मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने दिल्ली हिंसक प्रदर्शनों की निंदा की, बोले — सत्ता परिवर्तन का रास्ता सिर्फ वोट है
सारांश
मुख्य बातें
बरेली के著名 धर्मगुरु मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने 3 नवंबर 2026 को दिल्ली में सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट की माँग को लेकर हुए प्रदर्शनों की कड़ी निंदा करते हुए हिंसा को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत एक सुदृढ़ लोकतांत्रिक देश है और यहाँ सरकार बदलने की असली ताकत जनता के वोट में निहित है, किसी भी प्रकार की हिंसा या तख्तापलट की राजनीति में नहीं।
मौलाना रिजवी का स्पष्ट संदेश
मौलाना रिजवी ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन और धरना-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, परंतु हिंसा और तख्तापलट के नारों के ज़रिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के सर्वथा विरुद्ध है। उन्होंने कहा, यदि किसी को सरकार की नीतियों से असहमति है, तो वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठा सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे 'रिजीम चेंज', 'तख्तापलट' और भारत को बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका जैसा बनाने वाले नारों का किसी भी स्तर पर समर्थन नहीं करते। उनके अनुसार इस तरह की माँगें भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हैं और इनकी कड़ी निंदा होनी चाहिए।
साजिश और विदेशी ताकतों का आरोप
मौलाना रिजवी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में हुए हिंसक प्रदर्शनों के पीछे कुछ संगठनों का हाथ हो सकता है और इसमें विदेशी ताकतों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग विदेश से आए, यहाँ नारेबाज़ी और प्रदर्शन करने के बाद या तो वापस चले गए या खामोश हो गए।
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में तख्तापलट समर्थक नारों को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क बताई जा रही हैं। रिजवी ने माँग की कि पर्दे के पीछे रहकर अशांति फैलाने वाले तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
निष्पक्ष जाँच की माँग
मौलाना ने जोर देकर कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि कौन से लोग भारत में अशांति फैलाने और देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का कानून और यहाँ की जनता इस तरह की हिंसक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं कर सकते।
गौरतलब है कि रिजवी का यह बयान तब आया है जब विपक्षी दलों और नागरिक समाज के कुछ वर्गों में दिल्ली प्रदर्शनों की प्रकृति को लेकर बहस तेज़ हो गई है।
लोकतंत्र की रक्षा पर ज़ोर
मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि देश की शांति, अमन और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमज़ोर करने की किसी भी कोशिश को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन हिंसा और तख्तापलट की राजनीति स्वीकार नहीं की जा सकती।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि जाँच एजेंसियाँ प्रदर्शनों के पीछे की कथित साजिश को लेकर क्या कदम उठाती हैं और क्या रिजवी जैसे धर्मगुरुओं की अपील का असर सामाजिक माहौल पर पड़ता है।