राजनाथ सिंह का SCO में कड़ा संदेश: सीमा-पार आतंकवाद और दोहरे मानदंड बर्दाश्त नहीं, ऑपरेशन सिंदूर का दिया हवाला
सारांश
Key Takeaways
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 28 अप्रैल 2026 को SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में राज्य-प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद को राष्ट्रीय संप्रभुता पर सीधा हमला बताया।
- ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए कहा कि आतंकवाद के केंद्र अब दंड से अछूते नहीं रहेंगे।
- 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने पूरी मानवता को झकझोर दिया।
- आतंकवादियों को शरण देने वाले देशों के खिलाफ SCO से उचित कार्रवाई की माँग की; दोहरे मानदंड को अस्वीकार किया।
- पिछले वर्ष की तियानजिन घोषणा का उल्लेख करते हुए शून्य सहिष्णुता नीति को दोहराया।
- भारत ने SCO के उद्देश्यों के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता जताई।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 28 अप्रैल 2026 को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर अत्यंत स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य-प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता पर सीधा हमला है और इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि आतंकवाद के केंद्र अब दंड से अछूते नहीं रहेंगे।
दोहरे मानदंड के लिए कोई जगह नहीं
राजनाथ सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस मामले में दोहरे मानदंड के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने SCO से आग्रह किया कि संगठन को उन देशों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने से नहीं हिचकना चाहिए जो आतंकवादियों को समर्थन, शरण या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आतंकवाद का कोई धर्म या राष्ट्रीयता नहीं होती और किसी भी प्रकार की शिकायत — चाहे वह वास्तविक हो या काल्पनिक — हिंसा और निर्दोष लोगों की हत्या का औचित्य नहीं बन सकती।
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ
रक्षा मंत्री ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना ने पूरी मानवता को झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद के ठिकाने अब निर्दंड नहीं रहेंगे। गौरतलब है कि पहलगाम हमले के बाद भारत ने यह कदम उठाया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय में व्यापक चर्चा हुई।
वैश्विक व्यवस्था और एकतरफावाद पर चिंता
राजनाथ सिंह ने वैश्विक परिदृश्य पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया इस समय बढ़ते एकतरफावाद और संघर्षों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक सहमति कमजोर पड़ रही है और टकराव की स्थितियाँ बढ़ रही हैं। ऐसे समय में यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि यह दौर हिंसा और युद्ध का नहीं, बल्कि शांति और समृद्धि का बने। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि