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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: स्वामी वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी की माँग — निष्पक्ष जांच हो, दोषी बख्शे न जाएँ

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: स्वामी वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी की माँग — निष्पक्ष जांच हो, दोषी बख्शे न जाएँ

सारांश

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले में किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर स्वामी वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने निष्पक्ष जांच की माँग की है। 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। संत समाज ने इसे करोड़ों भक्तों की आस्था पर चोट बताया।

मुख्य बातें

किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर स्वामी डॉ.
वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद में निष्पक्ष जांच की माँग की।
उन्होंने कहा — दोषी चाहे मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या कोई भी हो, उसे सजा मिलनी चाहिए।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर अयोध्या कोतवाली में एफआईआर दर्ज।
कुल 8 आरोपी गिरफ्तार; स्पेशल रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की अदालत से 3 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए।
आरोपियों में मंदिर व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी और एक सेवानिवृत्त बैंककर्मी शामिल हैं।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले ने धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने 27 जून 2025 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और भेदभाव-रहित जांच होनी चाहिए, और दोषी चाहे कोई भी हो — उसे कठोर सजा मिलनी चाहिए।

संत समाज की प्रतिक्रिया

स्वामी डॉ. वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने कहा, 'चाहे हमारे मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति हों — जो भी इस मामले में दखल दे, उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके स्तर पर निष्पक्ष और बिना भेदभाव के जांच हो।'

उन्होंने आगे कहा, 'जब भी कहीं कोई गलत काम होता है, तो लोगों को दुख होता है। लेकिन जब निष्पक्ष जांच होती है, तो घटना के पीछे की असली वजह सामने आती है। जिसने भी गलत किया है, उसकी पहचान कर उसे सजा मिलनी चाहिए — चाहे वह कोई भी हो।'

आस्था के केंद्र पर आघात

नंदगिरी ने इस घटना को 'बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा, 'सब जानते हैं कि श्री राम मंदिर के निर्माण में कितने वर्षों का संघर्ष, मेहनत और लगन लगी। इतने लंबे समय के बाद भगवान राम को उनकी सही जगह पर स्थापित किया गया। यह करोड़ों भक्तों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है।'

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए सर्वाधिक चर्चित तीर्थस्थलों में से एक बन चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर अयोध्या कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई। इस मुकदमे में मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, ट्रस्ट कर्मचारी अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया गया है।

सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें तीन दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया। पुलिस के अनुसार, मोहर्रम अवकाश के कारण सभी को स्पेशल रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की अदालत में पेश किया गया।

प्रशासन और जवाबदेही

महामंडलेश्वर नंदगिरी ने स्पष्ट किया कि यह प्रशासन का मामला है और वे अपने विवेक से निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा, 'हम इसमें सीधे दखल नहीं दे सकते। लेकिन भारत की एक नागरिक और संत समाज की सदस्य होने के नाते, मैं यही कहूंगी कि निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।'

आगे क्या

तीन दिन की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद सभी आरोपियों को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा। मामले की आगे की जांच पुलिस के हाथों में है और संत समाज सहित आम श्रद्धालुओं की नज़रें अब जांच की दिशा और गति पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राम मंदिर की राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता इसे असाधारण बनाती है। असली सवाल यह है कि क्या जांच वास्तव में स्वतंत्र होगी, या राजनीतिक दबाव इसकी दिशा तय करेगा। बिना पारदर्शी ऑडिट तंत्र और जन-जवाबदेही के, ऐसी घटनाएँ आस्था को कमज़ोर करती रहेंगी।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर अयोध्या कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई। मंदिर व्यवस्था से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
स्वामी वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने इस मामले में क्या कहा?
किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा की महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने माँग की है कि इस मामले की निष्पक्ष और भेदभाव-रहित जांच हो। उन्होंने कहा कि दोषी चाहे कोई भी हो — मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या कोई अन्य — उसे सजा मिलनी चाहिए।
इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए और उनकी स्थिति क्या है?
कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन्हें स्पेशल रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 3 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया। हिरासत पूरी होने पर उन्हें पुनः अदालत में पेश किया जाएगा।
एफआईआर में किन-किन लोगों को नामजद किया गया है?
एफआईआर में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया गया है। इनमें मंदिर व्यवस्था के कर्मचारी और ट्रस्ट से जुड़े लोग शामिल हैं।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है और आगे क्या होगा?
मामले की जांच अयोध्या पुलिस कर रही है। न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद आरोपियों को अदालत में फिर पेश किया जाएगा। संत समाज और श्रद्धालुओं की माँग है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
राष्ट्र प्रेस
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