2 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रामभद्राचार्य विवाद: महंत सीताराम दास बोले — कोर्ट नहीं, मध्यस्थता से निकले हल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रामभद्राचार्य विवाद: महंत सीताराम दास बोले — कोर्ट नहीं, मध्यस्थता से निकले हल

सारांश

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के ब्राह्मण उपजातियों संबंधी वक्तव्य पर प्रयाग में परिवाद दाखिल होने के बाद अयोध्या के महंत सीताराम दास ने हस्तक्षेप किया है। उनका संदेश स्पष्ट है — कोर्ट की राह धर्म-समाज को नहीं जोड़ती, मध्यस्थता ही एकमात्र विकल्प है।

मुख्य बातें

अयोध्या के साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास जी महाराज ने 2 अक्टूबर 2026 को रामभद्राचार्य विवाद पर प्रतिक्रिया दी।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ तीर्थराज प्रयाग की सत्र न्यायालय में ब्राह्मण उपजातियों संबंधी वक्तव्य को लेकर परिवाद दाखिल किया गया है।
महंत सीताराम दास ने जगद्गुरु से ब्राह्मण समाज के प्रति खेद व्यक्त करने की अपील की।
महंत ने दोनों पक्षों से मध्यस्थता के ज़रिए विवाद सुलझाने और कानूनी प्रक्रिया न बढ़ाने का आग्रह किया।
उन्होंने रामभद्राचार्य के सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के लिए दीर्घकालिक योगदान को भी रेखांकित किया।

अयोध्या के साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास जी महाराज ने 2 अक्टूबर 2026 को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ दर्ज मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस विवाद को न्यायालय की बजाय आपसी बातचीत और मध्यस्थता के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए। ब्राह्मणों की उपजातियों को लेकर जगद्गुरु के एक वक्तव्य के बाद तीर्थराज प्रयाग के सत्र न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया है, जिसे लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में तनाव उत्पन्न हुआ है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उस वक्तव्य से जुड़ा है, जिसे ब्राह्मण समाज के कुछ वर्गों ने अपमानजनक माना। इसके बाद तीर्थराज प्रयाग की सत्र न्यायालय में एक परिवाद दाखिल किया गया। कथित तौर पर यह वक्तव्य ब्राह्मणों की उपजातियों के संदर्भ में दिया गया था, जिससे समाज के एक हिस्से की भावनाएँ आहत हुईं।

महंत सीताराम दास की अपील

महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि यदि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के वक्तव्य से ब्राह्मण समाज की भावनाएँ आहत हुई हैं, तो उन्हें समाज के प्रति खेद व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी वक्तव्य में चूक या त्रुटि हो जाना संभव है और ऐसी स्थिति में कानूनी प्रक्रिया की राह पकड़ने से समाज को कोई सकारात्मक लाभ नहीं मिलता।

महंत ने परिवाद दाखिल करने वाले पक्षों से भी अपील की कि नोटिस जारी कराने या मामले को आगे बढ़ाने के बजाय सभी पक्ष बैठकर सहमति से समाधान निकालें। उनके अनुसार, धार्मिक और सामाजिक मामलों में विवाद को हवा देने से समाज के भीतर विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

रामभद्राचार्य के योगदान का उल्लेख

महंत सीताराम दास ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के दीर्घकालिक सामाजिक और धार्मिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि वे लंबे समय से सनातन संस्कृति, राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समर्पित भाव से कार्य करते रहे हैं। उन्होंने इस संदर्भ को ध्यान में रखते हुए विवाद के शांतिपूर्ण समाधान पर बल दिया। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक नेताओं के बयानों को लेकर सामाजिक संवेदनशीलता बढ़ी हुई है।

सौहार्द बनाए रखने पर ज़ोर

महंत ने कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा सभी के कल्याण की कामना करता है और समाज में आपसी सौहार्द बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने दोनों पक्षों से अनुरोध किया कि मध्यस्थता के माध्यम से इस विवाद को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए, ताकि समाज में किसी प्रकार का विभेद न उत्पन्न हो।

आगे की राह

गौरतलब है कि इस मामले में अभी तक किसी आधिकारिक मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। महंत सीताराम दास की यह अपील ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है जब अयोध्या धार्मिक सौहार्द के प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय ध्यान के केंद्र में है। अब देखना होगा कि दोनों पक्ष इस अपील पर किस रूप में प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताती है कि जाति-आधारित संवेदनशीलता अब धार्मिक संस्थाओं के भीतर भी उतनी ही तीखी है जितनी राजनीतिक क्षेत्र में। मध्यस्थता की यह पुकार सुनने में सौम्य लगती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कोई निष्पक्ष और स्वीकार्य मंच उपलब्ध है जो दोनों पक्षों को संतुष्ट कर सके।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ क्या मामला दर्ज हुआ है?
तीर्थराज प्रयाग की सत्र न्यायालय में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ एक परिवाद दाखिल किया गया है, जो ब्राह्मणों की उपजातियों को लेकर दिए गए उनके वक्तव्य से संबंधित है। आरोप है कि इस वक्तव्य से ब्राह्मण समाज की भावनाएँ आहत हुई हैं।
महंत सीताराम दास ने इस विवाद पर क्या कहा?
अयोध्या के साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि इस विवाद को कानूनी प्रक्रिया से आगे बढ़ाने के बजाय आपसी बातचीत और मध्यस्थता के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य से ब्राह्मण समाज के प्रति खेद व्यक्त करने की भी अपील की।
क्या रामभद्राचार्य ने अपने वक्तव्य पर खेद जताया है?
स्रोत में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जगद्गुरु रामभद्राचार्य की ओर से अभी तक कोई औपचारिक खेद या सफाई सामने नहीं आई है। महंत सीताराम दास ने ही उनसे इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया है।
इस विवाद का समाज पर क्या असर हो सकता है?
महंत सीताराम दास के अनुसार, धार्मिक और सामाजिक मामलों में विवाद को हवा देने से समाज के भीतर विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने से किसी पक्ष को सकारात्मक लाभ नहीं मिलेगा और सामाजिक सौहार्द को नुकसान हो सकता है।
आगे इस मामले में क्या हो सकता है?
महंत सीताराम दास ने दोनों पक्षों से मध्यस्थता के ज़रिए विवाद समाप्त करने की अपील की है। हालाँकि, अभी तक किसी आधिकारिक मध्यस्थता प्रक्रिया के शुरू होने की जानकारी नहीं है और सत्र न्यायालय में दाखिल परिवाद की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले