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राज्यसभा में बच्चों के सोशल मीडिया पर प्रभाव की चिंता, उठी निर्णायक कदम उठाने की मांग

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राज्यसभा में बच्चों के सोशल मीडिया पर प्रभाव की चिंता, उठी निर्णायक कदम उठाने की मांग

सारांश

राज्यसभा में बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2022 में लगभग 13,000 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। सांसद मिलिंद देवड़ा ने इस गंभीर समस्या पर चर्चा की और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मुख्य बातें

बच्चों पर सोशल मीडिया का प्रभाव चिंता का विषय है।
2022 में 13,000 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की।
27 प्रतिशत किशोरों में सोशल मीडिया की लत के लक्षण हैं।
साइबर उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि हो रही है।
माता-पिता को बच्चों की निगरानी करनी चाहिए।

नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा में बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की गई। सांसद मिलिंद देवड़ा ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में लगभग 13,000 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की, जो 2013 के मुकाबले लगभग दोगुनी है।

दूसरी ओर, आज भारत में कुल आत्महत्याओं में विद्यार्थियों की भागीदारी लगभग 10 प्रतिशत है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि 4 फरवरी को गाजियाबाद में 12, 14 और 16 वर्ष की तीन बहनों ने आत्महत्या की, जो ऑनलाइन खेलों की लत से जुड़ी घटना थी।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स करोड़ों लोगों को जोड़ने का कार्य करते हैं। यह जानकारी को अधिक लोकतांत्रिक बनाते हैं, लेकिन इसकी एक डार्क साइड भी है।

उन्होंने बताया कि भारत में सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं में लगभग एक-तिहाई किशोर हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में 2010 के बाद किशोरों में अवसाद और आत्महत्या के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई, ठीक उसी समय जब फेसबुक ने युवाओं को अपने मंच की ओर आकर्षित करना शुरू किया।

देवड़ा ने बताया कि हम अक्सर बच्चों को व्यस्त रखने के लिए टैबलेट और मोबाइल फोन दे देते हैं। आंकड़ों के अनुसार, भारत के लगभग 27 प्रतिशत किशोरों में सोशल मीडिया की लत के लक्षण दिखते हैं, जो पढ़ाई में गिरावट, चिंता और आत्मविश्वास की कमी का कारण बनते हैं।

उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के अनुसार, महानगरों में लगभग 33 प्रतिशत बच्चे साइबर उत्पीड़न का शिकार होते हैं। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, किशोरों से जुड़े हिंसक अपराधों की हिस्सेदारी 2016 में 32 प्रतिशत थी, जो 2022 में बढ़कर 50 प्रतिशत के करीब पहुंच गई।

सांसद ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में एक मां और उसकी बेटी ने मेटा कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जो इंस्टाग्राम और फेसबुक की मूल कंपनी है। आरोप है कि इन मंचों के एल्गोरिदम युवाओं को लत की ओर धकेलते हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं।

उन्होंने बताया कि फ्रांस ने 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने इसे 16 वर्ष तक सीमित किया है। हाल ही में, इंडोनेशिया ने किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई है और ऐसा करने वाला एशिया का पहला देश बन गया है।

हाल ही में एआई इंपैक्ट शिखर सम्मेलन में, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया की पहुंच सीमित करने का सुझाव दिया। भारत में पहले से ही डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण ढांचा मौजूद है, जिसमें 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए अभिभावकों की सत्यापित सहमति जैसे प्रावधान हैं। लेकिन हमें इससे आगे बढ़कर सोशल मीडिया कंपनियों को और अधिक जवाबदेह बनाना होगा।

देवड़ा ने कहा कि यह सकारात्मक है कि भारत के कई राज्य जैसे गोवा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक इस पर चर्चा कर चुके हैं। हमें विद्यालयों में डिजिटल साक्षरता और मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को भी शामिल करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण भूमिका माता-पिता की है। बच्चों को सोशल मीडिया तक पहुंच देने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, बल्कि उनके उपयोग की निगरानी करनी चाहिए और उनसे संवाद करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज हम गर्व से कहते हैं कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। एक छोटे बच्चे के पिता के रूप में, मैं इस सदन और सरकार से आग्रह करता हूं कि हम शीघ्र और निर्णायक कदम उठाएं ताकि हमारे युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

विद्यार्थियों की आत्महत्या की बढ़ती संख्या हमें सचेत करती है कि हमें इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोशल मीडिया का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
सोशल मीडिया बच्चों में अवसाद, चिंता और आत्मविश्वास की कमी का कारण बन सकता है।
क्या भारत में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया गया है?
फ्रांस ने 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया है, अन्य देशों में भी इसी दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
किशोरों में साइबर उत्पीड़न का क्या स्तर है?
महानगरों में लगभग 33 प्रतिशत बच्चे साइबर उत्पीड़न का सामना करते हैं।
क्या माता-पिता को बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग की निगरानी करनी चाहिए?
हाँ, माता-पिता को बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग की निगरानी करनी चाहिए और उनसे संवाद करना चाहिए।
क्या सोशल मीडिया की लत का इलाज संभव है?
हाँ, सोशल मीडिया की लत का इलाज संभव है, इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा और डिजिटल साक्षरता आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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