क्या एसआईआर कोई सुधार नहीं, बल्कि थोपा गया जुल्म है: राहुल गांधी?

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क्या एसआईआर कोई सुधार नहीं, बल्कि थोपा गया जुल्म है: राहुल गांधी?

सारांश

राहुल गांधी ने एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर के नाम पर देश में अफरातफरी फैली हुई है और कई बीएलओ की जान जा चुकी है। क्या यह सच में एक सुधार है या फिर एक जुल्म?

Key Takeaways

  • एसआईआर के नाम पर अफरातफरी का माहौल है।
  • राहुल गांधी ने इसे थोपा गया जुल्म कहा है।
  • बीएलओ की मौतें लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

नई दिल्ली, 23 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। राहुल गांधी का कहना है कि एसआईआर के नाम पर देश भर में अफरातफरी फैली हुई है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले तीन हफ्तों में 16 बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की जान चली गई है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जिसमें नागरिकों को खुद को खोजने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची के हजारों स्कैन पन्नों का सामना करना पड़ता है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है, सही मतदाता थककर हार जाए और वोट चोरी बिना किसी रोक-टोक जारी रहे। भारत दुनिया के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर विकसित करता है, लेकिन भारत का चुनाव आयोग आज भी कागजों के जंगल में उलझा हुआ है। उन्होंने कहा कि एसआईआर कोई सुधार नहीं, बल्कि एक थोपा गया जुल्म है।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि नीयत साफ होती, तो सूची डिजिटल, सर्चेबल और मशीन-रीडेबल होती। ईसीआई को 30 दिन की हड़बड़ी में अंधाधुंध काम करने के बजाय पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान देना चाहिए था।

उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर एक सोची-समझी योजना है, जिसमें नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और बीएलओ के अनावश्यक दबाव से होने वाली मौतों को “कॉलैटरल डैमेज” मानकर नजरअंदाज किया जा रहा है। यह नाकामी नहीं, बल्कि एक षड़यंत्र है और लोकतंत्र की बलि दी जा रही है।

राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा के लाखों कार्यकर्ता विभिन्न राज्यों में खुलकर वोट डालते हैं और इस चोरी को छुपाने के लिए सारे सबूत मिटा दिए जाते हैं। भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर खुलेआम वोट चोरी कर रहे हैं। लोकतंत्र की हत्या लाइव चल रही है।

इससे पहले, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 99.48 प्रतिशत फॉर्म बांट दिए गए हैं, लेकिन असल में कई लोगों को फॉर्म नहीं मिले। यह सब भाजपा के इशारे पर हो रहा है।

अखिलेश ने भाजपा पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि इस बार वे मुद्दों में हार गए हैं। महंगाई बढ़ गई है, पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है, बिजली का बिल बढ़ा है, दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं, इलाज नहीं मिल रहा, मेडिकल कॉलेज सही से काम नहीं कर रहे, सड़कें टूटी हुई हैं, एम्बुलेंस बेकार हो गई हैं, और पुलिस में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। अब जनता का ध्यान भटकाने के लिए एसआईआर में उलझाया जा रहा है।

Point of View

जो नागरिकों को परेशान कर रहा है। यह मुद्दा न केवल राजनीतिक है, बल्कि यह लोकतंत्र की मजबूती और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से भी जुड़ा है।
NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

एसआईआर क्या है?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) एक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को सुधारना है।
राहुल गांधी ने एसआईआर पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि एसआईआर कोई सुधार नहीं, बल्कि एक थोपा गया जुल्म है।
क्या बीएलओ की मौतें एसआईआर से जुड़ी हैं?
जी हां, राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के कारण 16 बीएलओ की जान गई है।
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