14 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर तिरंगा गिरफ्तारी: AAP का सवाल — अपने देश में झंडा फहराना अपराध कब से?

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जंतर-मंतर तिरंगा गिरफ्तारी: AAP का सवाल — अपने देश में झंडा फहराना अपराध कब से?

सारांश

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद दो सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। AAP ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए 1975 के आपातकाल से तुलना की। केजरीवाल का सवाल — 'अपने ही देश में तिरंगा फहराना अपराध कब से?' — राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने पर सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार कर 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट कर गिरफ्तारी को 'हास्यास्पद' बताया और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल उठाए।
राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा — 'भारत माता की जय' के नारे लगाने पर युवाओं को जेल भेजना अंग्रेजी राज की याद दिलाता है।
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मौजूदा हालात की तुलना 1975 के आपातकाल से की।
सीजेपी के तीसरे नेता अजिंक्या शिंदे भी तिरंगा फहराने के कार्यक्रम में शामिल थे।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 14 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला, जब जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के आरोप में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार कर पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। AAP ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया।

मुख्य घटनाक्रम

जंतर-मंतर पर सीजेपी नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्या शिंदे ने तिरंगा फहराया और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने दोनों को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में विरोध-प्रदर्शनों के अधिकार और सार्वजनिक स्थानों पर प्रतीकात्मक राष्ट्रीय कार्यक्रमों को लेकर बहस तेज है। गौरतलब है कि जंतर-मंतर देश का परंपरागत विरोध-स्थल रहा है, जहाँ वर्षों से विभिन्न दलों और आंदोलनों ने अपनी आवाज बुलंद की है।

AAP नेताओं की प्रतिक्रिया

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि क्या अब अपने ही देश में तिरंगा फहराना भी अपराध हो गया है। उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी को 'हास्यास्पद' बताते हुए इस पर कड़ी नाराजगी जताई।

AAP के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने सवाल किया कि क्या देश में अंग्रेजों का शासन चल रहा है, जो तिरंगा फहराने और 'भारत माता की जय' के नारे लगाने पर युवाओं को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी कार्रवाइयों से देश के युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

आपातकाल से तुलना

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल से की। उन्होंने कहा कि उस दौर में भी चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप, छात्र-मजदूर आंदोलन, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दे केंद्र में थे। उनके मुताबिक, तत्कालीन परिस्थितियों में राज नारायण और मोरारजी देसाई जैसे नेताओं समेत अनेक लोग गिरफ्तार किए गए थे।

भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार औपचारिक रूप से आपातकाल घोषित किए बिना भी ऐसे कदम उठा सकती है, जिनसे लोकतांत्रिक गतिविधियाँ प्रभावित हों। हालाँकि ये आरोप AAP के राजनीतिक पक्ष से लगाए गए हैं और सरकार की ओर से इन पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

सौरभ भारद्वाज ने इस घटनाक्रम को देश की आर्थिक स्थिति, विदेश नीति और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कथित आंतरिक राजनीतिक हालात से भी जोड़ा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और चीन की ओर से लद्दाख पर किए जा रहे दावों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। BJP की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक खंडन उपलब्ध नहीं हुआ।

आगे का रास्ता

संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि देश के युवा आगे भी तिरंगा फहराते रहेंगे और 'भारत माता की जय' के नारे लगाते रहेंगे। AAP ने इस मामले को संसदीय और सार्वजनिक मंचों पर उठाने के संकेत दिए हैं। सीजेपी नेताओं की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में आगे की सुनवाई होनी है, जिस पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई में यह उस बढ़ती बेचैनी को दर्शाता है कि सार्वजनिक स्थानों पर प्रतीकात्मक विरोध की वैधानिक सीमा कहाँ तय होती है। तिरंगे को राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक माना जाता है — उसे फहराने पर गिरफ्तारी की खबर, चाहे जो भी कानूनी आधार हो, स्वाभाविक रूप से नागरिक चेतना को झकझोरती है। AAP का 1975 के आपातकाल से तुलना करना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि गिरफ्तारी का ठोस कानूनी आधार क्या था — वह पहलू उतना ही ज़रूरी है जितना AAP का विरोध।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने पर किसे और क्यों गिरफ्तार किया गया?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने और 'भारत माता की जय' के नारे लगाने के बाद दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। अदालत ने दोनों को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है।
AAP ने इस गिरफ्तारी पर क्या कहा?
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट कर इसे 'हास्यास्पद' बताया और सवाल उठाया कि अपने देश में तिरंगा फहराना अपराध कब से हो गया। AAP ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया।
AAP ने किस ऐतिहासिक घटना से इस मामले की तुलना की?
AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मौजूदा हालात की तुलना 1975 के आपातकाल से की, जब राज नारायण और मोरारजी देसाई समेत कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना आपातकाल घोषित किए भी लोकतांत्रिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
सीजेपी के कितने नेता इस घटना में शामिल थे?
संजय सिंह के अनुसार, सीजेपी के तीन नेता — सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्या शिंदे — जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के कार्यक्रम में शामिल थे। इनमें से सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार किया गया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सौरव दास और आशुतोष रांका की 5 दिन की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में आगे की सुनवाई होनी है। AAP ने इस मुद्दे को संसदीय और सार्वजनिक मंचों पर उठाने के संकेत दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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