रामगढ़ पावर प्लांट टर्बाइन ब्लास्ट: तीन इंजीनियरों की मौत, प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के रामगढ़ जिले के बरकाकाना थाना क्षेत्र स्थित हेहल में मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात के पावर प्लांट में 22 अगस्त 2026 (शनिवार) को टर्बाइन में हुए भीषण विस्फोट ने तीन इंजीनियरों की जान ले ली, जबकि एक इंजीनियर गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कंट्रोल रूम में ओवरहीटिंग के चलते सिस्टम फेल होने और टर्बाइन के ओवरस्पीड होने से यह हादसा हुआ। घायल इंजीनियर को बेहतर उपचार के लिए रांची रेफर किया गया है।
हादसे का घटनाक्रम
बरकाकाना थाना प्रभारी उमाशंकर वर्मा ने बताया कि कार्य के दौरान हुए इस हादसे में तीन कर्मियों की मौत हुई और एक कर्मी गंभीर रूप से घायल हुआ है। प्रारंभिक जाँच के अनुसार, पावर प्लांट के कंट्रोल रूम में ओवरहीटिंग के बाद प्रोटेक्शन सिस्टम फेल हो गया, टर्बाइन ओवरस्पीड हो गई और इमरजेंसी सिस्टम भी अपेक्षित रूप से काम नहीं कर सका — जिसके परिणामस्वरूप जोरदार विस्फोट हुआ।
हादसे में जिन इंजीनियरों की मौत हुई, उनमें विनीत महतो (जागेश्वर विहार, बोकारो), संजीव केसरी (धनबाद) और अभिषेक पांडेय (नगर उंटारी, गढ़वा) शामिल हैं। गंभीर रूप से घायल इंजीनियर तरुण रवानी (हजारीबाग) को रांची भेजा गया है।
कर्मचारियों के गंभीर आरोप
हादसे के बाद प्लांट कर्मचारियों ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि कंट्रोल रूम में लगा एयर कंडीशनर करीब एक महीने से खराब था और उसकी जगह महज कूलर की व्यवस्था की गई थी, जबकि वहाँ एसी की अनिवार्य आवश्यकता थी।
एक कर्मचारी ने बताया, 'यह घटना मैनेजमेंट की लापरवाही के कारण हुई है। पैनल ओवरहीट होने के बाद टर्बाइन ओवरस्पीड हो चुके थे। इस दौरान सभी सेफ्टी डिवाइस फेल हो गए और टर्बाइन में ब्लास्ट हुआ।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमने एक-दो महीने पहले से ही मैनेजमेंट को बताना शुरू किया था कि कंट्रोल रूम का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस की बजाय 50-60 डिग्री सेल्सियस रहता है।'
कर्मचारियों के अनुसार, कंट्रोल रूम के तापमान की टेम्परेचर गन से लगातार निगरानी की जाती थी और रीडिंग प्रबंधन को भेजी भी जाती थी — फिर भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
सुरक्षा मानकों पर सवाल
कर्मचारियों का दावा है कि अत्यधिक तापमान के कारण पावर प्लांट के पैनल और सिस्टम प्रभावित हुए, जिससे प्रोटेक्शन सिस्टम काम करना बंद कर गया। इसके बाद टर्बाइन ओवरस्पीड हुई और इमरजेंसी सिस्टम भी विफल रहा। कर्मचारियों का कहना है कि यदि कूलिंग व्यवस्था समय रहते दुरुस्त की जाती और सुरक्षा शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाता, तो संभवतः इस हादसे को टाला जा सकता था।
यह ऐसे समय में आया है जब औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर देशभर में बहस जारी है। गौरतलब है कि झारखंड के औद्योगिक क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े औद्योगिक हादसे दर्ज हो चुके हैं।
कर्मचारियों की माँगें
हादसे के बाद मजदूरों और कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जाँच, मृतकों के आश्रितों को उचित मुआवजा और घायल इंजीनियर के बेहतर उपचार की माँग की है। हादसे की जाँच में तकनीकी कारणों के साथ-साथ सुरक्षा मानकों के पालन, उपकरणों के रखरखाव और प्रबंधन को की गई कथित शिकायतों की भी जाँच की जानी चाहिए।
आगे क्या होगा
पुलिस और प्रशासन ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। प्लांट में सुरक्षा मानकों की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आने वाले दिनों में निर्णायक मोड़ ले सकती है। घायल इंजीनियर तरुण रवानी की हालत पर सभी की नजरें टिकी हैं।