रामगढ़ के श्रीराम स्टील प्लांट में फिर फर्नेस ब्लास्ट, चार मजदूर झुलसे; एक की हालत गंभीर
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के रामगढ़ जिले के कुजू स्थित श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट में 25 अक्टूबर 2026 की शनिवार देर शाम रात्रि पाली के दौरान फर्नेस (भट्ठी) में विस्फोट हो गया, जिससे चार मजदूर झुलस गए। इनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि तीन अन्य को मामूली जलन आई है। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार रात को प्लांट में उत्पादन कार्य सामान्य गति से चल रहा था। इसी दौरान अचानक फर्नेस में जोरदार विस्फोट हुआ और वहाँ तैनात चार मजदूर इसकी चपेट में आ गए। सभी घायल मजदूर बिहार के रहने वाले बताए जा रहे हैं। विस्फोट की सूचना मिलते ही कुजू ओपी पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल विस्फोट के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्लांट में अफरा-तफरी, कर्मचारियों ने किया हंगामा
हादसे के तुरंत बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। अन्य कर्मचारियों के बीच दहशत फैल गई और उन्होंने घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा दिलाने की माँग को लेकर हंगामा किया। उल्लेखनीय है कि प्लांट प्रबंधन की ओर से इस घटना को मामूली करार दिया गया, और हादसे के कारणों, सुरक्षा इंतजामों तथा घायलों की स्थिति पर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।
पहले भी हो चुका है हादसा: सुरक्षा पर सवाल
यह घटना इसलिए और भी गंभीर है क्योंकि इसी श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट में 9 अगस्त 2026 को भी फर्नेस ब्लास्ट हुआ था, जिसमें एक मजदूर की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए थे, लेकिन कथित तौर पर कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। अब महज ढाई महीने के भीतर दोबारा इसी प्लांट में विस्फोट ने सुरक्षा प्रबंधन की विफलता को उजागर किया है।
आम जनता और श्रमिकों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में औद्योगिक सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर बहस तेज है। मजदूर संगठनों का कहना है कि रात्रि पाली में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त निगरानी तंत्र नहीं है। गौरतलब है कि झारखंड में स्टील और खनन उद्योगों में काम करने वाले अधिकांश श्रमिक पड़ोसी राज्यों, विशेषकर बिहार, से आते हैं, और उनके पास औपचारिक अनुबंध या बीमा सुरक्षा अक्सर नहीं होती।
आगे क्या
पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। श्रम विभाग और औद्योगिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। आलोचकों का कहना है कि 9 अगस्त 2026 की घटना के बाद प्लांट का सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए था — यदि ऐसा हुआ तो उसके निष्कर्षों की सार्वजनिक जानकारी नहीं है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस दोहराव को लेकर क्या कार्रवाई करती है।