राजस्थान: 309 शहरी निकायों में डिप्टी मेयर, डिप्टी चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन चुनाव आज
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के 309 शहरी स्थानीय निकायों में 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) को डिप्टी मेयर, डिप्टी चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन पदों के लिए चुनाव हो रहे हैं। मेयर, चेयरपर्सन और नगर पालिका अध्यक्षों के चुनाव पहले ही संपन्न हो चुके हैं, और अब राज्यभर की राजनीतिक हलचल इन दूसरे स्तर के नेतृत्व पदों पर केंद्रित हो गई है। इन चुनावों के बाद राज्य के नगरीय निकायों का नेतृत्व ढाँचा पूरी तरह से स्थापित हो जाएगा।
कहाँ-कहाँ हो रहे हैं चुनाव
राज्य के 309 शहरी निकायों में 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएँ शामिल हैं। नगर निगमों में डिप्टी मेयर, नगर परिषदों में डिप्टी चेयरमैन और नगर पालिकाओं में वाइस-चेयरमैन पदों के लिए चुनाव हो रहे हैं।
इन चुनावों में संबंधित शहरी निकाय के निर्वाचित पार्षद मतदाता होते हैं। जहाँ आवश्यक होगा, मतदान के बाद मतगणना की जाएगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
अलवर और उदयपुर में तेज़ राजनीतिक हलचल
अलवर नगर निगम में डिप्टी मेयर पद के लिए मंगलवार को चुनाव हो रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने सोमवार देर रात अपनी-अपनी रणनीतियाँ तय कर ली थीं। मेयर चुनाव के बाद दोनों दलों के पार्षद अलग-अलग कैंप में रुके हुए थे।
गौरतलब है कि BJP ने अलवर नगर निगम में मेयर का पद जीत लिया है और अब वह डिप्टी मेयर का पद भी अपने पास रखने की कोशिश में है। उदयपुर नगर निगम में भी मंगलवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है। रिपोर्टों के अनुसार, दिनेश भट्ट के नाम पर विचार किया जा रहा है, हालाँकि कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। नामांकन की प्रक्रिया सुबह 10 बजे IST से शुरू हुई।
करौली में पाँच निकायों में एक साथ चुनाव
करौली जिले के पाँच शहरी निकायों में आज डिप्टी चेयरपर्सन और वाइस-चेयरपर्सन पदों के लिए चुनाव हो रहे हैं। करौली नगर परिषद में डिप्टी चेयरपर्सन का चुनाव होगा, जबकि टोडाभीम, सपोटरा, मंडरायल और सुरोथ की नगर पालिकाओं में वाइस-चेयरमैन के चुनाव निर्धारित हैं।
पहले नामांकन की प्रक्रिया पूरी होगी और आवश्यकता पड़ने पर मतदान होगा।
निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम
यह ऐसे समय में आया है जब कई शहरी निकायों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसी स्थिति में स्थानीय पार्षदों का गणित और निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
पार्टियाँ और स्थानीय नेता इन कड़े मुकाबलों में जरूरी समर्थन जुटाने पर ध्यान दे रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे चुनावों में 'हॉर्स-ट्रेडिंग' की संभावना बढ़ जाती है।
क्या होगा आगे
मतदान पूरा होते ही मतगणना होगी और चुनाव कार्यक्रम के अनुसार परिणाम घोषित किए जाएंगे। इन चुनावों के संपन्न होते ही राजस्थान के सभी 309 शहरी निकायों का संपूर्ण नेतृत्व ढाँचा — शीर्ष से लेकर उप-नेतृत्व स्तर तक — स्थापित हो जाएगा, जिससे स्थानीय नागरिक प्रशासन के कामकाज को गति मिलेगी।