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सबरीमाला हवाई अड्डे की माँग: केरल BJP ने कोडुमन में 3,000 एकड़ जमीन के अध्ययन को केंद्र से माँगी मंजूरी

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सबरीमाला हवाई अड्डे की माँग: केरल BJP ने कोडुमन में 3,000 एकड़ जमीन के अध्ययन को केंद्र से माँगी मंजूरी

सारांश

केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू को सबरीमाला के लिए समर्पित हवाई अड्डे का प्रस्ताव सौंपा — पथानामथिट्टा के कोडुमन में 3,000 एकड़ जमीन पर व्यवहार्यता अध्ययन की माँग। शिरडी और तिरुपति की तर्ज पर तीर्थयात्रियों को विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी देने की कोशिश।

मुख्य बातें

राजीव चंद्रशेखर ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से मिलकर सबरीमाला हवाई अड्डे का औपचारिक प्रस्ताव सौंपा।
प्रस्ताव में पथानामथिट्टा जिले के कोडुमन में 3,000 एकड़ भूमि पर व्यवहार्यता अध्ययन की अनुमति माँगी गई है।
यह स्थल केंद्र की ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पॉलिसी के तहत विचार के लिए प्रस्तावित किया गया है।
वर्तमान में तीर्थयात्रियों को कोच्चि या तिरुवनंतपुरम से सड़क मार्ग द्वारा कई घंटे का सफर करना पड़ता है।
प्रस्ताव शिरडी और तिरुपति के मॉडल पर आधारित है; पथानामथिट्टा के प्रवासी परिवारों को भी लाभ होने की उम्मीद।

केरल भाजपा के अध्यक्ष एवं विधायक राजीव चंद्रशेखर ने सबरीमाला तीर्थयात्रियों के लिए एक समर्पित हवाई अड्डे की माँग को केंद्र सरकार के समक्ष औपचारिक रूप से रखा है। उन्होंने पथानामथिट्टा जिले के कोडुमन में लगभग 3,000 एकड़ भूमि पर व्यवहार्यता अध्ययन कराने का प्रस्ताव सौंपा है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब प्रमुख धार्मिक स्थलों तक बेहतर हवाई कनेक्टिविटी देश में आधारभूत ढाँचे के विकास की प्राथमिकता बनती जा रही है।

प्रस्ताव की मुख्य बातें

चंद्रशेखर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से मुलाकात की और वरिष्ठ भाजपा नेताओं कुम्मनम राजशेखरन तथा अनूप एंटनी द्वारा तैयार किया गया विस्तृत प्रस्ताव उन्हें सौंपा। इस प्रस्ताव में कोडुमन एस्टेट में स्थित 3,000 एकड़ भूमि का विस्तृत निरीक्षण करने की अनुमति माँगी गई है, ताकि इसे संभावित हवाई अड्डा स्थल के रूप में परखा जा सके।

प्रस्ताव के अनुसार, पंपा के निकट स्थित इस भूखंड को केंद्र की ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पॉलिसी के तहत विचार के लिए भी नामांकित किया गया है। इस पूरी पहल में केरल सरकार के साथ संयुक्त रूप से काम करने की भी बात कही गई है।

मौजूदा कनेक्टिविटी की चुनौती

चंद्रशेखर ने रेखांकित किया कि देश-विदेश से सबरीमाला आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को वर्तमान में या तो कोच्चि या तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर उतरना पड़ता है और फिर तीर्थ स्थल तक पहुँचने के लिए कई घंटों की थकाऊ सड़क यात्रा करनी पड़ती है। उन्होंने तर्क दिया कि एक समर्पित हवाई अड्डा इस यात्रा को न केवल छोटा बल्कि सुगम भी बना देगा।

गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर में प्रतिवर्ष मंडल-मकरविलक्कू सीजन के दौरान करोड़ों तीर्थयात्री आते हैं, जिससे मौजूदा सड़क और परिवहन व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।

