राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर प्रहार: 'सपा समर्थन के बिना रायबरेली भी जीत पाओगे?'
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का असली मकसद चुनाव सुधार या मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर कर देश में अराजकता पैदा करना और सत्ता हथियाना है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक ज़मीन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन के बिना कांग्रेस रायबरेली की अपनी सीट भी बचा पाने में सक्षम है।
राजनीतिक ताकत पर सीधा सवाल
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में कमज़ोर स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी प्रदेश में 37 वर्षों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने राहुल गांधी से सीधे सवाल किया कि बिना सपा के समर्थन के क्या वे रायबरेली लोकसभा सीट पर भी जीत दर्ज कर सकते हैं। यह टिप्पणी कांग्रेस और सपा के बीच चुनावी गठबंधन की निर्भरता को उजागर करने की स्पष्ट कोशिश थी।
'रिजीम चेंज' की भाषा पर निशाना
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में 'रिजीम चेंज' जैसे शब्दों का प्रयोग हो रहा है, जो यह स्पष्ट करता है कि विपक्ष की लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या एसआईआर के विरुद्ध नहीं, बल्कि देश में अस्थिरता उत्पन्न कर सत्ता हासिल करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी देश के युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के बजाय नकारात्मक गतिविधियों में झोंक रहे हैं।
इंदिरा गांधी का आपातकाल और संविधान की बात
राजनाथ सिंह ने कहा, 'मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि 1975 में इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को सलाखों के पीछे डाल दिया था। उन्होंने लोकतंत्र को कैद कर लिया था। आज राहुल गांधी संविधान को अपनी जेब में रखकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस के इतिहास के पन्ने पलटकर देखिए, आपको कई काले अध्याय मिलेंगे।' यह बयान कांग्रेस द्वारा संवैधानिक मूल्यों की दुहाई देने पर सीधा पलटवार था।
चुनाव आयोग पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब
चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के अपने शासनकाल का जिक्र किया। उन्होंने वर्ष 1993 में चुनाव आयोग में किए गए बदलावों और दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने संस्था पर नियंत्रण रखने का प्रयास बताया।
इसके अलावा उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी द्वारा तत्कालीन राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र का हवाला दिया, जिसमें गोपालस्वामी ने तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने चुनाव आयोग की संवेदनशील जानकारी कांग्रेस नेताओं के साथ साझा की थी। रक्षा मंत्री ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए कांग्रेस से उसके पुराने रिकॉर्ड पर जवाब देने की माँग की।
आगे क्या
राजनाथ सिंह के इस हमले के बाद कांग्रेस की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में।