11 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एफएसएसएआई ने राम जन्मभूमि मंदिर को 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' सर्टिफिकेट दिया, प्रसाद की गुणवत्ता प्रमाणित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एफएसएसएआई ने राम जन्मभूमि मंदिर को 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' सर्टिफिकेट दिया, प्रसाद की गुणवत्ता प्रमाणित

सारांश

अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर को एफएसएसएआई का 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' सर्टिफिकेट मिला — यानी रामलला के प्रसाद की शुद्धता अब सरकारी मुहर से प्रमाणित। यह प्रमाणन देश के उन धार्मिक स्थलों के लिए नई मिसाल है जहाँ लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन प्रसाद ग्रहण करते हैं।

मुख्य बातें

एफएसएसएआई ने 11 अक्टूबर 2026 को अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर को 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' प्रमाणपत्र प्रदान किया।
प्रमाणपत्र एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुन्हानी ने अयोध्या में विशेष समारोह के दौरान सौंपा।
यह सर्टिफिकेट दो वर्षों के लिए मान्य है, जिसके बाद पुनः मूल्यांकन अनिवार्य होगा।
मंदिर ने एफएसएसएआई के स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के कड़े मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' पहल का उद्देश्य देशभर के धार्मिक स्थलों पर प्रसाद एवं भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 11 अक्टूबर 2026 को अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर को प्रतिष्ठित 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' प्रमाणपत्र से सम्मानित किया, जिससे भगवान श्री रामलला को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद की शुद्धता और सुरक्षा आधिकारिक रूप से प्रमाणित हो गई है। यह प्रमाणपत्र एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुन्हानी ने अयोध्या में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान मंदिर प्रशासन को सौंपा।

मुख्य घटनाक्रम

एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आधिकारिक पोस्ट के माध्यम से इस प्रमाणन की पुष्टि की। संस्था ने लिखा, 'अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को एफएसएसएआई ने आधिकारिक तौर पर 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' के तौर पर सर्टिफाई किया है।' यह प्रमाणपत्र दो वर्षों के लिए मान्य रहेगा, जिसके बाद पुनः मूल्यांकन होगा।

इस प्रमाणपत्र को प्राप्त करने के लिए श्री राम जन्मभूमि मंदिर को एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के कड़े मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा करना पड़ा। इसमें प्रसाद निर्माण, भंडारण और वितरण की पूरी प्रक्रिया का व्यापक ऑडिट शामिल था।

'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' पहल क्या है

एफएसएसएआई की यह पहल देशभर के धार्मिक स्थलों पर स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन एवं प्रसाद वितरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। धार्मिक स्थलों पर प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु आते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं, ऐसे में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

गौरतलब है कि यह पहल केवल एक प्रमाणन तक सीमित नहीं है — इसके तहत धार्मिक स्थलों के रसोई कर्मियों को खाद्य स्वच्छता का प्रशिक्षण भी दिया जाता है और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाती है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर के कई बड़े मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च पहले ही प्रमाणित हो चुके हैं।

राम मंदिर के लिए इसका महत्त्व

जनवरी 2024 में प्रतिष्ठित होने के बाद से अयोध्या का श्री राम जन्मभूमि मंदिर देश के सर्वाधिक दर्शनीय धार्मिक स्थलों में से एक बन चुका है। यहाँ प्रतिदिन हज़ारों से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं, जिनमें भगवान को अर्पित प्रसाद का वितरण एक अभिन्न परंपरा है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के कई प्रसिद्ध मंदिरों में प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस प्रमाणन से न केवल राम मंदिर के प्रसाद की शुद्धता सुनिश्चित होती है, बल्कि यह अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।

आम श्रद्धालुओं पर असर

इस प्रमाणपत्र से अयोध्या आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को यह भरोसा मिलता है कि उन्हें जो प्रसाद वितरित किया जा रहा है, वह एफएसएसएआई के खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है। विशेष रूप से बुज़ुर्ग श्रद्धालुओं और बच्चों के लिए खाद्य स्वच्छता अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है।

आने वाले समय में मंदिर प्रशासन को दो वर्ष की वैधता अवधि समाप्त होने से पूर्व पुनः एफएसएसएआई के मानकों की समीक्षा से गुज़रना होगा, जिससे खाद्य सुरक्षा का निरंतर अनुपालन सुनिश्चित रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक धार्मिक-राजनीतिक संदेश है या खाद्य सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम। देशभर के हज़ारों मंदिरों और धार्मिक स्थलों में प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर अब तक कोई व्यापक नियामक ढाँचा नहीं रहा है, और एफएसएसएआई के इस कार्यक्रम के तहत अभी तक जितने स्थल प्रमाणित हुए हैं, वे देश के कुल धार्मिक स्थलों की तुलना में नगण्य हैं। दो वर्षीय वैधता और पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था सराहनीय है, परंतु यह देखना होगा कि बिना स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट के यह प्रमाणन कितना विश्वसनीय बना रह सकता है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफएसएसएआई का 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' सर्टिफिकेट क्या है?
यह भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा उन धार्मिक स्थलों को दिया जाने वाला प्रमाणपत्र है जो स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं। यह पहल धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित और पौष्टिक प्रसाद एवं भोजन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
राम मंदिर को यह सर्टिफिकेट कब और किसने दिया?
11 अक्टूबर 2026 को अयोध्या में आयोजित एक विशेष समारोह में एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुन्हानी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर को यह प्रमाणपत्र सौंपा। यह सर्टिफिकेट दो वर्षों के लिए मान्य है।
यह प्रमाणपत्र कितने समय के लिए मान्य है?
एफएसएसएआई द्वारा जारी 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' प्रमाणपत्र दो वर्षों के लिए मान्य है। इस अवधि के बाद मंदिर को पुनः एफएसएसएआई के मानकों की समीक्षा प्रक्रिया से गुज़रना होगा।
क्या अन्य धार्मिक स्थलों को भी यह सर्टिफिकेट मिल सकता है?
हाँ, एफएसएसएआई की 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' पहल देशभर के सभी धार्मिक स्थलों — मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च — के लिए खुली है। जो भी धार्मिक स्थल एफएसएसएआई के खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों को पूरा करता है, वह इस प्रमाणन के लिए आवेदन कर सकता है।
राम मंदिर के श्रद्धालुओं पर इस प्रमाणन का क्या असर होगा?
इस प्रमाणन से अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को यह आश्वासन मिलता है कि मंदिर में वितरित प्रसाद एफएसएसएआई के खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा है। विशेष रूप से बुज़ुर्गों और बच्चों के लिए यह खाद्य स्वच्छता की दृष्टि से लाभकारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले