रामेश्वरम हवाई अड्डा: तमिलनाडु ने मणिकनेरी में 600 एकड़ परियोजना के लिए केंद्र से साइट क्लीयरेंस माँगी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु औद्योगिक विकास निगम (TIDCO) ने रामनाथपुरम जिले के मणिकनेरी में प्रस्तावित रामेश्वरम हवाई अड्डे के लिए 18 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से औपचारिक साइट क्लीयरेंस (स्थल मंजूरी) का आवेदन किया है। यह कदम इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को नियामक प्रक्रिया में एक अहम चरण आगे ले जाता है, हालाँकि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले अभी और मंजूरियाँ मिलनी बाकी हैं।
मणिकनेरी को क्यों चुना गया
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने पाँच संभावित स्थानों का तकनीकी मूल्यांकन किया और मणिकनेरी को सर्वाधिक उपयुक्त घोषित किया। AAI की इस सिफारिश के आधार पर राज्य सरकार ने यह स्थान अंतिम रूप से तय किया।
प्रस्तावित हवाई अड्डा लगभग 600 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाना है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही आरंभ हो चुकी है, और TIDCO आवश्यक मंजूरियाँ हासिल करने के लिए समन्वय का काम कर रही है।
परियोजना की पृष्ठभूमि और महत्त्व
रामेश्वरम भारत के प्रमुख तीर्थ एवं पर्यटन स्थलों में से एक है। रामनाथस्वामी मंदिर और धनुषकोडी यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं, जो देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को खींचते हैं। इसके बावजूद रामनाथपुरम जिला अब तक पूरी तरह सड़क और रेल संपर्क पर ही निर्भर रहा है।
गौरतलब है कि वायु संपर्क की अनुपस्थिति न केवल यात्रा का समय बढ़ाती है, बल्कि पर्यटन की संभावनाओं को भी सीमित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु सरकार राज्य में बुनियादी ढाँचे के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है।
नियामक प्रक्रिया और अगले चरण
किसी भी नए हवाई अड्डे की स्थापना के लिए साइट क्लीयरेंस और सैद्धांतिक मंजूरी (in-principle approval) — दोनों अनिवार्य हैं। साइट क्लीयरेंस मिलने के बाद परियोजना के निर्माण चरण की ओर बढ़ा जा सकता है, तत्पश्चात परिचालन अनुमतियाँ प्राप्त की जाती हैं।
TIDCO का यह आवेदन उसी क्रम में अगला कदम है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय मंजूरी मिलते ही परियोजना विकास के अगले चरण में प्रवेश कर सकती है।
आम जनता और पर्यटन पर असर
यदि यह परियोजना अपेक्षित गति से आगे बढ़ती है, तो रामेश्वरम आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सड़क व रेल के अतिरिक्त हवाई परिवहन का विकल्प मिलेगा। इससे यात्रा का समय उल्लेखनीय रूप से कम होने की उम्मीद है।
स्थानीय व्यापार, आतिथ्य क्षेत्र और रोज़गार पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालाँकि वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब हवाई अड्डा परिचालन में आएगा, जो अभी कई नियामक और निर्माण चरणों से दूर है।
आगे की राह
फिलहाल सभी की निगाहें नागरिक उड्डयन मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। साइट क्लीयरेंस मिलने की समयसीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। राज्य सरकार और TIDCO के लिए अगला महत्त्वपूर्ण पड़ाव केंद्र की यह मंजूरी हासिल करना होगा, जिसके बाद ही परियोजना निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।