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तिरंगा फहराना संवैधानिक अधिकार, सरकार डरी हुई है: हन्नान मोल्लाह का केंद्र पर तीखा हमला

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तिरंगा फहराना संवैधानिक अधिकार, सरकार डरी हुई है: हन्नान मोल्लाह का केंद्र पर तीखा हमला

सारांश

एआईकेएस महासचिव हन्नान मोल्लाह ने केंद्र सरकार पर सीधा आरोप लगाया — तिरंगा फहराने का संवैधानिक अधिकार छीना जा रहा है, दिल्ली को युद्ध क्षेत्र बनाया गया है और सुरक्षा बलों को युवाओं के खिलाफ तैनात किया जा रहा है। नवंबर में नालगोंडा में एआईकेएस का 36वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन होगा।

मुख्य बातें

हन्नान मोल्लाह ने 16 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह तिरंगा फहराने के संवैधानिक अधिकार से डरती है।
उन्होंने कहा कि नई दिल्ली को 'युद्ध क्षेत्र' में बदला गया है और सुरक्षा बलों को युवा पीढ़ी के विरुद्ध तैनात किया जा रहा है।
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) भी सीजेपी (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में भागीदार है।
मोल्लाह ने सरकार पर तीन कृषि कानून वापसी के बाद अन्य वादों से मुकरने का आरोप लगाया।
एआईकेएस का 36वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन 15–18 नवंबर 2026 को नालगोंडा, तेलंगाना में होगा; संगठन अपनी 90वीं वर्षगांठ मना रहा है।
एआईकेएस वर्तमान में भारत के 525 जिलों में सक्रिय है।

ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के महासचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य हन्नान मोल्लाह ने 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि तिरंगा फहराना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, और इस अधिकार से सरकार डरती है। सीजेपी (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी को 'युद्ध क्षेत्र' में बदल दिया गया है।

मुख्य आरोप और बयान

मोल्लाह ने कहा, 'उन्होंने समय, स्थान और उद्देश्य भी घोषित कर दिया है और तिरंगा फहराना यह संवैधानिक अधिकार है और एक देशभक्तिपूर्ण अभिव्यक्ति है। लेकिन सरकार इससे डरती है।' उन्होंने तंज करते हुए जोड़ा कि सत्तारूढ़ दल रात-दिन देशभक्ति और 'वंदे मातरम' की बात करता है, लेकिन जब आम नागरिकों के झंडा फहराने के लोकतांत्रिक अधिकार की बात आती है तो वह रवैया विरोधाभासी हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि '50 के दशक तक उन्होंने झंडा नहीं फहराया।'

यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में बड़े विरोध प्रदर्शनों को लेकर प्रशासनिक तैयारियाँ चल रही हैं और विपक्षी दलों एवं किसान संगठनों का केंद्र सरकार के साथ तनाव उभरा हुआ है।

सेना की तैनाती पर गंभीर आरोप

मोल्लाह ने केंद्र सरकार पर एक और संगीन आरोप लगाया। उनके अनुसार देश की सीमाओं की रक्षा के लिए बनी सुरक्षा बलों को 'देश की युवा पीढ़ी और अगली पीढ़ी को पीटने के लिए' दिल्ली में तैनात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) भी इस प्रदर्शन में सहभागी है और उन्हें विश्वास है कि यह एक बड़ा प्रदर्शन होगा। गौरतलब है कि विरोध प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की तैनाती का मुद्दा पहले भी राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है।

सत्ता परिवर्तन और संवैधानिक सिद्धांतों पर तीखा रुख

मोल्लाह ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ शक्तियों की 13 वर्षों की गतिविधियाँ संविधान के सिद्धांतों, लोकतांत्रिक अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और जनएकता के विरुद्ध रही हैं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लेने का वादा पूरा किया, लेकिन अन्य समस्याओं के समाधान का आश्वासन अधूरा है।

एआईकेएस का 36वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन

ऑल इंडिया किसान सभा का 36वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन 15 से 18 नवंबर 2026 के बीच नालगोंडा, तेलंगाना में आयोजित होगा। मोल्लाह ने बताया कि यह संगठन 1936 में स्थापित हुआ था और अब अपनी 90वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिससे यह देश का सबसे पुराना किसान संगठन है। संगठन वर्तमान में भारत के 525 जिलों में सक्रिय है।

सम्मेलन में किसानों की समस्याओं, सरकार के वादों की समीक्षा और संगठन के विस्तार की रणनीति पर चर्चा होगी। मोल्लाह ने कहा कि उन क्षेत्रों में भी संगठन को फैलाने की कोशिश होगी जहाँ अब तक पहुँच नहीं बन सकी है। किसान आंदोलन का अगला चरण इस सम्मेलन की दिशा पर काफी हद तक निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल हर विरोध प्रदर्शन के मौसम में नए सिरे से उठता है। लेकिन असली मुद्दा यह है कि किसान संगठनों और नागरिक समाज के विरोध प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती को लेकर संवैधानिक बहस अब केवल वामपंथी दलों तक सीमित नहीं रही। तीन कृषि कानूनों की वापसी के बाद जो आश्वासन दिए गए थे, उनकी पूर्ति न होना एक ऐसा राजनीतिक अधूरापन है जिसे सरकार ने अब तक संबोधित नहीं किया — और यही खाई आगामी सम्मेलन में किसान आंदोलन की नई दिशा तय करेगी।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हन्नान मोल्लाह ने तिरंगे के अधिकार पर क्या कहा?
हन्नान मोल्लाह ने कहा कि तिरंगा फहराना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार और देशभक्तिपूर्ण अभिव्यक्ति है, लेकिन केंद्र सरकार इस अधिकार से डरती है। उन्होंने सत्तारूढ़ पक्ष पर देशभक्ति की बातें करने और साथ ही नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को रोकने का विरोधाभासी रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
सीजेपी विरोध प्रदर्शन क्या है और इसमें कौन शामिल है?
सीजेपी (CJP) का एक प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन नई दिल्ली में आयोजित किया जाना है, जिसमें स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) भी सहभागी बताई जा रही है। मोल्लाह के अनुसार आयोजकों ने समय, स्थान और उद्देश्य पहले ही घोषित कर दिए हैं।
मोल्लाह ने सेना की तैनाती पर क्या आरोप लगाया?
मोल्लाह ने आरोप लगाया कि देश की सीमाओं की रक्षा के लिए बनी सुरक्षा बलों को दिल्ली में युवा पीढ़ी को दबाने के लिए तैनात किया जा रहा है। उन्होंने इसे राजधानी को 'युद्ध क्षेत्र' में बदलने जैसा बताया।
एआईकेएस का 36वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन कब और कहाँ होगा?
ऑल इंडिया किसान सभा का 36वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन 15 से 18 नवंबर 2026 के बीच नालगोंडा, तेलंगाना में आयोजित होगा। इस सम्मेलन में किसानों की समस्याओं, सरकार के वादों की समीक्षा और संगठन के विस्तार की रणनीति पर चर्चा होगी।
ऑल इंडिया किसान सभा कितनी पुरानी है और कहाँ-कहाँ सक्रिय है?
ऑल इंडिया किसान सभा की स्थापना 1936 में हुई थी और यह देश का सबसे पुराना किसान संगठन माना जाता है। यह संगठन अपनी 90वीं वर्षगांठ मना रहा है और वर्तमान में भारत के 525 जिलों में सक्रिय है।
राष्ट्र प्रेस
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