राम मंदिर चढ़ावा विवाद: परमहंस आचार्य की माँग — दोषियों पर कार्रवाई हो, निर्दोष न फँसें
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने 20 जुलाई 2026 को श्रीराम मंदिर चंदे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच की माँग को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो वास्तव में दोषी हों, उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो, किंतु व्यक्तिगत दुर्भावना या मतभेद के आधार पर किसी निर्दोष को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद और सर्वोच्च न्यायालय दोनों में इस विवाद की गूँज सुनाई दे रही है।
परमहंस आचार्य का स्पष्ट आह्वान
संसद में विपक्ष द्वारा राम मंदिर चंदे की कथित चोरी का मुद्दा उठाए जाने पर परमहंस आचार्य ने कहा, 'इस मामले में पहले से ही कार्रवाई चल रही है। विपक्ष स्वतंत्र जाँच की माँग कर रहा है, तो केंद्र सरकार को भी उस पर विचार करना चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिस राजनीतिक दल ने पहले भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे, उसे राम मंदिर से जुड़े मामलों पर बोलने से पहले अपने पुराने रुख का जवाब देना चाहिए। आचार्य ने कहा कि वे स्वयं प्रधानमंत्री से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध करते हैं।
22 जुलाई की ट्रस्ट बैठक पर निगाहें
22 जुलाई को प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए परमहंस आचार्य ने कहा कि पूरे देश की नज़रें इस बैठक पर टिकी हैं। उन्होंने माँग की कि ट्रस्ट से जुड़े विवादों में किसी भी दोषी को बख्शा न जाए, परंतु व्यक्तिगत दुश्मनी या मतभेद के आधार पर निर्दोष लोगों को फँसाने की कोशिश भी न हो। उनके अनुसार जिन पर लगाए गए आरोप साबित न हों, उन्हें पूरे सम्मान के साथ अपने दायित्व निभाने का अवसर मिलना चाहिए।
सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के हालिया बयान पर परमहंस आचार्य ने कहा कि वांगचुक एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि यदि वांगचुक ने केवल प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी चिंताएँ व्यक्त की होतीं, तो सरकार निश्चित रूप से उन पर विचार करती। किंतु आचार्य ने यह भी रेखांकित किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ तत्वों ने देश-विरोधी नारे लगाए, भगवान श्रीराम और माता सीता का अपमान किया तथा देश को बाँटने जैसी बातें कहीं। उनका मानना है कि किसी भी आंदोलन में ऐसे तत्वों को स्थान नहीं मिलना चाहिए।
हनुमानगढ़ी महंत का सुप्रीम कोर्ट पर बयान
हनुमानगढ़ी के महंत धर्म दास महाराज ने राम मंदिर मामले में सर्वोच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई पर कहा कि जो भी पक्ष अदालत गया है, वह न्याय की उम्मीद से गया है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी करने से परहेज करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय निष्पक्ष निर्णय देगा। महंत धर्म दास महाराज ने यह भी संकेत दिया कि यदि उन्हें लगा कि सभी पहलुओं पर न्याय नहीं हुआ, तो वे भी सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएँगे और राम जन्मभूमि के प्रबंधन तथा संत समाज की भूमिका जैसे मुद्दों को भी न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
वंदे मातरम विधेयक पर समर्थन
परमहंस आचार्य ने वंदे मातरम बिल का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जो भारतीय अपने देश से प्रेम करता है, उसके लिए इस तरह का विधेयक खुशी की बात है और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने वाले हर कदम का स्वागत होना चाहिए। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राम मंदिर निर्माण के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं — और संत समाज के भीतर से ही जवाबदेही की आवाज़ें आना इसे और महत्वपूर्ण बनाता है।