14 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी बोले — 'तिरंगे के लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता', सीजेपी नेता 5 दिन की न्यायिक हिरासत में

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राहुल गांधी बोले — 'तिरंगे के लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता', सीजेपी नेता 5 दिन की न्यायिक हिरासत में

सारांश

जंतर मंतर को निर्धारित विरोध स्थल से हटाने के बाद सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत पर राहुल गांधी ने सरकार पर 'कायरता' का आरोप लगाया। यह घटना उस व्यापक बहस का हिस्सा है जिसमें विपक्ष विरोध के संवैधानिक अधिकार पर पाबंदी का सवाल उठा रहा है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने एक्स पर कहा — जंतर मंतर पर तिरंगे के लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है।
सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत ; अजिंक्य शिंदे निजी मुचलके पर रिहा।
तीनों पर अतिक्रमण, ₹50,000 बॉन्ड शर्तों का उल्लंघन और लोक सेवकों के कर्तव्य में बाधा डालने का आरोप।
12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर गैर अधिसूचित किया।
विरोध के लिए अब तीन नए स्थान — रामलीला ग्राउंड , बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड (पूर्वी दिल्ली) — निर्धारित।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को कहा कि जंतर मंतर पर तिरंगा लहराने के लिए युवाओं को जेल भेजना 'कायरता का काम' है। यह बयान तब आया जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो नेताओं — सौरव दास और आशुतोष रांका — को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

राहुल गांधी का बयान

राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, "शांतिपूर्ण विरोध में जंतर मंतर पर तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता का काम है। छात्र, युवा, पत्रकार, इंडिया ब्लॉक, अलग अलग बैनर के — एक ही कारण है कि नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की माँग कर रहे हैं।" उन्होंने आगे जोड़ा, "जंतर मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस लेंगे।"

मुख्य घटनाक्रम: गिरफ्तारी से हिरासत तक

तीनों सीजेपी नेताओं को मंगलवार सुबह नई दिल्ली के जंतर मंतर में पुलिस बैरिकेड्स पार कर प्रवेश करने की कोशिश करने पर हिरासत में लिया गया था। वे चुनाव आयोग के खिलाफ मतदाता सूची की विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगा रहे थे।

बुधवार सुबह तीनों को मंदिर मार्ग स्थित मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। सौरव दास और आशुतोष रांका पर अतिक्रमण, बॉन्ड शर्तों का उल्लंघन और लोक सेवकों के कर्तव्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, उन्हें 'आदतन अपराधी' के रूप में देखा जा रहा है।

पिछला मामला और बॉन्ड उल्लंघन

गौरतलब है कि सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में ₹50,000 का बॉन्ड भरकर इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक वर्ष तक किसी भी शांति भंग मामले में शामिल नहीं होंगे। इस बार की गिरफ्तारी उसी बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आधार पर हुई है — जिससे दोनों के खिलाफ मामला कानूनी रूप से और पेचीदा हो गया है।

जंतर मंतर का गैर अधिसूचित होना

12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने घोषणा की कि जंतर मंतर को अब निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर अधिसूचित कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह निर्णय गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। अब दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान — रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड — निर्धारित किए गए हैं।

आगे क्या

सौरव दास और आशुतोष रांका की 5 दिन की न्यायिक हिरासत की समयसीमा पूरी होने के बाद उनके मामले में अगली सुनवाई होगी। विपक्षी दल इस मामले को नागरिक अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों के व्यापक सवाल से जोड़कर देख रहे हैं। जंतर मंतर के गैर अधिसूचित होने को लेकर विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह ऐसे समय में हुआ है जब विपक्ष चुनाव आयोग की मतदाता सूची प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी का 'कायरता' वाला बयान राजनीतिक रूप से धारदार है, लेकिन असली मुद्दा यह है कि बॉन्ड उल्लंघन की कानूनी पेचीदगी ने विरोध के अधिकार के नैतिक तर्क को कमज़ोर किया है या नहीं। विपक्ष के लिए यह एक राजनीतिक हथियार है; सरकार के लिए यह कानून व्यवस्था का मामला — दोनों के बीच संवैधानिक संतुलन की यह बहस आने वाले दिनों में और गहरी होगी।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि जंतर मंतर पर तिरंगा लहराने के लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता का काम है। उन्होंने यह भी कहा कि जंतर मंतर भारत के लोगों का है और इसे वापस लिया जाएगा।
सीजेपी के किन नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया?
सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा किया गया। तीनों को मंगलवार सुबह जंतर मंतर में पुलिस बैरिकेड्स पार करने पर हिरासत में लिया गया था।
जंतर मंतर को विरोध स्थल से क्यों हटाया गया?
12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने घोषणा की कि गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर अधिसूचित कर दिया गया है। अब रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड नए विरोध स्थल होंगे।
सीजेपी नेताओं पर कौन से आरोप लगाए गए हैं?
सौरव दास और आशुतोष रांका पर अतिक्रमण, 10 अक्टूबर को भरे ₹50,000 के बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन और लोक सेवकों के कर्तव्य में बाधा डालने के आरोप हैं। अधिकारियों के अनुसार, उन्हें आदतन अपराधी के रूप में देखा जा रहा है।
सीजेपी नेता जंतर मंतर पर किस मुद्दे पर विरोध करने गए थे?
सीजेपी नेता चुनाव आयोग के खिलाफ मतदाता सूची की विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन करने गए थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाते हुए पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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