तिरंगा फहराना संवैधानिक अधिकार, सरकार डरी हुई है: हन्नान मोल्लाह का केंद्र पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के महासचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य हन्नान मोल्लाह ने 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि तिरंगा फहराना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, और इस अधिकार से सरकार डरती है। सीजेपी (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी को 'युद्ध क्षेत्र' में बदल दिया गया है।
मुख्य आरोप और बयान
मोल्लाह ने कहा, 'उन्होंने समय, स्थान और उद्देश्य भी घोषित कर दिया है और तिरंगा फहराना यह संवैधानिक अधिकार है और एक देशभक्तिपूर्ण अभिव्यक्ति है। लेकिन सरकार इससे डरती है।' उन्होंने तंज करते हुए जोड़ा कि सत्तारूढ़ दल रात-दिन देशभक्ति और 'वंदे मातरम' की बात करता है, लेकिन जब आम नागरिकों के झंडा फहराने के लोकतांत्रिक अधिकार की बात आती है तो वह रवैया विरोधाभासी हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि '50 के दशक तक उन्होंने झंडा नहीं फहराया।'
यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में बड़े विरोध प्रदर्शनों को लेकर प्रशासनिक तैयारियाँ चल रही हैं और विपक्षी दलों एवं किसान संगठनों का केंद्र सरकार के साथ तनाव उभरा हुआ है।
सेना की तैनाती पर गंभीर आरोप
मोल्लाह ने केंद्र सरकार पर एक और संगीन आरोप लगाया। उनके अनुसार देश की सीमाओं की रक्षा के लिए बनी सुरक्षा बलों को 'देश की युवा पीढ़ी और अगली पीढ़ी को पीटने के लिए' दिल्ली में तैनात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) भी इस प्रदर्शन में सहभागी है और उन्हें विश्वास है कि यह एक बड़ा प्रदर्शन होगा। गौरतलब है कि विरोध प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की तैनाती का मुद्दा पहले भी राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है।
सत्ता परिवर्तन और संवैधानिक सिद्धांतों पर तीखा रुख
मोल्लाह ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ शक्तियों की 13 वर्षों की गतिविधियाँ संविधान के सिद्धांतों, लोकतांत्रिक अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और जनएकता के विरुद्ध रही हैं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लेने का वादा पूरा किया, लेकिन अन्य समस्याओं के समाधान का आश्वासन अधूरा है।
एआईकेएस का 36वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन
ऑल इंडिया किसान सभा का 36वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन 15 से 18 नवंबर 2026 के बीच नालगोंडा, तेलंगाना में आयोजित होगा। मोल्लाह ने बताया कि यह संगठन 1936 में स्थापित हुआ था और अब अपनी 90वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिससे यह देश का सबसे पुराना किसान संगठन है। संगठन वर्तमान में भारत के 525 जिलों में सक्रिय है।
सम्मेलन में किसानों की समस्याओं, सरकार के वादों की समीक्षा और संगठन के विस्तार की रणनीति पर चर्चा होगी। मोल्लाह ने कहा कि उन क्षेत्रों में भी संगठन को फैलाने की कोशिश होगी जहाँ अब तक पहुँच नहीं बन सकी है। किसान आंदोलन का अगला चरण इस सम्मेलन की दिशा पर काफी हद तक निर्भर करेगा।