10 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जंतर-मंतर हिरासत पर रोहिणी आचार्य और मुकेश सहनी का केंद्र पर हमला, 500 से अधिक प्रदर्शनकारी पकड़े गए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जंतर-मंतर हिरासत पर रोहिणी आचार्य और मुकेश सहनी का केंद्र पर हमला, 500 से अधिक प्रदर्शनकारी पकड़े गए

सारांश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CEC के इस्तीफे की माँग कर रहे 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों की हिरासत ने राजनीतिक हलचल मचा दी। राजद नेता रोहिणी आचार्य और वीआईपी के मुकेश सहनी ने केंद्र सरकार पर मौलिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया — और सवाल उठाया कि क्या युवाओं की आवाज़ को दबाया जा रहा है।

मुख्य बातें

जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जो CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे थे।
हिरासत में लिए गए लोगों में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके , आशुतोष रांका , सौरव दास और इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी कथित तौर पर शामिल थे।
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट कर कार्रवाई को अनुच्छेद 19 का संभावित उल्लंघन बताया और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की माँग की।
मुकेश सहनी ने युवाओं के लिए 'मक्खी' और 'कॉकरोच' जैसे कथित शब्दों की आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान करार दिया।
रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे कुछ युवाओं को एयरपोर्ट पर भी रोका गया।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता रोहिणी आचार्य और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक मुकेश सहनी ने 10 अक्टूबर को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, जब नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के अनुसार, 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें कई जाने-माने नाम शामिल थे।

मुख्य घटनाक्रम

हिरासत में लिए गए लोगों में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी कथित तौर पर शामिल थे। यह प्रदर्शन सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे कुछ युवाओं को एयरपोर्ट पर भी रोका गया।

रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट के माध्यम से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने लिखा, 'डराएं या धमकाएं नहीं, देश अब जाग चुका है। देश के युवा तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।'

एक अन्य पोस्ट में आचार्य ने कहा, 'जब भी आप सच बोलने वाली आवाज को दबाएंगे, देश के हर कोने में आपको कई ध्रुव राठी और सौरव मिल जाएंगे।' उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को रोकना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। आचार्य ने हिरासत में लिए गए सभी लोगों की तत्काल रिहाई की माँग की।

मुकेश सहनी का बयान

बिहार के पूर्व मंत्री और वीआईपी संस्थापक मुकेश सहनी ने युवाओं के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए 'मक्खी' और 'कॉकरोच' जैसे शब्दों की आलोचना की और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा दुर्भाग्यपूर्ण है।

सहनी ने जुब्बा सहनी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और रानी लक्ष्मीबाई जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने भी अन्याय और दमन के विरुद्ध आवाज उठाई थी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रोज़गार, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठाने वाले युवा लोकतंत्र की शक्ति हैं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दलों में असंतोष बढ़ रहा है। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर इस तरह के बड़े पैमाने पर हिरासत की घटनाएँ नागरिक समाज में व्यापक बहस छेड़ देती हैं। आलोचकों का कहना है कि एयरपोर्ट पर प्रदर्शनकारियों को रोकना और सामूहिक हिरासत, संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर सवाल खड़े करती है।

क्या होगा आगे

सहनी ने केंद्र सरकार से युवाओं की चिंताओं को दबाने के बजाय उनसे संवाद करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है — इसमें नागरिकों का अपनी राय रखने और सत्ता से सवाल पूछने का अधिकार भी शामिल है। आचार्य और सहनी दोनों ने सरकार से सम्मानजनक संवाद की माँग की है, जबकि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई की खबरों की प्रतीक्षा जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नागरिक स्वतंत्रता के व्यापक सिकुड़ने का संकेत है। रोहिणी आचार्य और मुकेश सहनी की प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से विपक्षी राजनीति से प्रेरित है, लेकिन अनुच्छेद 19 का सवाल राजनीतिक सीमाओं से परे है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर हिरासत की संख्या पर रुक जाती है — असली सवाल यह है कि CEC के इस्तीफे की माँग को लेकर इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों ज़रूरी समझी गई, और क्या यह चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर बहस को और तीखा करेगी।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में क्यों लिया गया?
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।
रोहिणी आचार्य ने हिरासत पर क्या कहा?
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर कई पोस्ट कर कार्रवाई की निंदा की और संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए इसे मौलिक अधिकारों का संभावित उल्लंघन बताया। उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की माँग की।
मुकेश सहनी ने युवाओं के लिए किन शब्दों की आलोचना की?
मुकेश सहनी ने युवाओं के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए 'मक्खी' और 'कॉकरोच' जैसे शब्दों को दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि सवाल पूछने वाले युवा लोकतंत्र की ताकत हैं।
ध्रुव राठी और अन्य को हिरासत में लिया गया था?
रिपोर्टों के अनुसार, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी, सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया। इन खबरों पर रोहिणी आचार्य ने भी सवाल उठाए।
क्या एयरपोर्ट पर भी प्रदर्शनकारियों को रोका गया?
रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे कुछ युवाओं को एयरपोर्ट पर रोका गया या राजधानी में प्रवेश से वंचित किया गया। रोहिणी आचार्य ने इन खबरों पर चिंता जताई और इसे असंवैधानिक बताया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 57 मिनट पहले
  2. 6 घंटे पहले
  3. 10 घंटे पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 4 दिन पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 सप्ताह पहले