20 अक्टूबर 2026
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एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह का कड़ा संदेश: आतंकवाद के पूरे तंत्र को सामूहिक रूप से नष्ट करें

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एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह का कड़ा संदेश: आतंकवाद के पूरे तंत्र को सामूहिक रूप से नष्ट करें

सारांश

दुशांबे में एससीओ की शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को लेकर भारत का कड़ा रुख दोहराया — दोहरे मापदंड नहीं, सुरक्षित ठिकाने नहीं। साथ ही संपर्क परियोजनाओं पर संप्रभुता के सम्मान की शर्त भी जोड़ी — जो पाकिस्तान और चीन के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को दुशांबे में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद को संबोधित किया।
भारत ने आतंकवाद के वित्त पोषण, समर्थन और सुरक्षित पनाहगाह को बिना किसी अपवाद के अस्वीकार्य बताया।
संपर्क परियोजनाओं पर स्पष्ट शर्त: संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य।
अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चाबहार बंदरगाह को मध्य एशिया के लिए महत्वपूर्ण बताया।
भारत ने 2026-2030 के लिए बहुपक्षीय व्यापार व आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना का समर्थन किया।
मुंबई में पहली बार एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद आयोजित किया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए आतंकवाद को शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को दृढ़ता और सामूहिक प्रयासों से समाप्त किया जाना चाहिए — चाहे वह वित्त पोषण हो, समर्थन हो या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराना।

आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख

राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता और इससे निपटने में दोहरे मापदंड अस्वीकार्य हैं। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवादियों को आर्थिक सहायता देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद न केवल निर्दोष लोगों की जान लेता है, बल्कि निवेश और व्यापार को भी गहरी चोट पहुँचाता है और युवाओं को उनके अधिकारों से वंचित करता है।

बिश्केक शिखर सम्मेलन का संदर्भ

रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में नेताओं ने संगठन की 25 वर्षों की यात्रा की समीक्षा की थी। उस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन से सुरक्षा, संपर्क और अवसर — तीनों क्षेत्रों में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया था। राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि ये तीनों स्तंभ परस्पर पूरक हैं: सुरक्षा से निवेश के नए द्वार खुलते हैं, संपर्क से व्यापार फलता-फूलता है और इन दोनों के माध्यम से लोगों के लिए नए अवसर सृजित होते हैं।

आर्थिक सहयोग और समावेशी विकास

रक्षा मंत्री ने एससीओ सदस्य देशों के बीच आर्थिक भागीदारी को समावेशी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी देशों को अधिक मज़बूत और संकट-रोधी आपूर्ति श्रृंखलाएँ बनाने, व्यापार और निवेश को सुलभ बनाने तथा विकास के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए। भारत 2026 से 2030 की अवधि के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना को अपनाने का समर्थन करता है।

संपर्क परियोजनाओं पर भारत का स्पष्ट रुख

राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहल मध्य एशिया को व्यापक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संपर्क परियोजनाएँ सभी संबंधित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए — जो परियोजनाएँ इन सिद्धांतों का पालन नहीं करतीं, वे दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं हो सकतीं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब क्षेत्रीय संपर्क पहलों को लेकर सदस्य देशों के बीच भिन्न दृष्टिकोण चर्चा में हैं।

मुंबई संगोष्ठी और एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस माह की शुरुआत में मुंबई में मध्य एशिया की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के वित्त पोषण पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें पहली बार एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद भी संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। उन्होंने मध्य एशियाई देशों और एससीओ साझेदार देशों की सक्रिय भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। भारत ने ताशकंद में सार्वभौमिक केंद्र और दुशांबे में मादक पदार्थ विरोधी केंद्र को एससीओ की स्थायी संस्थाएँ बनाने के बिश्केक में लिए गए निर्णयों का भी स्वागत किया। आने वाले समय में इन संस्थाओं का प्रभाव उनके आपसी तालमेल और कार्यान्वयन की गति पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन निशाना स्पष्ट था — आतंकवाद को 'पड़ोसी की नीति' की तरह इस्तेमाल करने वाले और 'संप्रभुता-अनादर' वाली संपर्क परियोजनाएँ थोपने की कोशिश करने वाले दोनों एससीओ सदस्य। गौरतलब है कि एससीओ में भारत, पाकिस्तान और चीन एक ही मंच पर बैठते हैं, जो इस मंच को स्वाभाविक रूप से तनावपूर्ण बनाता है। संपर्क पर 'संप्रभुता की शर्त' सीधे तौर पर चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर भारत की आपत्ति की पुनरावृत्ति है। असली परीक्षा यह है कि क्या ये सामूहिक बयानबाज़ी एससीओ के भीतर किसी ठोस तंत्र में बदलती है — या यह मंच महज़ घोषणाओं का मेला बना रहता है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुशांबे में एससीओ बैठक में आतंकवाद को शांति और विकास का सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इसके पूरे तंत्र — वित्त पोषण, समर्थन और सुरक्षित ठिकाने — को सामूहिक प्रयासों से समाप्त करना होगा। उन्होंने दोहरे मापदंडों को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया।
भारत ने संपर्क परियोजनाओं पर क्या शर्त रखी?
भारत ने स्पष्ट किया कि वह केवल उन्हीं संपर्क परियोजनाओं का समर्थन करेगा जो संबंधित सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करती हों। राजनाथ सिंह ने कहा कि इन सिद्धांतों का पालन न करने वाली परियोजनाएँ दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं हो सकतीं।
एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद क्या है और यह पहली बार कहाँ हुआ?
एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित एक नई पहल है। यह पहली बार इस माह की शुरुआत में मुंबई में मध्य एशिया की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के वित्त पोषण पर आयोजित संगोष्ठी के साथ आयोजित किया गया।
बिश्केक एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या माँग रखी थी?
बिश्केक में एससीओ के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन से सुरक्षा, संपर्क और अवसर — तीनों क्षेत्रों में ठोस और मापनीय कदम उठाने का आह्वान किया था। राजनाथ सिंह ने दुशांबे बैठक में इन्हीं तीन स्तंभों को आगे बढ़ाया।
ताशकंद और दुशांबे में एससीओ की कौन-सी नई स्थायी संस्थाएँ बनाई गई हैं?
बिश्केक में लिए गए निर्णयों के अनुसार ताशकंद में सार्वभौमिक केंद्र और दुशांबे में मादक पदार्थ विरोधी केंद्र को एससीओ की स्थायी संस्थाएँ बनाया गया है। भारत ने इन निर्णयों का स्वागत किया, लेकिन यह भी कहा कि इनकी उपयोगिता आपसी तालमेल और कार्यान्वयन की गति पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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