राम मंदिर फंड विवाद: जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले — 'एक भी पैसे की चोरी नहीं', अखिलेश पर कसा तंज
सारांश
मुख्य बातें
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने 8 जून 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ट्रस्ट में 'एक भी पैसे की चोरी नहीं हुई है' और ट्रस्ट के सदस्य पूरी तरह ईमानदार हैं।
रामभद्राचार्य का अखिलेश पर तीखा प्रहार
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा, 'अखिलेश यादव ने जब रामलला को निहारा ही नहीं, तो आरोप ही लगाएंगे। जब रूप निहारेंगे, तब आरोप लगाना बंद कर देंगे।' उनका यह बयान अखिलेश यादव की उस आलोचना के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के वित्त प्रबंधन पर सवाल उठाए थे।
वाराणसी और 'इंडिया' गठबंधन पर भी बोले जगद्गुरु
वाराणसी में मीट की दुकानों को हटाए जाने के प्रशासनिक निर्णय पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि वाराणसी प्रशासन ने एकदम सही कदम उठाया है। विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की बैठकों को लेकर उन्होंने कहा कि यह गठबंधन सफल नहीं होगा और इसका भविष्य उज्ज्वल नहीं है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम की प्रतिक्रिया
धार्मिक नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी अखिलेश यादव के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और उनकी पार्टी की बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये वे लोग हैं जो राम मंदिर के रास्ते में बाधाएँ खड़ी करना चाहते थे। उन्होंने अखिलेश यादव, राहुल गांधी और कपिल सिब्बल का नाम लेते हुए कहा कि ये लोग राम मंदिर निर्माण के विरोधी रहे हैं।
जाँच की माँग — एक विरोधाभासी रुख
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि इन्हीं लोगों ने कल्कि धाम के निर्माण में भी बाधा डाली। हालाँकि, उन्होंने एक उल्लेखनीय रुख अपनाते हुए कहा कि यदि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से कोई सवाल उठाया जाता है, तो वह गंभीर विषय है और मामले की जाँच होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया कि इस मामले में जाँच कराई जाए। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है।
आगे क्या
गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट के फंड को लेकर यह विवाद अयोध्या में मंदिर के उद्घाटन के बाद से ही समय-समय पर उठता रहा है। आचार्य प्रमोद कृष्णम की जाँच की माँग से यह मामला अब राजनीतिक और धार्मिक दोनों मोर्चों पर केंद्र में आ गया है। यह देखना होगा कि सरकार इस माँग पर क्या प्रतिक्रिया देती है।