शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है, सांप्रदायिक सद्भाव न बिगाड़ें: शाही चीफ मुफ्ती इफ्राहिम हुसैन
सारांश
मुख्य बातें
अलीगढ़ के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफ्राहिम हुसैन ने 9 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और अधिकारों की मांग करना संवैधानिक अधिकार है, परंतु इसकी आड़ में सांप्रदायिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वाले कार्यक्रमों से दूर रहना आवश्यक है। उन्होंने देशभर के समुदायों से अपील की कि वे किसी भी आंदोलन में सहभागिता से पूर्व उसके उद्देश्य और संभावित परिणामों पर गंभीरता से विचार करें।
चीफ इमाम की अपील पर प्रतिक्रिया
मौलाना इफ्राहिम हुसैन ने चीफ इमाम डॉ. उमैर इलियासी की उस अपील के संदर्भ में अपनी राय रखी, जिसमें मुसलमानों से ऐसे कार्यक्रमों और प्रदर्शनों से दूर रहने को कहा गया था जो शांति-व्यवस्था और आपसी भाईचारे को हानि पहुँचाते हों। मौलाना ने कहा कि शांति बनाए रखने की अपील उचित है, किंतु संवैधानिक दायरे के भीतर रहकर अधिकारों के लिए आवाज उठाना पूरी तरह जायज़ है।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। मौलाना ने कहा कि कुछ मामलों में कथित तौर पर सरकार को निशाना बनाने के उद्देश्य से प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
राजनीतिक भ्रम और गुमराही की चेतावनी
मौलाना ने आगाह किया कि राजनीतिक उद्देश्यों से लोगों को गुमराह कर आंदोलनों में शामिल कराया जा सकता है। उनके अनुसार, न्याय, ईमानदारी और समानता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है और किसी भी मुद्दे को इन्हीं कसौटियों पर परखा जाना चाहिए।
उन्होंने कुछ प्रदर्शनकारियों पर स्वयं को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करने का आरोप भी लगाया। मौलाना के अनुसार, जो लोग स्वयं अन्याय में संलिप्त रहे हैं, उनका अब पीड़ित होने का दावा करना विचारणीय है। यदि सरकार अन्याय खत्म करने और समानता स्थापित करने की दिशा में कदम उठा रही है, तो ऐसे प्रयासों के विरोध के कारणों पर भी आत्म-मंथन आवश्यक है।
प्रदर्शनकारियों को सुझाव
मौलाना ने प्रदर्शनकारियों को सुझाव दिया कि वे अपने आचरण का स्वयं आकलन करें और विचार करें कि वे न्याय, ईमानदारी, शांति तथा समानता के सिद्धांतों का किस हद तक पालन करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक कारणों से न्याय और शांति की दिशा में किए जाने वाले प्रयास बाधित नहीं होने चाहिए।
मौलाना ने दोहराया कि वे अधिकारों की लड़ाई या प्रदर्शन के विरुद्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़े या शांति-व्यवस्था प्रभावित हो।
शांति और भाईचारे की अपील
अपने संदेश के अंत में मौलाना ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे किसी भी विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने से पूर्व उसके उद्देश्य और परिणामों पर विचार अवश्य करें। उनके अनुसार, न्याय और समानता की मांग के साथ-साथ अमन और आपसी भाईचारा बनाए रखना भी उतना ही ज़रूरी है। यह बयान ऐसे समय में महत्व रखता है जब देश के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक तनाव के बीच धार्मिक नेताओं की भूमिका अधिक प्रासंगिक हो गई है।