महंत राजू दास का निषाद विवाद पर स्पष्टीकरण: 'टीवी बहस की प्रतिक्रिया को जातिगत रंग दिया गया'
सारांश
मुख्य बातें
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने 1 सितंबर को अयोध्या में निषाद समुदाय को लेकर की गई अपनी विवादित टिप्पणी पर विस्तृत सफाई पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके शब्दों का उद्देश्य निषाद समुदाय का अपमान करना नहीं था, बल्कि यह डीडी वन पर प्रसारित एक टीवी डिबेट के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता की कथित असभ्य भाषा का जवाब था, जिसे उनके अनुसार जानबूझकर जातिगत रंग दिया जा रहा है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला डीडी वन पर अयोध्या मछलीकांड पर आयोजित एक टेलीविजन बहस से जुड़ा है, जिसमें समाजवादी पार्टी सहित कई दलों के प्रवक्ता उपस्थित थे। महंत राजू दास के अनुसार, बहस की शुरुआत में ही कांग्रेस प्रवक्ता ने उनके साथ असभ्य भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि उस असभ्यता का जवाब देने के बाद उनके बयान को संदर्भ से काटकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया।
महंत का पक्ष
महंत राजू दास ने 'जय सियाराम' और 'निषादराज महाराज की जय' के उद्घोष के साथ अपनी बात रखते हुए कहा, 'पूरे देश में इस प्रकार से माहौल बनाया गया कि हमने निषाद समुदाय को गाली दी। निषाद समुदाय को मैंने कुछ भी नहीं कहा और मैं जानता भी नहीं था कि ये कांग्रेस का प्रवक्ता निषाद समुदाय से है।' उन्होंने आगे कहा, 'चाहे वो किसी भी समुदाय का हो, मेरा किसी भी समुदाय के खिलाफ कोई ऐसा बयान नहीं था।'
गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर इस विवाद को लेकर महंत राजू दास के विरुद्ध निषाद समुदाय में आक्रोश भड़काने के प्रयास हो रहे थे, जिसे उन्होंने 'बेहद दुखद और निंदनीय' बताया।
धार्मिक संदर्भ और निषाद समुदाय से संबंध
महंत ने निषाद समुदाय के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि निषाद समाज एक भक्त और धार्मिक समुदाय है। उन्होंने याद दिलाया कि अयोध्या न केवल भगवान राम की जन्मभूमि है, बल्कि निषादराज महाराज का ननिहाल भी यहीं था। उन्होंने कहा, 'भगवान राम और निषादराज दोनों मित्र थे। हम हनुमान के शिष्य हैं, तो भगवान राम के सेवक हनुमान और हम लोग हनुमान के दास। तो यह कतई संभव नहीं हो सकता कि हमने किसी निषाद बिरादरी को कुछ कहा हो।'
कांग्रेस पर तीखा हमला
महंत राजू दास ने इस पूरे विवाद के पीछे कांग्रेस की सुनियोजित रणनीति बताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास अब जनाधार नहीं बचा है और वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) से सीधे मुकाबले में असमर्थ है। उनके अनुसार, 60 वर्षों के शासन में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और धर्म के आधार पर देश को विभाजित करने का काम किया। उन्होंने निषाद समुदाय से अपील की कि वह कांग्रेस की इस तरह की रणनीति से सतर्क रहें।
आगे क्या
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समुदाय की बढ़ती राजनीतिक अहमियत को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न दल इस समुदाय को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। महंत राजू दास की सफाई के बाद देखना होगा कि निषाद समुदाय के नेता और संगठन इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।