पथानामथिट्टा क्षेत्र को संभावित लाभ

भाजपा नेता ने पथानामथिट्टा क्षेत्र, विशेष रूप से प्रवासी परिवारों के लिए, इस परियोजना के व्यापक फायदों की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई संपर्क सबरीमाला और उसके आसपास के व्यापक तीर्थयात्रा मार्ग को भी आर्थिक दृष्टि से सशक्त बना सकता है।

चंद्रशेखर ने शिरडी और तिरुपति जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार उन्नत परिवहन सुविधाओं ने वहाँ पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दी है। उनका कहना था कि सबरीमाला तीर्थयात्रियों को भी अन्य बड़े तीर्थ केंद्रों के समकक्ष विश्व स्तरीय यात्रा सुविधाएँ मिलनी चाहिए।

ग्रीनफील्ड नीति और आगे की राह

कोडुमन एस्टेट की विशाल भूमि को केंद्र की ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पॉलिसी के तहत प्रस्तावित करना रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इस नीति के अंतर्गत केंद्र नए हवाई अड्डों के विकास के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करता है। हालाँकि, इस चरण में केवल व्यवहार्यता अध्ययन की अनुमति माँगी गई है — हवाई अड्डे के निर्माण की कोई औपचारिक मंजूरी अभी नहीं दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्ताव पर केंद्र की प्रतिक्रिया और केरल सरकार का रुख ही यह तय करेगा कि यह माँग किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल, यह प्रस्ताव एक राजनीतिक एजेंडे के साथ-साथ तीर्थयात्रा बुनियादी ढाँचे के विमर्श को भी नई धार देने का काम करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक स्पष्ट राजनीतिक आयाम भी है — केरल में BJP की पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हिंदू तीर्थस्थलों की कनेक्टिविटी एक कारगर मुद्दा रही है। असली सवाल यह है कि केरल सरकार — जो वामपंथी नेतृत्व में है — इस संयुक्त परियोजना में सहभागिता को लेकर कितनी सहमत होगी, क्योंकि भूमि हस्तांतरण और पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ इस क्षेत्र में हमेशा विवादास्पद रही हैं। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए व्यवहार्यता अध्ययन एक लंबी प्रक्रिया है और कोडुमन की भौगोलिक चुनौतियाँ — घने जंगल, पहाड़ी इलाका — इसे तकनीकी रूप से जटिल बनाती हैं।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबरीमाला हवाई अड्डे का प्रस्ताव क्या है?
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने पथानामथिट्टा जिले के कोडुमन में लगभग 3,000 एकड़ भूमि पर व्यवहार्यता अध्ययन के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी माँगी है। यह प्रस्ताव सबरीमाला तीर्थयात्रियों को समर्पित हवाई अड्डा बनाने की दिशा में पहला औपचारिक कदम है।
यह प्रस्ताव किसने और किसे सौंपा?
केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से मुलाकात कर यह प्रस्ताव सौंपा। प्रस्ताव वरिष्ठ भाजपा नेताओं कुम्मनम राजशेखरन और अनूप एंटनी ने तैयार किया था।
सबरीमाला के लिए अभी हवाई कनेक्टिविटी कैसी है?
अभी तीर्थयात्रियों को कोच्चि या तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर उतरना पड़ता है और फिर सड़क मार्ग से कई घंटे की यात्रा करनी पड़ती है। समर्पित हवाई अड्डे से यह यात्रा काफी छोटी और सुगम हो सकती है।
क्या इस प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी मिल गई है?
अभी तक केवल व्यवहार्यता अध्ययन की अनुमति माँगी गई है, हवाई अड्डे के निर्माण की कोई औपचारिक स्वीकृति नहीं मिली है। यह स्थल केंद्र की ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पॉलिसी के तहत विचार के लिए प्रस्तावित किया गया है।
इस हवाई अड्डे से किन्हें फायदा होगा?
सबसे अधिक लाभ देश-विदेश से आने वाले सबरीमाला तीर्थयात्रियों को होगा। इसके अलावा पथानामथिट्टा क्षेत्र के प्रवासी परिवारों और स्थानीय व्यापार को भी आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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