11 अक्टूबर 2026
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अयोध्या: राम जन्मभूमि ट्रस्ट की सभी रसोइयों को FSSAI का 'भोग' प्रमाणपत्र, रामलला का प्रसाद अब आधिकारिक रूप से प्रमाणित

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अयोध्या: राम जन्मभूमि ट्रस्ट की सभी रसोइयों को FSSAI का 'भोग' प्रमाणपत्र, रामलला का प्रसाद अब आधिकारिक रूप से प्रमाणित

सारांश

अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर की सभी रसोइयों को FSSAI का 'भोग' प्रमाणपत्र मिल गया है। रामलला को अर्पित प्रसाद अब आधिकारिक खाद्य सुरक्षा मानकों के दायरे में आ गया है — सीता रसोई में प्रतिदिन बनने वाला भोग और विशेष अवसरों पर अर्पित 56 व्यंजन अब प्रमाणित स्वच्छता व्यवस्था के तहत तैयार होंगे।

मुख्य बातें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सभी रसोइयों को 10 अक्टूबर 2026 को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का 'भोग' प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
रामलला को अर्पित भोग प्रसाद को FSSAI के निर्धारित मानकों के अनुरूप आधिकारिक प्रमाणन मिला।
कार्यक्रम में FSSAI सीईओ राजित पुनहानी और ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सीता रसोई में प्रतिदिन रामलला का भोग तैयार होता है; विशेष अवसरों पर 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।
यह प्रमाणन देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए खाद्य सुरक्षा मानकों का आदर्श उदाहरण बन सकता है।

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा संचालित समस्त रसोईघरों को 10 अक्टूबर 2026 को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से 'भोग' प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। इसके साथ ही रामलला को अर्पित किए जाने वाले भोग प्रसाद को भी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के निर्धारित मानकों के अनुरूप आधिकारिक प्रमाणन मिल गया है। यह प्रमाणन देश के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धार्मिक परिसरों में से एक में खाद्य स्वच्छता के उच्च मानकों की स्थापना की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।

प्रमाणपत्र वितरण समारोह

इस अवसर पर पीएफसी कॉन्फ्रेंस हॉल में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच एक औपचारिक बैठक आयोजित की गई। बैठक के उपरांत ट्रस्ट को विधिवत 'भोग' प्रमाणपत्र सौंपे गए। कार्यक्रम में FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी, ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, ट्रस्टी कृष्ण मोहन, जगदीश आफले सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

'भोग' प्रमाणपत्र क्या है और किसे मिलता है

खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, 'भोग' प्रमाणपत्र उन धार्मिक संस्थानों और मंदिरों को प्रदान किया जाता है, जहाँ प्रसाद एवं भोजन के निर्माण, भंडारण और वितरण में FSSAI के खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाता है। यह प्रमाणन श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण प्रसाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था को आधिकारिक मान्यता देता है। गौरतलब है कि यह अभियान देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर खाद्य सुरक्षा के स्तर को ऊँचा उठाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।

सीता रसोई और रामलला का भोग

रामजन्मभूमि परिसर स्थित सीता रसोई में रामलला के लिए प्रतिदिन भोग तैयार किया जाता है। विशेष अवसरों पर 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाता है। एकादशी और अन्य विशेष तिथियों पर फलाहार की व्यवस्था रहती है, जबकि प्रतिदिन फल और जूस भी अर्पित किए जाते हैं। भोग लगाने के पश्चात यह प्रसाद ट्रस्ट के कर्मचारियों, पुजारियों और मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

ट्रस्ट और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस उपलब्धि को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और शुद्ध प्रसाद व्यवस्था की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव बताया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर खाद्य सुरक्षा के उच्च मानकों को बढ़ावा देने में 'भोग' प्रमाणन अभियान अहम भूमिका निभा रहा है और अयोध्या स्थित यह परिसर इसका एक आदर्श उदाहरण बन गया है।

आगे की राह

यह प्रमाणन मिलने के बाद अब ट्रस्ट के सभी रसोईघरों में FSSAI मानकों की नियमित निगरानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी। यह कदम देश के अन्य प्रमुख मंदिर परिसरों के लिए भी एक मानक स्थापित कर सकता है, जहाँ लाखों श्रद्धालुओं को प्रतिदिन प्रसाद वितरित किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह प्रमाणन नियमित और स्वतंत्र निरीक्षण की व्यवस्था के साथ आता है। देश के अधिकांश बड़े मंदिरों में लाखों श्रद्धालुओं को प्रतिदिन प्रसाद वितरित होता है, फिर भी खाद्य सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था अब तक व्यापक नहीं रही। अयोध्या का यह कदम एक मिसाल बन सकता है — बशर्ते FSSAI इसे एकबारगी समारोह तक सीमित न रखे और नियमित अनुपालन जाँच सुनिश्चित करे। तीर्थस्थलों पर खाद्य सुरक्षा की यह पहल श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की दृष्टि से उतनी ही ज़रूरी है जितनी किसी भी सार्वजनिक खाद्य संस्थान के लिए।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिला 'भोग' प्रमाणपत्र क्या है?
'भोग' प्रमाणपत्र FSSAI द्वारा उन धार्मिक संस्थानों को दिया जाता है जो प्रसाद के निर्माण, भंडारण और वितरण में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सभी रसोइयों को 10 अक्टूबर 2026 को यह प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
इस प्रमाणपत्र से श्रद्धालुओं को क्या फायदा होगा?
इस प्रमाणन से यह सुनिश्चित होता है कि रामलला को अर्पित भोग प्रसाद और श्रद्धालुओं को वितरित होने वाला प्रसाद FSSAI के स्वच्छता एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया जाता है। इससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित और शुद्ध प्रसाद की आधिकारिक गारंटी मिलती है।
सीता रसोई में रामलला के लिए क्या-क्या भोग तैयार होता है?
रामजन्मभूमि परिसर की सीता रसोई में प्रतिदिन रामलला के लिए भोग तैयार होता है। विशेष अवसरों पर 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं, एकादशी और खास तिथियों पर फलाहार की व्यवस्था रहती है, और प्रतिदिन फल व जूस भी अर्पित किए जाते हैं।
प्रमाणपत्र वितरण समारोह में कौन-कौन उपस्थित थे?
कार्यक्रम में FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी, ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, ट्रस्टी कृष्ण मोहन और जगदीश आफले सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
क्या अन्य मंदिरों को भी 'भोग' प्रमाणपत्र मिलता है?
हाँ, FSSAI का 'भोग' प्रमाणन अभियान देशभर के धार्मिक स्थलों पर खाद्य सुरक्षा मानक बढ़ाने के लिए चलाया जा रहा है। अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर को इस अभियान का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया है, जो अन्य मंदिरों के लिए मानक स्थापित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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