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राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर प्रहार: 'सपा समर्थन के बिना रायबरेली भी जीत पाओगे?'

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राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर प्रहार: 'सपा समर्थन के बिना रायबरेली भी जीत पाओगे?'

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में राहुल गांधी पर सीधा सवाल दाग दिया — क्या बिना सपा के रायबरेली भी बचा पाओगे? कांग्रेस पर 'रिजीम चेंज' की साजिश और चुनाव आयोग को नियंत्रित करने के इतिहास का आरोप लगाते हुए उन्होंने 1975 के आपातकाल तक को याद दिलाया।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने पूछा कि क्या समाजवादी पार्टी के समर्थन के बिना कांग्रेस रायबरेली सीट भी जीत सकती है।
कांग्रेस पर आरोप — एसआईआर या चुनाव सुधार नहीं, बल्कि देश में अस्थिरता फैलाकर 'रिजीम चेंज' की साजिश।
कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 37 वर्षों से सत्ता से बाहर है — राजनाथ सिंह ने यह आँकड़ा गिनाया।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन.
गोपालस्वामी के पत्र का हवाला — तत्कालीन आयुक्त नवीन चावला पर संवेदनशील जानकारी कांग्रेस को देने का आरोप था।
1975 के आपातकाल को याद दिलाते हुए कहा — इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को कैद किया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का असली मकसद चुनाव सुधार या मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर कर देश में अराजकता पैदा करना और सत्ता हथियाना है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक ज़मीन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन के बिना कांग्रेस रायबरेली की अपनी सीट भी बचा पाने में सक्षम है।

राजनीतिक ताकत पर सीधा सवाल

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में कमज़ोर स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी प्रदेश में 37 वर्षों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने राहुल गांधी से सीधे सवाल किया कि बिना सपा के समर्थन के क्या वे रायबरेली लोकसभा सीट पर भी जीत दर्ज कर सकते हैं। यह टिप्पणी कांग्रेस और सपा के बीच चुनावी गठबंधन की निर्भरता को उजागर करने की स्पष्ट कोशिश थी।

'रिजीम चेंज' की भाषा पर निशाना

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में 'रिजीम चेंज' जैसे शब्दों का प्रयोग हो रहा है, जो यह स्पष्ट करता है कि विपक्ष की लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या एसआईआर के विरुद्ध नहीं, बल्कि देश में अस्थिरता उत्पन्न कर सत्ता हासिल करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी देश के युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के बजाय नकारात्मक गतिविधियों में झोंक रहे हैं।

इंदिरा गांधी का आपातकाल और संविधान की बात

राजनाथ सिंह ने कहा, 'मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि 1975 में इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को सलाखों के पीछे डाल दिया था। उन्होंने लोकतंत्र को कैद कर लिया था। आज राहुल गांधी संविधान को अपनी जेब में रखकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस के इतिहास के पन्ने पलटकर देखिए, आपको कई काले अध्याय मिलेंगे।' यह बयान कांग्रेस द्वारा संवैधानिक मूल्यों की दुहाई देने पर सीधा पलटवार था।

चुनाव आयोग पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब

चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के अपने शासनकाल का जिक्र किया। उन्होंने वर्ष 1993 में चुनाव आयोग में किए गए बदलावों और दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने संस्था पर नियंत्रण रखने का प्रयास बताया।

इसके अलावा उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र का हवाला दिया, जिसमें गोपालस्वामी ने तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने चुनाव आयोग की संवेदनशील जानकारी कांग्रेस नेताओं के साथ साझा की थी। रक्षा मंत्री ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए कांग्रेस से उसके पुराने रिकॉर्ड पर जवाब देने की माँग की।

आगे क्या

राजनाथ सिंह के इस हमले के बाद कांग्रेस की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्वतंत्र राजनीतिक प्रासंगिकता को चुनौती देने की सोची-समझी कोशिश है। नवीन चावला और 1993 के चुनाव आयोग बदलावों का संदर्भ पुराना है — लेकिन एसआईआर विवाद के बीच इसे उठाना यह बताता है कि BJP संस्थागत विश्वसनीयता की लड़ाई को ऐतिहासिक आईने में लड़ना चाहती है। सवाल यह है कि क्या यह तर्क आज के मतदाता तक उतना ही पहुँचता है जितना पार्टी उम्मीद करती है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संविधान का हवाला देकर देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और कांग्रेस का असली मकसद चुनाव सुधार नहीं, बल्कि 'रिजीम चेंज' के ज़रिए सत्ता हासिल करना है। उन्होंने 1975 के आपातकाल का भी उल्लेख करते हुए कांग्रेस के इतिहास को 'काले अध्यायों' से भरा बताया।
राजनाथ सिंह ने रायबरेली का ज़िक्र क्यों किया?
रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी से सीधे पूछा कि क्या समाजवादी पार्टी के समर्थन के बिना कांग्रेस रायबरेली लोकसभा सीट भी जीत सकती है। यह सवाल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्वतंत्र राजनीतिक ताकत पर सवाल उठाने के लिए था, जहाँ पार्टी 37 वर्षों से सत्ता से बाहर है।
एन. गोपालस्वामी और नवीन चावला विवाद क्या था?
राजनाथ सिंह ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति को लिखे पत्र का हवाला दिया, जिसमें तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश की गई थी। गोपालस्वामी ने आरोप लगाया था कि चावला ने चुनाव आयोग की संवेदनशील जानकारी कांग्रेस नेताओं के साथ साझा की थी।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद क्यों है?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। राजनाथ सिंह ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि यह लड़ाई एसआईआर के खिलाफ नहीं, बल्कि देश में अस्थिरता फैलाने की व्यापक साजिश का हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति क्या है?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 37 वर्षों से सत्ता से बाहर है। राज्य में पार्टी को हाल के चुनावों में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन का सहारा लेना पड़ा है, जिसे BJP अपनी स्वतंत्र कमज़ोरी के रूप में उजागर कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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