एफएसएसएआई ने राम जन्मभूमि मंदिर को 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' सर्टिफिकेट दिया, प्रसाद की गुणवत्ता प्रमाणित
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 11 अक्टूबर 2026 को अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर को प्रतिष्ठित 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' प्रमाणपत्र से सम्मानित किया, जिससे भगवान श्री रामलला को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद की शुद्धता और सुरक्षा आधिकारिक रूप से प्रमाणित हो गई है। यह प्रमाणपत्र एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुन्हानी ने अयोध्या में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान मंदिर प्रशासन को सौंपा।
मुख्य घटनाक्रम
एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आधिकारिक पोस्ट के माध्यम से इस प्रमाणन की पुष्टि की। संस्था ने लिखा, 'अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को एफएसएसएआई ने आधिकारिक तौर पर 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' के तौर पर सर्टिफाई किया है।' यह प्रमाणपत्र दो वर्षों के लिए मान्य रहेगा, जिसके बाद पुनः मूल्यांकन होगा।
इस प्रमाणपत्र को प्राप्त करने के लिए श्री राम जन्मभूमि मंदिर को एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के कड़े मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा करना पड़ा। इसमें प्रसाद निर्माण, भंडारण और वितरण की पूरी प्रक्रिया का व्यापक ऑडिट शामिल था।
'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' पहल क्या है
एफएसएसएआई की यह पहल देशभर के धार्मिक स्थलों पर स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन एवं प्रसाद वितरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। धार्मिक स्थलों पर प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु आते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं, ऐसे में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
गौरतलब है कि यह पहल केवल एक प्रमाणन तक सीमित नहीं है — इसके तहत धार्मिक स्थलों के रसोई कर्मियों को खाद्य स्वच्छता का प्रशिक्षण भी दिया जाता है और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाती है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर के कई बड़े मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च पहले ही प्रमाणित हो चुके हैं।
राम मंदिर के लिए इसका महत्त्व
जनवरी 2024 में प्रतिष्ठित होने के बाद से अयोध्या का श्री राम जन्मभूमि मंदिर देश के सर्वाधिक दर्शनीय धार्मिक स्थलों में से एक बन चुका है। यहाँ प्रतिदिन हज़ारों से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं, जिनमें भगवान को अर्पित प्रसाद का वितरण एक अभिन्न परंपरा है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के कई प्रसिद्ध मंदिरों में प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस प्रमाणन से न केवल राम मंदिर के प्रसाद की शुद्धता सुनिश्चित होती है, बल्कि यह अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।
आम श्रद्धालुओं पर असर
इस प्रमाणपत्र से अयोध्या आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को यह भरोसा मिलता है कि उन्हें जो प्रसाद वितरित किया जा रहा है, वह एफएसएसएआई के खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है। विशेष रूप से बुज़ुर्ग श्रद्धालुओं और बच्चों के लिए खाद्य स्वच्छता अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है।
आने वाले समय में मंदिर प्रशासन को दो वर्ष की वैधता अवधि समाप्त होने से पूर्व पुनः एफएसएसएआई के मानकों की समीक्षा से गुज़रना होगा, जिससे खाद्य सुरक्षा का निरंतर अनुपालन सुनिश्चित रहेगा।