीरों के लिए राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण नीति बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सैद्धांतिक मंजूरी देते हुए उच्चस्तरीय समिति गठित की, जो पुलिस, वन रक्षक और अन्य विभागों में भर्ती के मानदंड तय करेगी।

मुख्य बातें

पंजाब सरकार ने 12 मई 2026 को अग्निवीरों के लिए राज्य सरकारी नौकरियों में आरक्षण नीति बनाने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नीति को सैद्धांतिक मंजूरी दी और सिविल व पुलिस अधिकारियों की उच्चस्तरीय समिति गठित की।
अग्निवीरों की तैनाती पंजाब पुलिस , वन रक्षक , अग्निशमन सेवा , जेल विभाग , होम गार्ड और पंजाब पूर्व सैनिक निगम में संभावित।
समिति विभिन्न विभागों में भर्ती और आरक्षण के लिए सिफारिशें तैयार कर सरकार को सौंपेगी।
नीति का उद्देश्य प्रशिक्षित अग्निवीरों का सार्थक पुनर्वास और उनके कौशल का राज्य विकास में उपयोग।

पंजाब सरकार ने 12 मई 2026 को अग्निपथ योजना के तहत अपना कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की नौकरियों में पुनर्वासित करने के लिए एक विशेष आरक्षण नीति बनाने का फैसला किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस नीति को सैद्धांतिक मंजूरी दी और कहा कि नीतिगत ढाँचे को समयबद्ध तरीके से अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।

उच्चस्तरीय समिति का गठन

मुख्यमंत्री मान ने आरक्षण के तौर-तरीकों और ढाँचे को अंतिम रूप देने के लिए सिविल और पुलिस अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। यह समिति विभिन्न सरकारी विभागों में अग्निवीरों की भर्ती और आरक्षण के लिए सिफारिशें तैयार करेगी तथा चयन-संबंधी मानदंडों को अंतिम रूप देगी। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, समिति को समयबद्ध ढंग से अपना काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

किन विभागों में मिल सकती है तैनाती

मुख्यमंत्री मान ने अग्निवीरों की क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सेवाओं का प्रभावी उपयोग पंजाब पुलिस, वन रक्षक, अग्निशमन सेवा, जेल विभाग, होम गार्ड, पंजाब पूर्व सैनिक निगम और अन्य सरकारी विभागों में किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि ये प्रशिक्षित और अनुशासित युवा राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास का अभिन्न अंग बन सकते हैं।

नीति की ज़रूरत क्यों

अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा के बाद अधिकांश अग्निवीर सेना से बाहर हो जाते हैं और उनके पुनर्वास का सवाल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि आरक्षण नीति की बुनियादी रूपरेखा इस प्रकार तैयार की जानी चाहिए ताकि देश की सेवा करके लौटे अग्निवीरों का सार्थक पुनर्वास हो सके और उनके कौशल का उपयोग पंजाब की प्रगति के लिए किया जा सके। गौरतलब है कि कई अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम उठा चुके हैं।

पंजाब की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख

मुख्यमंत्री मान ने यह भी कहा कि पंजाब ने देश की एकता और अखंडता की रक्षा में हमेशा ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, और यह नीति उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चयन और आरक्षण संबंधी मानदंडों को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाए।

आगे क्या होगा

गठित समिति अपनी सिफारिशें तैयार कर सरकार को सौंपेगी, जिसके बाद औपचारिक नीति अधिसूचित की जाएगी। यह कदम पंजाब में अग्निवीरों के भविष्य को लेकर जारी बहस में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ विपक्ष लगातार यह सवाल उठाता रहा है कि चार साल बाद बाहर होने वाले अग्निवीरों का भविष्य क्या होगा। भगवंत मान की आम आदमी पार्टी सरकार का यह फैसला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पंजाब में सेना में भर्ती की लंबी परंपरा रही है और यह वर्ग चुनावी दृष्टि से भी प्रभावशाली है। हालाँकि, असली परीक्षा तब होगी जब समिति की सिफारिशें सामने आएंगी — आरक्षण का प्रतिशत, पात्रता शर्तें और विभागवार सीटें तय होंगी। सैद्धांतिक मंजूरी और व्यावहारिक क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना ही इस नीति की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब सरकार की अग्निवीर आरक्षण नीति क्या है?
पंजाब सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी कर चुके अग्निवीरों को राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण देने की नीति बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 12 मई 2026 को इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी और एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जो विस्तृत ढाँचा तैयार करेगी।
अग्निवीरों को पंजाब के किन विभागों में नौकरी मिल सकती है?
मुख्यमंत्री मान के अनुसार, अग्निवीरों की सेवाओं का उपयोग पंजाब पुलिस, वन रक्षक, अग्निशमन सेवा, जेल विभाग, होम गार्ड और पंजाब पूर्व सैनिक निगम सहित कई अन्य सरकारी विभागों में किया जा सकता है।
अग्निवीर आरक्षण नीति कब तक लागू होगी?
सरकार ने नीति को समयबद्ध तरीके से अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है, लेकिन अभी कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है। गठित उच्चस्तरीय समिति सिफारिशें तैयार कर सरकार को सौंपेगी, जिसके बाद औपचारिक नीति अधिसूचित की जाएगी।
अग्निपथ योजना क्या है और इससे अग्निवीरों को क्या समस्या है?
अग्निपथ योजना केंद्र सरकार की एक सैन्य भर्ती योजना है जिसके तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाता है। सेवाकाल समाप्त होने के बाद अधिकांश अग्निवीर नागरिक जीवन में लौट आते हैं, जिससे उनके पुनर्वास और रोज़गार का सवाल खड़ा होता है।
क्या अन्य राज्यों ने भी अग्निवीरों के लिए आरक्षण नीति बनाई है?
कई अन्य राज्यों ने भी अग्निवीरों के पुनर्वास की दिशा में कदम उठाए हैं। पंजाब सरकार का यह निर्णय उसी राष्ट्रीय प्रवृत्ति का हिस्सा है, जहाँ राज्य सरकारें केंद्र की अग्निपथ योजना के बाद अग्निवीरों को अपने यहाँ खपाने की नीतियाँ बना रही हैं।
राष्ट्र प्रेस