मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बृज भूषण सिंह का समर्थन किया, देशविरोधी गतिविधियों पर कानूनी कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
बरेली के著名 इस्लामी धर्मगुरु मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 19 अक्टूबर 2026 को कैसरगंज के पूर्व सांसद बृज भूषण सिंह के धरना-प्रदर्शनों संबंधी बयान का खुलकर समर्थन किया और देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है, किंतु इसकी आड़ में राष्ट्रीय एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक ढाँचे को क्षति नहीं पहुँचनी चाहिए।
बृज भूषण सिंह के बयान पर मौलाना का रुख
मौलाना रजवी ने कहा कि पूर्व सांसद बृज भूषण सिंह ने धरना-प्रदर्शनों को लेकर जो विचार व्यक्त किए हैं, वे उचित हैं। उनके अनुसार, वर्तमान समय में आंदोलनों के दौरान कुछ देशविरोधी तत्व सक्रिय हो जाते हैं और विपक्ष के कतिपय नेता भी ऐसे बयान देते हैं जो राष्ट्रहित में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों का उदाहरण देकर तख्तापलट की बात करना या सत्ता परिवर्तन की चर्चा करना सरासर अनुचित है।
देशविरोधी बयानों पर कानूनी कार्रवाई की माँग
मौलाना ने कहा कि जो लोग सार्वजनिक मंचों से देशविरोधी बयान देते हैं या ऐसी गतिविधियों में शामिल होते हैं, उनके खिलाफ सरकार को कानूनी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि ऐसी गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाई जानी चाहिए। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक प्रदर्शनों की आवृत्ति बढ़ी है और उनके स्वरूप को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
हिंसा और तोड़फोड़ पर गहरी चिंता
मौलाना रजवी ने दावा किया कि दिल्ली में अब तक हुए कई प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और लाठीचार्ज जैसी घटनाएँ सामने आई हैं। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएँ न केवल प्रदर्शनकारियों की साख को नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि राष्ट्रीय छवि को भी प्रभावित करती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में शांतिपूर्ण विरोध का हिंसक रूप लेना स्वीकार्य नहीं है।
आम जनता और कारोबार पर असर
मौलाना ने कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास रोज़गार करने वाले लोगों की दुर्दशा का उल्लेख करते हुए कहा कि बार-बार होने वाले प्रदर्शनों से वहाँ के व्यवसायों को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने विपक्ष, सीजेपी, आइसा और अन्य आयोजक संगठनों से अपील की कि वे आंदोलन की रणनीति बनाते समय आम नागरिकों की परेशानियों और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले असर को प्राथमिकता दें।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने संबोधन का समापन इस आह्वान के साथ किया कि किसी भी आंदोलन का मूल उद्देश्य अपनी माँगें सरकार के सामने रखना होना चाहिए, न कि आम जनता को कठिनाई में डालना। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से राष्ट्रीय एकता और अखंडता की रक्षा करते हुए अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का आग्रह किया। यह देखना होगा कि उनकी इस अपील का विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों पर क्या प्रभाव पड़ता है।