नवीन पटनायक की माँग: जंतर मंतर मामले में CJP नेता रांका और दास को तुरंत रिहा करें
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के नेता प्रतिपक्ष और बीजू जनता दल (BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत की तत्काल समीक्षा और रिहाई की माँग की। पटनायक ने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में किसी को इतनी लंबी हिरासत में रखना संवैधानिक दृष्टि से उचित नहीं है।
पटनायक का बयान और माँग
पटनायक ने अपने आधिकारिक एक्स (X) अकाउंट पर लिखा, "आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत की तुरंत समीक्षा की जानी चाहिए और उन्हें बिना देरी के रिहा किया जाना चाहिए।" उन्होंने आगे जोड़ा कि प्रतिबंधित इलाकों में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए इतनी लंबी हिरासत नहीं होनी चाहिए।
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री पटनायक ने न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि देश के युवाओं का कानून के शासन और संवैधानिक अधिकारों में भरोसा बना रहे।
मुख्य घटनाक्रम: कब और क्यों हुई गिरफ्तारी
13 अक्टूबर 2026 को रांका और दास समेत 14 लोगों को जंतर मंतर, नई दिल्ली में हिरासत में लिया गया था। यह इलाका वर्तमान में विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत नहीं है। इन पर आरोप है कि वे निजी परिसर के रास्ते से प्रवेश कर गए और पुलिसकर्मियों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से रोका।
ये प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में उतरे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। 14 अक्टूबर 2026 को CJP के दोनों नेताओं को शुरुआती तौर पर पाँच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
हिरासत में विस्तार और मजिस्ट्रेट का आदेश
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ऋतु राज ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 तक कर दी। मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा कि रांका और दास के व्यवहार से 'कानून के प्रति कोई सम्मान' नहीं दिखता और यह प्रतीत होता है कि 'प्रतिबंधित (डी नोटिफाइड) इलाकों में विरोध प्रदर्शन करना उनकी आदत' बन चुकी है।
मजिस्ट्रेट के अनुसार, दोनों ने 11 अक्टूबर 2026 को दक्षिण पश्चिम जिले के SEM के समक्ष बॉन्ड भरे थे, जिनका उन्होंने जानबूझकर उल्लंघन किया। बहस के दौरान उन्होंने भरोसा दिलाया था कि वे अपराध नहीं दोहराएंगे, लेकिन जाँच अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों के मद्देनज़र इस आश्वासन को अपर्याप्त माना गया।
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मतदाता सूची 'SIR' प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों में व्यापक आक्रोश है। गौरतलब है कि पटनायक, जो खुद ओडिशा में विपक्ष के नेता हैं, का CJP की केंद्रीय राजनीति से सीधा संबंध नहीं है — फिर भी उनका यह समर्थन संकेत देता है कि विपक्षी वर्ग इस हिरासत को नागरिक स्वतंत्रताओं के व्यापक सवाल से जोड़ कर देख रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब जंतर मंतर परिसर के आसपास प्रदर्शन से जुड़ी गिरफ्तारियाँ राजनीतिक बहस का केंद्र बनी हैं। आलोचकों का कहना है कि किसी नागरिक द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन के लिए सप्ताह भर से अधिक की हिरासत अनुपातहीन है।
आगे क्या होगा
दोनों नेताओं की हिरासत 21 अक्टूबर 2026 को समाप्त होनी है, जिसके बाद न्यायालय का अगला फैसला निर्णायक होगा। पटनायक की सार्वजनिक अपील के बाद यह मामला राष्ट्रीय मीडिया में और अधिक चर्चा में आने की संभावना है। CJP के समर्थकों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का संकेत दिया है यदि 21 अक्टूबर को रिहाई नहीं मिली।