20 अक्टूबर 2026
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वाराणसी: 64 दिन बाद दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती बहाल, काशी के 84 घाट फिर से आपस में जुड़े

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वाराणसी: 64 दिन बाद दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती बहाल, काशी के 84 घाट फिर से आपस में जुड़े

सारांश

64 दिनों की बाढ़-प्रेरित बाधा के बाद वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती अपने मूल स्थान पर लौट आई है। काशी के 84 घाट अब आपस में जुड़ गए हैं और छठ पूजा व देव दीपावली की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं।

मुख्य बातें

दशाश्वमेध घाट पर 20 अक्टूबर 2026 को 64 दिन बाद गंगा आरती अपने निर्धारित स्थान पर फिर से शुरू हुई।
गंगा आरती 17 अगस्त 2026 से बाढ़ के कारण गंगा सेवा निधि के कार्यालय की छत पर आयोजित की जा रही थी।
काशी के अर्धचंद्राकार 84 घाटों के बीच आवाजाही पूरी तरह बहाल; जलस्तर अभी भी निर्धारित स्तर से 10-15 फीट ऊपर।
आरती में हज़ारों श्रद्धालु उपस्थित; घाटों पर बाढ़-पश्चात सफाई और सजावट का काम जारी।
छठ पूजा और देव दीपावली को ध्यान में रखते हुए तैयारियाँ तेज़ कर दी गई हैं।

वाराणसी के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर 64 दिनों के लंबे अंतराल के बाद 20 अक्टूबर 2026 को गंगा आरती एक बार फिर अपने निर्धारित मूल स्थान पर संपन्न हुई। गंगा जल स्तर में उल्लेखनीय गिरावट के साथ ही काशी के अर्धचंद्राकार रूप में फैले 84 घाटों के बीच आवाजाही भी पूरी तरह बहाल हो गई है, और हज़ारों श्रद्धालु आरती में सम्मिलित होने के लिए उमड़ पड़े।

कब और क्यों बाधित हुई थी आरती

बाढ़ की स्थिति के चलते 17 अगस्त 2026 से दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती का आयोजन संभव नहीं हो पाया था। उस दिन के बाद से आरती को गंगा सेवा निधि के कार्यालय की छत पर स्थानांतरित कर दिया गया था। यह स्थिति करीब दो महीनों तक बनी रही, जिससे घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों में निराशा का भाव था।

गंगा का जलस्तर हर वर्ष मानसून के दौरान बढ़ता है और घाटों को जलमग्न कर देता है। इस वर्ष भी जलस्तर में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की गई, जिसके कारण घाट पर आरती का आयोजन सुरक्षित नहीं था।

गंगा सेवा निधि की प्रतिक्रिया

गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि जलस्तर अभी भी निर्धारित स्तर से लगभग 10-15 फीट ऊपर है, लेकिन घाटों तक पहुँच अब पूरी तरह से खुल गई है। उन्होंने कहा, 'दशाश्वमेध घाट के साथ-साथ काशी के 84 घाट जो अर्धचंद्राकार में हैं, उन सभी घाटों का संपर्क पूरी तरह से खुल गया है। लोग एक घाट से दूसरे घाट पर जा सकते हैं।'

मिश्रा ने यह भी कहा कि बाढ़ के बाद घाटों पर जमा हुई मिट्टी की साफ-सफाई का काम तेज़ी से जारी है और सजावट के कार्य भी धीरे-धीरे होते रहेंगे।

आगामी त्योहारों की तैयारी

गंगा आरती के अपने मूल स्थान पर लौटने का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि आगामी हफ्तों में छठ पूजा और देव दीपावली जैसे प्रमुख पर्व आने वाले हैं। इन दोनों त्योहारों पर वाराणसी के घाट देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं से भर जाते हैं।

सुशांत मिश्रा के अनुसार, 'नवरात्रि के बाद आने वाले पर्व जैसे देव दीपावली और छठ हैं, उनको लेकर भी तेज़ी से तैयारी चल रही है।' घाटों पर सफाई और सजावट का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है ताकि समय पर सब कुछ तैयार हो सके।

श्रद्धालुओं में उत्साह

आरती के अपने भव्य स्वरूप में लौटने से श्रद्धालुओं में अपार उत्साह देखा जा रहा है। 20 अक्टूबर को आयोजित आरती में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। गौरतलब है कि दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी वाराणसी की पहचान का अभिन्न हिस्सा है।

यह ऐसे समय में आया है जब काशी में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है और घाटों की बहाली से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी। आने वाले पर्वों के साथ वाराणसी के घाट एक बार फिर अपनी पूरी भव्यता के साथ जीवंत हो उठेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दीर्घकालिक बुनियादी ढाँचे में निवेश का प्रश्न अनुत्तरित रहता है। जलस्तर अभी भी 10-15 फीट ऊपर है — यानी खतरा पूरी तरह टला नहीं है। छठ पूजा और देव दीपावली के लिए लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से पहले घाट प्रबंधन और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती कितने दिन बाद बहाल हुई?
दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती 64 दिनों के अंतराल के बाद 20 अक्टूबर 2026 को अपने निर्धारित मूल स्थान पर पुनः शुरू हुई। बाढ़ के कारण 17 अगस्त 2026 से यह आरती गंगा सेवा निधि के कार्यालय की छत पर आयोजित की जा रही थी।
गंगा आरती को घाट से क्यों हटाना पड़ा था?
मानसून के दौरान गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण दशाश्वमेध घाट जलमग्न हो गया था, जिससे वहाँ आरती आयोजित करना संभव नहीं रहा। गंगा सेवा निधि ने तब से आरती को अपने कार्यालय की छत पर स्थानांतरित कर दिया था।
काशी के 84 घाटों की आवाजाही कब से बहाल हुई?
जलस्तर में पर्याप्त गिरावट के बाद 20 अक्टूबर 2026 को काशी के सभी 84 घाटों के बीच आवाजाही पूरी तरह बहाल हो गई। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा के अनुसार, जलस्तर अभी भी निर्धारित स्तर से 10-15 फीट ऊपर है।
आगामी त्योहारों के लिए वाराणसी के घाटों पर क्या तैयारियाँ हो रही हैं?
छठ पूजा और देव दीपावली को ध्यान में रखते हुए घाटों पर सफाई और सजावट का काम तेज़ी से चल रहा है। बाढ़ के बाद जमा हुई मिट्टी की सफाई जारी है और सजावट के कार्य धीरे-धीरे पूरे किए जा रहे हैं।
गंगा सेवा निधि क्या है और इसकी क्या भूमिका है?
गंगा सेवा निधि एक संगठन है जो वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन गंगा आरती का आयोजन करता है। इस संगठन के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा हैं, जो घाटों की देखरेख और आरती के प्रबंधन का कार्य संभालते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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