13 अक्टूबर 2026
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राशिद राहिल: शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार, पर जनता को परेशानी स्वीकार्य नहीं

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राशिद राहिल: शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार, पर जनता को परेशानी स्वीकार्य नहीं

सारांश

जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक विशेषज्ञ राशिद राहिल ने दिल्ली के सप्ताह भर चले विरोध-प्रदर्शनों पर दो-टूक कहा — लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सर्वोपरि है, लेकिन ट्रेनें रद्द और मेट्रो बंद करके आम नागरिक को परेशान करना स्वीकार्य नहीं। साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार में योग्य नेताओं की नियुक्ति पर जोर दिया।

मुख्य बातें

राशिद राहिल ने 13 अक्टूबर 2026 को कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, किंतु इससे जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
दिल्ली में एक सप्ताह के विरोध-प्रदर्शनों के कारण कई ट्रेनें रद्द हुईं और मेट्रो स्टेशन बंद किए गए।
राहिल ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जाँच की माँग की।
जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार पर उन्होंने कहा — योग्य नेताओं को मौका मिले तो सकारात्मक परिणाम संभव।
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर राहिल का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।

जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक विशेषज्ञ राशिद राहिल ने 13 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में दिल्ली में हुए सप्ताह भर के विरोध-प्रदर्शनों और जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार की देरी पर अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, किंतु इस अधिकार के प्रयोग से आम जनता को असुविधा नहीं होनी चाहिए।

दिल्ली विरोध-प्रदर्शन और जनता की परेशानी

राहिल ने कहा, 'देश में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना सभी का अधिकार है, चाहे वह सीजेपी हो, इंडिया ब्लॉक हो या एनडीए।' उन्होंने इशारा किया कि दिल्ली में एक सप्ताह तक चले विरोध-प्रदर्शनों के कारण कई इलाके बंद रहे, अनेक ट्रेनें रद्द हुईं और मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े, जिससे आम नागरिकों को भारी असुविधा झेलनी पड़ी।

राहिल के अनुसार, 'इस तरह के विरोध-प्रदर्शन से लोगों के मुद्दे हल होने के बजाय उलझ जाते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदर्शनकारी कोई आरोप लगाते हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि उसकी विधिवत जाँच कराए और सत्य सामने लाए।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर विपक्ष के आरोप

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शनों और आरोपों पर राहिल ने कहा कि दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक राजनीतिक दल विरोध में उतरे हुए हैं, लेकिन इन सभी विरोधों में जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दे हाशिए पर चले गए हैं।

उन्होंने कहा, 'सरकारों पर जो भी आरोप लग रहे हैं, उनकी हकीकत सामने आनी चाहिए।' साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार का दायित्व है कि वह लोगों की समस्याओं का समाधान करे, न कि उन्हें राजनीतिक विवादों में उलझाए रखे।

मतदाता सूची में गड़बड़ियों की जाँच की माँग

राहिल ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जाँच की माँग भी की। उनका मानना है कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऐसी शिकायतों की पारदर्शी जाँच आवश्यक है।

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक खींचतान बढ़ रही है और कई दलों ने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार और यूनिफॉर्म सिविल कोड

जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार पर राहिल ने कहा कि यदि काबिल और योग्य नेताओं को सेवा का अवसर दिया जाए, तो यह विस्तार सकारात्मक परिणाम दे सकता है। उन्होंने चेताया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते जनहित के मुद्दे पीछे नहीं छूटने चाहिए।

यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रश्न पर उन्होंने संयम के साथ कहा कि आने वाले दिनों में इस विषय पर स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।

आगे क्या होगा

राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन कैबिनेट विस्तार को लेकर कब और कैसे अंतिम निर्णय लेता है। राहिल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राज्य में राजनीतिक संतुलन साधने का दबाव लगातार बढ़ रहा है और जनता की अपेक्षाएँ शासन-व्यवस्था से जुड़ी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन्हीं आम नागरिकों पर बोझ है जिनके लिए ये आंदोलन होने का दावा किया जाता है। जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार पर 'योग्य नेताओं' की शर्त सतह पर सामान्य लगती है, लेकिन असल सवाल यह है कि इस 'योग्यता' को परिभाषित कौन करेगा और किस कसौटी पर। मतदाता सूची में गड़बड़ी की जाँच की माँग को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जा सकता जब तक इसके लिए कोई स्वतंत्र तंत्र न हो।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राशिद राहिल ने दिल्ली विरोध-प्रदर्शनों पर क्या कहा?
राशिद राहिल ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, चाहे कोई भी दल हो। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली में एक सप्ताह तक चले प्रदर्शनों से ट्रेनें रद्द होना और मेट्रो बंद होना आम जनता के लिए अस्वीकार्य असुविधा है।
जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार में देरी क्यों हो रही है?
राशिद राहिल के अनुसार जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और खींचतान के कारण कैबिनेट विस्तार में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि योग्य और काबिल नेताओं को सेवा का अवसर मिले, तो यह विस्तार सकारात्मक परिणाम दे सकता है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी की जाँच की माँग किसने की?
जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक विशेषज्ञ राशिद राहिल ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जाँच की माँग की है। उनका मानना है कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए ऐसी शिकायतों की पारदर्शी जाँच जरूरी है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर राशिद राहिल का क्या रुख है?
राशिद राहिल ने यूनिफॉर्म सिविल कोड के प्रश्न पर सतर्क रुख अपनाया और कहा कि आने वाले दिनों में इस विषय पर स्थिति और अधिक स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने इस पर अभी कोई सीधी राय व्यक्त करने से परहेज किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर विपक्ष के विरोध को राहिल ने कैसे देखा?
राशिद राहिल ने कहा कि दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक राजनीतिक दल विरोध में उतरे हैं, लेकिन इन विरोधों में जनता के बुनियादी मुद्दे गायब हैं। उनके अनुसार सरकारों पर लगे आरोपों की सच्चाई सामने आनी चाहिए, लेकिन सरकार की प्राथमिकता जनसमस्याओं का समाधान होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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