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क्या नियम 267 पर टकराव जरूरी है? खड़गे का बयान, सरकार ने कहा, 'किसी बहस से नहीं भाग रहे'

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क्या नियम 267 पर टकराव जरूरी है? खड़गे का बयान, सरकार ने कहा, 'किसी बहस से नहीं भाग रहे'

सारांश

राज्यसभा में नियम 267 पर हुई बहस ने सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव को उजागर किया है। खड़गे ने सरकार पर संवेदनशील मुद्दों को टालने का आरोप लगाया, जबकि नड्डा ने इन आरोपों को खारिज किया है। क्या यह नियम चर्चा के लिए उचित है?

मुख्य बातें

नियम 267 का उपयोग महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए किया जाता है।
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच संवेदनशील मुद्दों पर बहस होती है।
सरकार ने आरोपों का खंडन किया है।

नई दिल्ली, 4 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस) राज्यसभा में गुरुवार को नियम 267 के तहत चर्चा की मांग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस का दृश्य सामने आया। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर तुरंत चर्चा न होने पर गहरी आपत्ति जताई और कहा कि सरकार लगातार संवेदनशील विषयों को टाल रही है।

वहीं, सरकार की ओर से सदन के नेता जे. पी. नड्डा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने कभी भी किसी बहस से बचने की कोशिश नहीं की है। राज्यसभा के सभापति ने नियम 267 के अंतर्गत दिए गए नोटिस को अस्वीकार किया और इस संबंध में अपने तर्क भी प्रस्तुत किए।

वास्तव में नियम 267 के अंतर्गत सम्बंधित मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराए जाने का प्रावधान है। इस नियम के अंतर्गत सदन के अन्य सभी कार्यों को स्थगित करके संबंधित मुद्दे पर चर्चा कराई जाती है। चर्चा के अंत में वोटिंग का भी प्रावधान है। हालाँकि, संसदीय नियमों व परंपराओं के अनुसार नियम 267 के नोटिस अस्वीकार कर दिए गए।

इस पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हमें न प्रश्न मिलते हैं, न शॉर्ट नोटिस, न तत्काल चर्चा। नियम 267 के तहत चर्चा की अनुमति मांगते हुए खड़गे ने कहा कि हम यह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमें न शॉर्ट ड्यूरेशन डिस्कशन का मौका मिलता है, न शॉर्ट नोटिस क्वेश्चन। जब हम कोई महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हैं, सरकार उसे तुरंत चर्चा के लायक नहीं मानती। सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा टालती रहती है। इसलिए सदन के सदस्य मजबूर होकर 267 का सहारा लेते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में तत्काल चर्चा की व्यवस्था है, लेकिन राज्यसभा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे पास सिर्फ नियम 267 एक हथियार है। अगर आप वह भी छीन लेंगे तो हम क्या करें। खड़गे ने कहा कि यह नियम लागू ही नहीं हो—ऐसा संकेत दिया जा रहा है, जो ठीक नहीं है।

उन्होंने सभापति से अपील की कि महत्वपूर्ण विषयों पर दिए गए 267 के सब नोटिसों को खारिज न किया जाए। राज्यसभा के सभापति ने खड़गे की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कार्य कोई उनके द्वारा व केवल अभी नहीं किया गया है। यह व्यवस्था पहले से सदन द्वारा अपनाई जा चुकी है। इस पर खड़गे ने कहा कि आप चाहें तो नियम को निलंबित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सर, आप नियम हटा भी सकते हैं, निलंबित भी कर सकते हैं और चर्चा का रास्ता खोल सकते हैं। वहीं सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने खड़गे के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार चर्चा से बच रही है। यह बिलकुल गलत है। जो-जो चर्चा आपने मांगी, सरकार ने समय दिया और पिछले सत्र में भी विस्तार से बहस हुई। यह धारणा न बने कि सरकार किसी विषय से भाग रही है। हम हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं।”

नड्डा ने सदन को यह भी बताया कि सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ है कि ‘वंदे मातरम्’ और ‘चुनाव सुधार’ चर्चा कराई जाएगी।

गौरतलब है कि नियम 267 के तहत कोई भी सदस्य सदन की पूरी कार्यसूची स्थगित कर किसी अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग कर सकता है। यह विशेषाधिकार बहुत कम मामलों में स्वीकार किया जाता है, क्योंकि इससे पूरे दिन की नियमित कार्यवाही रुक जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि नियम 267 का उपयोग संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के लिए किया जाना चाहिए। यह आवश्यक है कि सदन में सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा हो, ताकि लोकतंत्र को मजबूती मिले।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खड़गे ने सरकार पर क्या आरोप लगाया?
खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार संवेदनशील मुद्दों को टाल रही है।
नड्डा ने खड़गे के आरोपों का क्या जवाब दिया?
नड्डा ने कहा कि सरकार ने कभी भी किसी बहस से बचने की कोशिश नहीं की है।
राष्ट्र प्रेस
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