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क्या रांची में रिम्स-टू के जमीन विवाद पर हुआ बड़ा बवाल?

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क्या रांची में रिम्स-टू के जमीन विवाद पर हुआ बड़ा बवाल?

सारांश

क्या रांची में रिम्स-टू मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन विवाद ने लोगों को सड़कों पर ला दिया? जानिए इस बवाल के पीछे की सच्चाई और प्रशासन की प्रतिक्रिया। हजारों लोगों ने बंजर भूमि पर धान रोपकर अपनी आवाज उठाई है।

मुख्य बातें

रांची में रिम्स-टू मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन विवाद गहरा हो गया है।
हजारों ग्रामीणों ने पुलिस की बैरिकेडिंग के बावजूद प्रदर्शन किया।
आंदोलन का नेतृत्व चंपई सोरेन कर रहे हैं।
सरकार ने पहले ही भूमि का अधिग्रहण किया है।
यह आंदोलन केवल स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों के समर्थन में है।

रांची, २४ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-टू मेडिकल कॉलेज के लिए चिन्हित भूमि को लेकर रविवार को जबरदस्त बवाल हुआ। पुलिस और प्रशासन द्वारा की गई चौतरफा बैरिकेडिंग और आंसू गैस के गोले फेंकने के बावजूद हजारों लोगों ने मेडिकल कॉलेज के लिए निर्धारित स्थल पर पहुंचकर हल चलाया और धान रोपा

इससे पहले, भूमि पर अधिकार की मांग को लेकर इकट्ठा हुए हजारों ग्रामीणों और पुलिस-प्रशासन के बीच तीव्र संघर्ष हुआ। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और बल का प्रयोग किया।

इसकी वजह से क्षेत्र में अफरातफरी मच गई, लेकिन आंदोलनकारी अलग-अलग समूहों में स्थल पर पहुंचने में सफल रहे। 'झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा' के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो और उनके कुछ साथियों ने प्रशासन को चकमा देकर हल-बैल के साथ आंदोलन स्थल पर सबसे पहले पहुंच गए। इसके बाद देखते-देखते हजारों महिलाएं और पुरुष भी वहां पहुंच गए।

आंदोलन के प्रमुख नेताओं में प्रेम शाही मुंडा, कमलेश राम, कुंदरेशी मुंडा, और अंजना लकड़ा शामिल रहे। आंदोलनकारियों के नेतृत्व की घोषणा करने वाले पूर्व सीएम और भाजपा नेता चंपई सोरेन को प्रशासन ने एहतियात के तौर पर रविवार सुबह उनके निवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया था।

प्रदर्शन स्थल पर जाते समय घाटशिला से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन को पुलिस ने तमाड़ थाना क्षेत्र में हिरासत में ले लिया, वहीं सरायकेला के कांड्रा थाना क्षेत्र से जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर और भाजपा नेता रामकुमार पाहन को भी पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया।

प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए शनिवार शाम से पूरे क्षेत्र में नाकेबंदी कर दी थी। नगड़ी जाने वाले रास्तों पर जगह-जगह बैरिकेडिंग करके लोगों को रोकने का प्रयास किया गया था। मेडिकल कॉलेज की प्रस्तावित साइट के आसपास निषेधाज्ञा लागू करने का आदेश प्रशासन ने शनिवार को ही जारी किया।

आंदोलन के नेता चंपई सोरेन का कहना है कि यह आंदोलन अस्पताल निर्माण के खिलाफ नहीं है, बल्कि आदिवासी और मूलवासी किसानों की उपजाऊ भूमि को छीने जाने के विरोध में है। जब बंजर भूमि और लैंड बैंक उपलब्ध है तो सरकार ने अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए बिना किसानों को खेती से रोकने का आदेश किस आधार पर जारी किया है।

वहीं, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का कहना है कि नगड़ी की भूमि रिम्स-टू के लिए उपयुक्त है और वहां अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना सरकार की प्राथमिकता है। जिस भूमि पर रिम्स-टू का निर्माण होना है, उसका अधिग्रहण सरकार वर्षों पहले कर चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह एक व्यापक सवाल है जो आदिवासी और मूलवासी अधिकारों से जुड़ा है। यह आवश्यक है कि सरकार और प्रशासन इस मुद्दे का समाधान संवाद और समझ के माध्यम से करे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची में रिम्स-टू का क्या महत्व है?
रिम्स-टू मेडिकल कॉलेज का निर्माण स्वास्थ्य सेवा में सुधार के लिए आवश्यक है, लेकिन यह स्थानीय किसानों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा भी है।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
आंदोलनकारी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का पालन करने की मांग कर रहे हैं और अपनी उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
क्या प्रशासन ने सही कदम उठाए?
प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग और अन्य उपाय किए, लेकिन यह भी जरूरी है कि वे स्थानीय लोगों की चिंताओं को सुनें।
राष्ट्र प्रेस
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