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शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार, पर जनता की परेशानी अस्वीकार्य: राशिद राहिल

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शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार, पर जनता की परेशानी अस्वीकार्य: राशिद राहिल

सारांश

जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक विशेषज्ञ राशिद राहिल का कहना है कि दिल्ली में सप्ताहभर चले प्रदर्शनों ने ट्रेनें रद्द कराईं और मेट्रो बंद रखी — यह अधिकार की सीमा है। साथ ही उन्होंने मतदाता सूची जाँच और जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार में योग्य नेताओं की नियुक्ति की अपील की।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक विशेषज्ञ राशिद राहिल ने 13 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर से शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताया, लेकिन जनता को हुई परेशानी को अस्वीकार्य कहा।
दिल्ली में एक सप्ताह के प्रदर्शनों के दौरान कई ट्रेनें रद्द हुईं और मेट्रो स्टेशन बंद रहे।
राहिल ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों की निष्पक्ष जाँच की माँग की।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार तभी सकारात्मक परिणाम देगा जब योग्य नेताओं को चुना जाए।
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर राहिल ने कहा कि आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।

जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक विशेषज्ञ राशिद राहिल ने 13 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में मीडिया से बात करते हुए दिल्ली में बीते सप्ताह चले विरोध-प्रदर्शनों और जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार में हो रही देरी पर विस्तार से अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, किंतु इस अधिकार का प्रयोग इस प्रकार नहीं होना चाहिए कि आम जनता की दिनचर्या बाधित हो।

दिल्ली विरोध-प्रदर्शन पर राहिल की राय

राहिल ने कहा, 'देश में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना सभी का अधिकार है, चाहे वह सीजेपी, इंडिया ब्लॉक या एनडीए हो।' उन्होंने रेखांकित किया कि दिल्ली में प्रदर्शन के कारण एक सप्ताह तक कई इलाके बंद रहे, जिससे न केवल आम नागरिकों को परेशानी हुई बल्कि कई ट्रेनें रद्द की गईं और मेट्रो स्टेशन भी बंद करने पड़े। उनके अनुसार, इस तरह के व्यापक व्यवधान से जनता की समस्याएँ सुलझने के बजाय और उलझ जाती हैं।

सरकार और विरोधियों की जवाबदेही

राहिल ने यह भी कहा कि यदि प्रदर्शनकारी कोई आरोप लगाते हैं तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसकी निष्पक्ष जाँच करे और सच्चाई सामने लाए। साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि जनता की जान-माल की सुरक्षा के मद्देनज़र प्रदर्शनों पर उचित नियंत्रण रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, दिल्ली से लेकर जम्मू-कश्मीर तक राजनीतिक दल विरोध में व्यस्त हैं, लेकिन इन सबके बीच जनता से जुड़े असली मुद्दे हाशिए पर चले जाते हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप और मतदाता सूची

विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चलाए जा रहे प्रदर्शनों और लगाए गए आरोपों पर टिप्पणी करते हुए राहिल ने कहा कि सरकारों पर लग रहे सभी आरोपों की हकीकत सामने आनी चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ियों की जाँच की भी माँग की और कहा कि जब तक पारदर्शिता नहीं होगी, तब तक जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा डगमगाता रहेगा। गौरतलब है कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल जम्मू-कश्मीर के हालिया विधानसभा चुनावों के बाद से ही उठते रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार और यूनिफॉर्म सिविल कोड

राहिल ने जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते जनहित के मुद्दे पीछे नहीं छूटने चाहिए। उनके अनुसार यदि योग्य और काबिल नेताओं को सेवा का अवसर मिले, तो यह कैबिनेट विस्तार सकारात्मक परिणाम दे सकता है। यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नई निर्वाचित सरकार अपने प्रशासनिक ढाँचे को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।

आगे क्या

राशिद राहिल के इस विश्लेषण ने जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक बहस में एक संतुलित स्वर जोड़ा है — जो न केवल विरोध के अधिकार को स्वीकार करता है, बल्कि उसके व्यापक सामाजिक असर पर भी सवाल उठाता है। कैबिनेट विस्तार और मतदाता सूची की जाँच जैसे मुद्दे अब जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब प्रदर्शन आम नागरिक की ट्रेन रद्द कराने और मेट्रो बंद करने की कीमत पर आए, तो यह अधिकार और जिम्मेदारी के बीच की बहस खड़ी करता है। मतदाता सूची जाँच की माँग एक वाजिब मुद्दा है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह भूल जाती है कि जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार की देरी का सीधा असर उस जनता पर पड़ता है जिसने नई सरकार से उम्मीदें लगाई हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के शोर में शासन और जवाबदेही का सवाल दब न जाए — यही असली चिंता है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राशिद राहिल ने दिल्ली के विरोध-प्रदर्शनों पर क्या कहा?
राशिद राहिल ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, चाहे वह किसी भी दल का हो। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली में एक सप्ताह तक चले प्रदर्शनों से ट्रेनें रद्द हुईं और मेट्रो स्टेशन बंद रहे, जो आम जनता के लिए अस्वीकार्य है।
जम्मू-कश्मीर कैबिनेट विस्तार में देरी क्यों हो रही है?
राशिद राहिल के अनुसार जम्मू-कश्मीर में बढ़ती राजनीतिक खींचतान कैबिनेट विस्तार में देरी की एक प्रमुख वजह है। उन्होंने कहा कि यदि योग्य और काबिल नेताओं को सेवा का अवसर दिया जाए तो यह विस्तार सकारात्मक परिणाम दे सकता है।
राहिल ने मतदाता सूची को लेकर क्या माँग रखी?
राशिद राहिल ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जाँच की माँग की। उनका कहना है कि जब तक इस पर पारदर्शिता नहीं होगी, तब तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास कमज़ोर बना रहेगा।
जम्मू-कश्मीर में यूनिफॉर्म सिविल कोड की स्थिति क्या है?
राशिद राहिल ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सीधा जवाब देने से परहेज़ किया और कहा कि आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक बहस में बना हुआ है।
विपक्ष के मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए आरोपों पर राहिल का क्या रुख है?
राहिल ने कहा कि सरकारों पर लग रहे सभी आरोपों की हकीकत सामने आनी चाहिए और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जाँच करे। उनके अनुसार, सरकार को जनता की समस्याएँ हल करनी चाहिए, न कि उन्हें राजनीतिक विवादों में उलझाए रखना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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