1 सितंबर 2026
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महंत राजू दास का निषाद विवाद पर स्पष्टीकरण: 'टीवी बहस की प्रतिक्रिया को जातिगत रंग दिया गया'

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महंत राजू दास का निषाद विवाद पर स्पष्टीकरण: 'टीवी बहस की प्रतिक्रिया को जातिगत रंग दिया गया'

सारांश

हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने निषाद समुदाय विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि डीडी वन पर अयोध्या मछलीकांड की बहस में कांग्रेस प्रवक्ता की असभ्यता का जवाब था — समुदाय का अपमान नहीं। उन्होंने इसे कांग्रेस की जातिगत राजनीति की साजिश बताया।

मुख्य बातें

महंत राजू दास ने 1 सितंबर को अयोध्या में निषाद समुदाय विवाद पर सार्वजनिक सफाई दी।
विवाद डीडी वन पर अयोध्या मछलीकांड पर हुई टीवी बहस से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस प्रवक्ता से तीखी नोकझोंक हुई।
महंत के अनुसार उन्हें पता ही नहीं था कि कांग्रेस प्रवक्ता निषाद समुदाय से हैं; उनका इरादा समुदाय को गाली देने का नहीं था।
उन्होंने निषादराज महाराज और भगवान राम की मित्रता का हवाला देते हुए निषाद समुदाय के प्रति श्रद्धा जताई।
महंत ने कांग्रेस पर जातिगत ध्रुवीकरण की साजिश का आरोप लगाया और निषाद समुदाय को सतर्क रहने की अपील की।

हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने 1 सितंबर को अयोध्या में निषाद समुदाय को लेकर की गई अपनी विवादित टिप्पणी पर विस्तृत सफाई पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके शब्दों का उद्देश्य निषाद समुदाय का अपमान करना नहीं था, बल्कि यह डीडी वन पर प्रसारित एक टीवी डिबेट के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता की कथित असभ्य भाषा का जवाब था, जिसे उनके अनुसार जानबूझकर जातिगत रंग दिया जा रहा है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला डीडी वन पर अयोध्या मछलीकांड पर आयोजित एक टेलीविजन बहस से जुड़ा है, जिसमें समाजवादी पार्टी सहित कई दलों के प्रवक्ता उपस्थित थे। महंत राजू दास के अनुसार, बहस की शुरुआत में ही कांग्रेस प्रवक्ता ने उनके साथ असभ्य भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि उस असभ्यता का जवाब देने के बाद उनके बयान को संदर्भ से काटकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया।

महंत का पक्ष

महंत राजू दास ने 'जय सियाराम' और 'निषादराज महाराज की जय' के उद्घोष के साथ अपनी बात रखते हुए कहा, 'पूरे देश में इस प्रकार से माहौल बनाया गया कि हमने निषाद समुदाय को गाली दी। निषाद समुदाय को मैंने कुछ भी नहीं कहा और मैं जानता भी नहीं था कि ये कांग्रेस का प्रवक्ता निषाद समुदाय से है।' उन्होंने आगे कहा, 'चाहे वो किसी भी समुदाय का हो, मेरा किसी भी समुदाय के खिलाफ कोई ऐसा बयान नहीं था।'

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर इस विवाद को लेकर महंत राजू दास के विरुद्ध निषाद समुदाय में आक्रोश भड़काने के प्रयास हो रहे थे, जिसे उन्होंने 'बेहद दुखद और निंदनीय' बताया।

धार्मिक संदर्भ और निषाद समुदाय से संबंध

महंत ने निषाद समुदाय के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि निषाद समाज एक भक्त और धार्मिक समुदाय है। उन्होंने याद दिलाया कि अयोध्या न केवल भगवान राम की जन्मभूमि है, बल्कि निषादराज महाराज का ननिहाल भी यहीं था। उन्होंने कहा, 'भगवान राम और निषादराज दोनों मित्र थे। हम हनुमान के शिष्य हैं, तो भगवान राम के सेवक हनुमान और हम लोग हनुमान के दास। तो यह कतई संभव नहीं हो सकता कि हमने किसी निषाद बिरादरी को कुछ कहा हो।'

कांग्रेस पर तीखा हमला

महंत राजू दास ने इस पूरे विवाद के पीछे कांग्रेस की सुनियोजित रणनीति बताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास अब जनाधार नहीं बचा है और वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) से सीधे मुकाबले में असमर्थ है। उनके अनुसार, 60 वर्षों के शासन में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और धर्म के आधार पर देश को विभाजित करने का काम किया। उन्होंने निषाद समुदाय से अपील की कि वह कांग्रेस की इस तरह की रणनीति से सतर्क रहें।

आगे क्या

यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समुदाय की बढ़ती राजनीतिक अहमियत को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न दल इस समुदाय को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। महंत राजू दास की सफाई के बाद देखना होगा कि निषाद समुदाय के नेता और संगठन इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह दर्शकों तक पहुँचा और उसकी व्याख्या समुदाय विशेष ने की — तो जिम्मेदारी इरादे से नहीं, प्रभाव से तय होती है। निषाद समुदाय उत्तर प्रदेश में एक निर्णायक वोट-बैंक है और यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब सभी दल इस समुदाय को साधने में जुटे हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि इस पूरे प्रकरण में असली पीड़ित पक्ष — निषाद समुदाय — की आवाज़ लगभग अनुपस्थित है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महंत राजू दास और निषाद समुदाय विवाद क्या है?
हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने डीडी वन पर अयोध्या मछलीकांड पर हुई एक टीवी बहस के दौरान कुछ ऐसी टिप्पणी की जिसे निषाद समुदाय के प्रति अपमानजनक बताया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके विरुद्ध आक्रोश फैला, जिस पर उन्होंने 1 सितंबर को सफाई दी।
महंत राजू दास ने अपनी सफाई में क्या कहा?
महंत ने कहा कि उनकी टिप्पणी कांग्रेस प्रवक्ता की असभ्य भाषा का जवाब थी और उन्हें पता ही नहीं था कि वह प्रवक्ता निषाद समुदाय से हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी समुदाय का अपमान करना नहीं था।
यह विवाद किस टीवी बहस से जुड़ा है?
यह विवाद डीडी वन पर अयोध्या मछलीकांड पर आयोजित एक बहस से जुड़ा है, जिसमें समाजवादी पार्टी सहित कई दलों के प्रवक्ता शामिल थे। महंत के अनुसार उस बहस में कांग्रेस प्रवक्ता ने पहले असभ्यता की, जिसका उन्होंने जवाब दिया।
महंत राजू दास ने निषाद समुदाय से क्या अपील की?
महंत ने निषाद समुदाय से अपील की कि वे कांग्रेस की रणनीति से सतर्क रहें। उन्होंने भगवान राम और निषादराज की मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस समुदाय का सम्मान करते हैं।
इस विवाद का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
निषाद समुदाय उत्तर प्रदेश में एक महत्वपूर्ण वोट-बैंक है और यह विवाद उस समय सामने आया है जब विभिन्न दल इस समुदाय को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रकरण से जातीय समीकरणों पर असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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