14 अक्टूबर 2026
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तिरंगा लहराने पर सौरव दास और आशुतोष रांका न्यायिक हिरासत में, CJP फाउंडर दिपके बोले — यह तानाशाही

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तिरंगा लहराने पर सौरव दास और आशुतोष रांका न्यायिक हिरासत में, CJP फाउंडर दिपके बोले — यह तानाशाही

सारांश

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने इसे तानाशाही बताते हुए ब्रिटिश राज से तुलना की — और पूछा: क्या इस देश में तिरंगा लहराना अपराध है?

मुख्य बातें

सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर 2026 को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
दोनों को तिहाड़ जेल में अलग-अलग — जेल नंबर 2 और जेल नंबर 4 — में रखा गया है।
तीसरे सदस्य अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
आरोप: जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश, मुचलके की शर्तों का उल्लंघन और सरकारी कर्तव्य में बाधा।
CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने NDA सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए ब्रिटिश शासनकाल से तुलना की।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर 2026 को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोप है कि दोनों ने जंतर-मंतर पर कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश किया और वहाँ राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस घटनाक्रम पर CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर कड़े शब्दों में निशाना साधा।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार सुबह तीनों CJP सदस्यों — सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे — को नई दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, जबकि तीसरे सदस्य अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, सौरव दास को तिहाड़ जेल नंबर 2 में रखा गया है, जबकि आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल नंबर 4 में अलग सेल में रखा गया है।

आरोप और कानूनी पहलू

तीनों CJP सदस्यों के विरुद्ध अनधिकृत प्रवेश, मुचलके की शर्तों के उल्लंघन और सरकारी अधिकारियों के कर्तव्य-निर्वहन में बाधा डालने के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की अधिसूचित स्थिति से पहले ही हटाया जा चुका है।

तीनों नेताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अभिष्ट हेल ने बताया, 'उन्हें पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।'

अभिजीत दिपके की तीखी प्रतिक्रिया

CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने इस गिरफ्तारी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'क्या इस देश में तिरंगा लहराना अपराध है? आशुतोष और सौरव को पाँच दिन के लिए जेल में क्यों भेजा गया है? क्योंकि उन्होंने जंतर-मंतर पर जाकर तिरंगा लहराया। ये एक तानाशाही की निशानी है। ऐसा आखिरी बार अंग्रेजों के शासन काल में हुआ था। जब अंग्रेज राज कर रहे थे, तब हमारे स्वतंत्रता सेनानी जो संघर्ष कर रहे थे, तिरंगा लहरा रहे थे, तो उन्हें जेल में डाल दिया जाता था।'

दिपके का यह बयान राष्ट्रीय प्रतीकों के उपयोग और प्रदर्शनकारियों के अधिकार को लेकर एक व्यापक बहस की ओर संकेत करता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के नियमों और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर विमर्श पहले से ही तेज़ है।

आम जनता और विपक्ष पर असर

यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कृत्य को आरोप का आधार बनाना आलोचकों की नज़र में नागरिक अधिकारों से जुड़ा सवाल है। विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज संगठनों द्वारा इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

क्या होगा आगे

सौरव दास और आशुतोष रांका की पाँच दिन की न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद अगली सुनवाई तय होगी। अधिवक्ता अभिष्ट हेल के अनुसार मामले में कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी। दोनों नेताओं के बचाव में CJP की ओर से अदालत में पैरवी की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब तक कि सार्वजनिक व्यवस्था को सीधा खतरा न हो। मुख्यधारा की कवरेज इस सवाल को नज़रअंदाज़ कर रही है कि जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल से हटाने का निर्णय स्वयं कितना विवादास्पद था — और उस हटाने के बाद नागरिकों के पास विरोध के वैध विकल्प क्या बचे हैं। दिपके की ब्रिटिश राज से तुलना भले ही अतिरंजित लगे, लेकिन यह मामला नागरिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक स्थल की राजनीति पर एक जरूरी बहस छेड़ता है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में क्यों लिया गया?
दोनों को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में एहतियातन हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ अनधिकृत प्रवेश, मुचलके की शर्तों के उल्लंघन और सरकारी कर्तव्य में बाधा के मामले दर्ज हैं।
दोनों CJP नेताओं को कितने दिन की हिरासत मिली है?
मंदिर मार्ग, नई दिल्ली स्थित मजिस्ट्रेट ने 14 अक्टूबर 2026 को सौरव दास और आशुतोष रांका को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। उन्हें तिहाड़ जेल में अलग-अलग सेल में रखा गया है।
CJP के तीसरे सदस्य अजिंक्य शिंदे का क्या हुआ?
तीसरे CJP सदस्य अजिंक्य शिंदे को उसी सुनवाई में निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया, जबकि उनके दो साथियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की स्थिति क्या है?
जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित अधिसूचित स्थल की श्रेणी से पहले ही हटाया जा चुका है। इसी कारण वहाँ प्रवेश को 'अनधिकृत' माना गया और CJP सदस्यों पर मामला दर्ज हुआ।
अभिजीत दिपके ने NDA सरकार पर क्या आरोप लगाए?
CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि देश में तिरंगा लहराने को अपराध की तरह देखा जा रहा है और इसे तानाशाही की निशानी बताया। उन्होंने इस घटना की तुलना ब्रिटिश शासनकाल से की, जब स्वतंत्रता सेनानियों को तिरंगा फहराने पर जेल भेजा जाता था।
राष्ट्र प्रेस
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